

23 फरवरी के आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण का संकट अभी टला नहीं है। बल्लभगढ़ में 315 एक्यूआई दर्ज हुआ, जो एक दिन पहले से 60 अंक अधिक है।
दिल्ली में मामूली सुधार जरूर हुआ है, लेकिन राजधानी अब भी ‘खराब’ श्रेणी में है। हरियाणा के कई शहर शीर्ष प्रदूषित सूची में शामिल होकर क्षेत्रीय प्रदूषण की गंभीर तस्वीर पेश कर रहे हैं।
विश्लेषण के मुताबिक 23 फरवरी 2026 को देश में बल्लभगढ़ सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 315 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 22 फरवरी को बल्लभगढ़ में एक्यूआई 255 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 60 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि बल्लभगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बल्लभगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,000 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में पुदुचेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 23 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बल्लभगढ़ की तुलना पुदुचेरी से करें तो वहां स्थिति 13 गुणा खराब है।
गौरतलब है कि कल देश में श्री गंगानगर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 304 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 128 अंकों के सुधार के साथ श्री गंगानगर में सूचकांक घटकर 176 पर पहुंच गया है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 229 दर्ज किया गया था, जो 23 फरवरी को अंक के सुधार के साथ घटकर 228 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 23 फरवरी 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 6.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 39.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 54 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 15.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 17.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में 1.7 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरफ खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 39.1 फीसदी की कमी देखी गई, जोकि राहत की खबर है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 197 (+8) दर्ज किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में चरखी दादरी (287) दूसरे जबकि कटक तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 272 अंकों के साथ धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम-भिवाड़ी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 267 और 266 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गाजियाबाद (250) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बागपत (248), मानेसर (246), ग्रेटर नोएडा (238) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (बल्लभगढ़, चरखी दादरी, धारूहेड़ा, गुरुग्राम, मानेसर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बल्लभगढ़, चरखी दादरी, धारूहेड़ा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, बागपत, मानेसर, हापुड़, नोएडा, सिंगरौली, पानीपत, कोटा, यमुना नगर, कुरुक्षेत्र, वातवा, नंदेसरी, चित्तौड़गढ़, देहरादून, बूंदी, करनाल, मुजफ्फरनगर, नागपुर, हाजीपुर, टोंक, बोइसर, नलबाड़ी, चंडीगढ़, पंचगांव, जींद, कोलकाता, बर्नीहाट, सोनीपत, बारीपदा, मेहसाणा, ब्रजराजनगर, ग्वालियर, नागांव, नारनौल, सूरत, पुणे, काशीपुर, उज्जैन, झालावाड़, वडोदरा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं भिवाड़ी, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, पीथमपुर, बारबिल, सिरसा, बिलीपाड़ा, नयागढ़, भावनगर, गांधीनगर, अहमदाबाद, तुमडीह, बठिंडा, गुवाहाटी, कुंजेमुरा, महाड, तालचेर, चंद्रपुर, भिवंडी, सिलीगुड़ी, नागौर, पाली, राजकोट, भीलवाड़ा, उल्हासनगर, लखनऊ, झुंझुनू, अलवर, बुलंदशहर, राउरकेला, खुर्जा, नवी मुंबई, प्रतापगढ़, मंगुराहा, रतलाम, बदलापुर, क्योंझर, मुरादाबाद, चुरू, पिंपरी-चिंचवाड़, आगरा, पटियाला, जोधपुर, रायरंगपुर, जालंधर, नाहरलागुन, कैथल, पटना, उदयपुर, कल्याण, बेलापुर, अजमेर, हनुमानगढ़, सहरसा, कोरबा, जैसलमेर, सीकर, अमरावती (महाराष्ट्र) आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 6.3 फीसदी यानी महज 15 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चामराजनगर, चेन्नई, चित्तूर, दमोह, कलबुर्गी, मदिकेरी, पंचकुला, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 95 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें भुवनेश्वर, बिलासपुर, बक्सर, छपरा, चिक्कमगलुरु, दौसा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, हल्दिया, हिसार, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, जलना, जालोर, झांसी, कडप्पा, कन्नूर, करौली, कटिहार, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, लातूर, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, नांदेड़, नासिक, पलवल, पंपोर, परभनी, प्रयागराज, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रामनगर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, ठाणे, तिरुपति, तुमकुरु, वापी, वाराणसी आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 114 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेलापुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चुरू, देहरादून, देवास, धनबाद, फरीदाबाद, गांधीनगर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, कल्याण, कानपुर, करनाल, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पंचगांव, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, रायरंगपुर, राजकोट, रतलाम, राउरकेला, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, वृंदावन, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 14 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बागपत, भिवाड़ी, चरखी दादरी, कटक, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हापुड़, मानेसर, नोएडा, पानीपत, सिंगरौली शामिल हैं। वहीं बल्लभगढ़ में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से महज 15 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 95 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 22 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 81 दर्ज किया गया था।
114 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज बल्लभगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 315 पर पहुंच गया। इससे पहले कल बल्लभगढ़ में एक्यूआई 255 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 60 अंकों का इजाफा हुआ है।
कल श्री गंगानगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 304 दर्ज किया गया था। वहीं आज 128 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 176 पर पहुंच गया है। मतलब कि वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में 23 फरवरी को प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 229 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 228 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में एक अंक की गिरावट आई है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 280 फीसदी अधिक खराब है।
दूसरी तरफ फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया है। फरीदाबाद में कल जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 189 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 197 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 23 फरवरी को धारूहेड़ा चौथे स्थान पर है, वहीं चरखी दादरी (287) दूसरे, जबकि कटक तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 130, गाजियाबाद में 250, गुवाहाटी में 144, गुरूग्राम में 267, नोएडा में 221, ग्रेटर नोएडा में 238 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 102 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 124, चेन्नई में 50, चंडीगढ़ में 142, हैदराबाद में 84, जयपुर में 120 और पटना में 111 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 15 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, भिलाई, चामराजनगर, चेन्नई, चित्तूर, दमोह, कलबुर्गी, मदिकेरी, पंचकुला, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला शामिल हैं।
वहीं अहमदनगर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बैरकपुर, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भिवानी, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बक्सर, छपरा, चिक्कमगलुरु, दौसा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, हल्दिया, हिसार, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, जलना, जालोर, झांसी, कडप्पा, कन्नूर, करौली, कटिहार, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, लातूर, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, नांदेड़, नासिक, पलवल, पंपोर, परभनी, प्रयागराज, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रामनगर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, सागर, समस्तीपुर, सांगली, सासाराम, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, ठाणे, तिरुपति, तुमकुरु, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, यादगीर आदि 95 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
बढ़ते ओजोन से श्री गंगानगर में स्थिति 'बेहद खराब', ब्यासनगर-धारूहेड़ा में भी 300 से ऊपर एक्यूआई