सावधान! आपकी सांसों में घुल रहा है 'धीमा जहर', चूरू में बढ़कर 293 पर पहुंचा एक्यूआई

चूरू में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय सुरक्षित सीमा से 1,850 फीसदी अधिक है।
बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक
बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में घुला जहर लोगों को बहुत ज्यादा बीमार बना रहा है, बच्चे और बुजुर्ग इसका सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • देश की हवा में प्रदूषण का खतरा फिर तेजी से बढ़ता दिख रहा है और राजस्थान का चूरू इस संकट का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरा है। 15 मई को यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 293 दर्ज हुआ, जो एक दिन पहले के 119 से 174 अंक अधिक है।

  • यानी सिर्फ 24 घंटे में हवा ‘मध्यम’ से सीधे ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। चूरू की हवा में पीएम2.5 कणों की मात्रा इतनी ज्यादा है कि यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1,850 फीसदी ऊपर है, मानो लोग हर सांस के साथ धीमा जहर अपने शरीर में ले रहे हों।

  • सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के 239 शहरों में से करीब 38 शहरों की हवा साफ रही, जबकि 80 शहर मध्यम और 10 शहर खराब श्रेणी में पहुंचे।

  • सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में झुंझुनू, मेरठ, गाजियाबाद, सिंगरौली, बीकानेर, सिरसा और ग्रेटर नोएडा जैसे शहर शामिल हैं। राजस्थान के तीन शहरों का शीर्ष 10 में होना रेगिस्तानी इलाकों में धूल और मौसमीय बदलाव की गंभीरता दिखाता है।

  • दिल्ली में हल्की राहत के बावजूद हालात चिंताजनक बने हैं। साफ है कि देश के बड़े हिस्से में हवा की गुणवत्ता अब मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि एक गहराता स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया है कि 15 मई 2026 को देश में चूरू की हवा सबसे ज्यादा खराब रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 293 तक पहुंच गया, जो खराब स्थिति को दिखाता है।

चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही दिन में चूरू का एक्यूआई 119 से बढ़कर 293 हो गया, यानी इसमें 174 अंकों का तेज उछाल आया है। एक दिन पहले तक ‘मध्यम’ श्रेणी में रहने वाले यह शहर अब सीधे ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया है, जिससे साफ है कि हवा की गुणवत्ता अचानक तेजी से बिगड़ी है और लोगों की सांसों पर खतरा बढ़ गया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि चूरू की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

चूरू में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,850 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चूरू की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 20.9 गुणा खराब है।

कल बीकानेर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 291 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 230 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 61 अंकों का सुधार हुआ है।

राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 154 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 152 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में दो अंकों की मामूली गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 162 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 179 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 15 मई 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 15.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 46.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 37.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 2.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 19.4 फीसदी का उछाल आया है। दूसरी खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 16.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जोकि राहत की खबर है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में झुंझुनू (288) दूसरे जबकि मेरठ (280) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पंचगांव चौथे स्थान पर है। गाजियाबाद-सिंगरौली में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 242 और 240 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बीकानेर (230) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में सिरसा (228), ग्रेटर नोएडा (218) और चरखी दादरी (206) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (चूरू, झुंझुनू, बीकानेर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चूरू, पंचगांव, चरखी दादरी, मानेसर, यमुना नगर, फरीदाबाद, गुरुग्राम, बर्नीहाट (असम), करनाल, वातवा, दिल्ली, अंबाला, राजकोट, खन्ना, नारनौल, कैथल, हाजीपुर, बहादुरगढ़, काशीपुर, मंगुराहा, गुम्मिडीपूंडी, इंदौर, चेन्नई, चित्तूर, किशनगंज, लखनऊ, कानपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं झुंझुनू, सिंगरौली, बीकानेर, सिरसा, श्री गंगानगर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, पीथमपुर, देवास, बांसवाड़ा, सवाई माधोपुर, हनुमानगढ़, पाली, गांधीनगर, कुरुक्षेत्र, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, मेहसाणा, करौली, बाड़मेर, मंडीदीप, आगरा, उज्जैन, हापुड़, प्रतापगढ़, अहमदाबाद, देहरादून, उदयपुर, ग्वालियर, दौसा, भोपाल, धौलपुर, रतलाम, फतेहाबाद, बल्लभगढ़, टोंक, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), जैसलमेर, जालोर, अमरावती (महाराष्ट्र), वृंदावन, चित्तौड़गढ़, मुरादाबाद, पटियाला, सोनीपत, अमृतसर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 15.9 फीसदी यानी 38 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, छाल, कोयंबटूर, दुर्गापुर, गडग, गुवाहाटी, हल्दिया, कलबुर्गी, कोहिमा, कोलकाता, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, नागौर, नाहरलागुन, पेरुंदुरई, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, रूपनगर, शिलांग, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 111 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुंटूर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कन्नूर, कटिहार, खुर्जा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कोटा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, राजसमंद, रामनगर, रोहतक आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 80 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें आगरा, अहमदाबाद, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंगुल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, भुवनेश्वर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, दौसा, देहरादून, दिल्ली, देवास, धनबाद, धौलपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, इंदौर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, कैथल, कानपुर, करौली, करनाल, काशीपुर, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडीदीप, मानेसर, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पाली, पटियाला, पीथमपुर, प्रतापगढ़, राजकोट, रतलाम, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वातवा, वृंदावन, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में बीकानेर, चरखी दादरी, चूरू, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, झुंझुनू, मेरठ, पंचगांव, सिंगरौली, सिरसा में स्थिति ‘खराब’ है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से 38 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 111 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 14 मई को यह आंकड़ा 114 दर्ज किया गया था।

80 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज चूरू में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 293 दर्ज किया गया। इससे पहले कल चूरू में सूचकांक 119 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 174 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम से ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।

वहीं कल बीकानेर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 291 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 230 पर पहुंच गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 61 अंकों का सुधार हुआ है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 154 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 152 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में दो अंकों की मामूली गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 162 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 179 पर पहुंच गया। हालांकि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 15 मई को पंचगांव चौथे स्थान पर है, वहीं झुंझुनू (288) दूसरे, जबकि मेरठ (280) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 129, गाजियाबाद में 242, गुवाहाटी में 49, गुरूग्राम में 169, नोएडा में 195, ग्रेटर नोएडा में 218 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 103, चेन्नई में 106, चंडीगढ़ में 74, हैदराबाद में 77, जयपुर में 99 और पटना में 100 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 38 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अंबरनाथ, बागलकोट, बारीपदा, बैरकपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, छाल, कोयंबटूर, दुर्गापुर, गडग, गुवाहाटी, हल्दिया, कलबुर्गी, कोहिमा, कोलकाता, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, नागौर, नाहरलागुन, पेरुंदुरई, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, रूपनगर, शिलांग, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विरुधुनगर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, बालासोर, बारबिल, बरेली, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिवंडी, भिवानी, बोइसर, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, कुड्डालोर, कटक, दमोह, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुंटूर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कन्नूर, कटिहार, खुर्जा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कोटा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, राउरकेला, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सोलापुर, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमकुरु, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, यादगीर आदि 111 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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