

देश में वायु प्रदूषण का संकट गहराता जा रहा है। 11 मार्च 2026 को मध्य प्रदेश का मंडीदीप देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर सामने आया, जहां एक्यूआई 334 तक पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से लगभग 2100 फीसदी अधिक है।
दूसरी ओर नागालैंड की राजधानी कोहिमा में एक्यूआई मात्र 22 दर्ज किया गया, जो देश की सबसे साफ हवा को दर्शाता है।
दिल्ली में प्रदूषण में थोड़ी गिरावट जरूर आई है, लेकिन एक्यूआई 244 के साथ हवा अभी भी खराब बनी हुई है और मानकों से करीब 400 फीसदी ज्यादा प्रदूषित है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 244 शहरों के आंकड़ों के अनुसार केवल 6.1 फीसदी शहरों में ही हवा साफ है, जबकि लगभग 64 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है। यह तस्वीर बताती है कि देश के अधिकांश शहर जहरीली हवा के बीच सांस लेने को मजबूर हैं।
विश्लेषण के मुताबिक 11 मार्च 2026 को देश में मंडीदीप सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 334 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल मंडीदीप में एक्यूआई 275 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 59 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
रुझानों में सामने आया है कि मंडीदीप की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
मंडीदीप में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,100 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में कोहिमा की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 22 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मंडीदीप की तुलना कोहिमा से करें तो वहां स्थिति 15 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में ग्रेटर नोएडा की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 340 दर्ज किया गया। हालांकि आज 8 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक 332 पर पहुंच गया है। लेकिन चिंता की बात है कि ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 265 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 244 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 21 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 400 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 224 दर्ज किया गया था, जो आज भी 224 पर बना हुआ है। इसका मतलब कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता अभी भी खराब श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 11 मार्च 2026 को 244 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 6.1 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 29.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 64.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 114 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 16 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कोई बदलाव नहीं हुई है और स्थिति जस की तस बनी हुई है। दूसरी तरह खराब गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से करीब 35 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (332) दूसरे जबकि अंबरनाथ (304) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह गुरुग्राम चौथे स्थान पर है। सिंगरौली-बल्लभगढ़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 304 और 293 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
गाजियाबाद (286) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मानेसर (284), मुजफ्फरनगर (277), और यमुना नगर (277) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (गुरुग्राम, बल्लभगढ़, यमुनानगर, मानेसर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडीदीप, गुरुग्राम, सिंगरौली, गाजियाबाद, मानेसर, मुजफ्फरनगर, यमुना नगर, नोएडा, हापुड़, मेरठ, आगरा, बहादुरगढ़, काशीपुर, भिवाड़ी, अगरतला, करनाल, फरीदाबाद, बुलंदशहर, बागपत, नाहरलागुन, बर्नीहाट, लखनऊ, हाजीपुर, बारबिल, पंचगांव, खुर्जा, छपरा, समस्तीपुर, गुवाहाटी, सूरत, उल्हासनगर, धारूहेड़ा, गया, ग्वालियर, बद्दी, महाड, जयपुर, जींद, कानपुर, अंकलेश्वर, गुम्मिडीपूंडी, भिवानी, पटना, नागांव, अंबाला, चंडीगढ़, मुरादाबाद, सांगली, आरा, कल्याण, पिंपरी-चिंचवाड़, उदयपुर, कोटा, सोनीपत, वातवा, मोतिहारी, अहमदनगर, दमोह, कैथल, पुणे, बिहार शरीफ, रूपनगर, खन्ना, नागपुर, नलबाड़ी, अररिया, मुजफ्फरपुर, नारनौल, बक्सर, कोयंबटूर, मुंबई, दुर्गापुर, सोलापुर, प्रयागराज, राउरकेला आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, बल्लभगढ़, दिल्ली, सहरसा, सवाई माधोपुर, टोंक, सीकर, कुरुक्षेत्र, कुंजेमुरा, बिलीपाड़ा, गांधीनगर, नासिक, भिवंडी, हनुमानगढ़, चंद्रपुर, बदलापुर, नागौर, विशाखापत्तनम, पानीपत, भीलवाड़ा, बीकानेर, क्योंझर, जोधपुर, हिसार, पाली, झुंझुनू, सिलीगुड़ी, धनबाद, चुरू, मंगुराहा, बेलापुर, भरतपुर, ठाणे, लुधियाना, जैसलमेर, जालंधर, करौली, विरार, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बारां, पटियाला, रायबरेली, कटनी, सुआकाती, झालावाड़, मीरा-भायंदर, भावनगर, जलगांव, टेन्सा, बोइसर, धौलपुर, नयागढ़, जालोर, तुमडीह, अलवर, दौसा, अजमेर, रतलाम, कटक, वृंदावन, औरंगाबाद (बिहार), कन्नूर, नांदेड़, अकोला आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 6.1 फीसदी यानी महज 15 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, कोहिमा, मदिकेरी, पंपोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, रामनगर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 72 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें अमृतसर, अनंतपुर, आसनसोल, बांसवाड़ा, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भुवनेश्वर, बिलासपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, धुले, डूंगरपुर, एलूर, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कटिहार, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुंगेर, मैसूर, पलवल, पंचकुला, परभनी, प्रतापगढ़, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, सागर आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 125 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अंबाला, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बालासोर, बारां, बारीपदा, बाड़मेर, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, छपरा, चित्तौड़गढ़, चुरू, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दौसा, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, महाड, मंगुराहा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रयागराज, पुणे, रायबरेली, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, समस्तीपुर, सांगली, सीकर, सिलीगुड़ी, सोलापुर, सोनीपत, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, ठाणे, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 27 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अगरतला, आगरा, अंगुल, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारबिल, भिवाड़ी, बुलंदशहर, बर्नीहाट, दिल्ली, फरीदाबाद, गाजियाबाद, हाजीपुर, हापुड़, करनाल, काशीपुर, लखनऊ, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नाहरलागुन, नोएडा, सहरसा, सवाई माधोपुर, श्री गंगानगर, यमुना नगर शामिल हैं।
वहीं अंबरनाथ, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मंडीदीप, सिंगरौली में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 244 में से महज 15 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 72 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 10 मार्च को यह आंकड़ा 86 दर्ज किया गया था।
125 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मंडीदीप में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 334 पर पहुंच गया। वहीं कल मंडीदीप में एक्यूआई 275 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 59 अंकों का इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रिकॉर्ड की गई थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 340 तक पहुंच गया। वहीं आज ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 332 दर्ज किया गया। मतलब कि कल से सूचकांक में 8 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 265 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 244 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 21 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 400 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 224 दर्ज किया गया था, जो आज भी 224 पर बना हुआ है। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 11 मार्च को गुरुग्राम चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (332) दूसरे, जबकि अंबरनाथ (304) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 172, गाजियाबाद में 286, गुवाहाटी में 176, गुरूग्राम में 304, नोएडा में 266, ग्रेटर नोएडा में 332 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 111 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 207, चेन्नई में 98, चंडीगढ़ में 147, हैदराबाद में 73, जयपुर में 165 और पटना में 154 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 15 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, बागलकोट, भिलाई, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, कोहिमा, मदिकेरी, पंपोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, रामनगर, शिलांग, शिवमोगा, श्रीनगर, थूथुकुडी शामिल हैं।
वहीं अमरावती (आंधप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आसनसोल, बांसवाड़ा, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भुवनेश्वर, बिलासपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, धुले, डूंगरपुर, एलूर, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कटिहार, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मेहसाणा, मुंगेर, मैसूर, पलवल, पंचकुला, परभनी, प्रतापगढ़, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, सागर, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, यादगीर आदि 72 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
वायु प्रदूषण: ग्रेटर नोएडा, सिंगरौली, गाजियाबाद, गुरुग्राम, यमुना नगर में स्थिति 'बेहद खराब'