देश में वायु प्रदूषण का नक्शा एक बार फिर तेजी से बदलता नजर आ रहा है। 7 जून 2026 को झारखंड का धनबाद 291 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां महज 24 घंटों में प्रदूषण 82 अंकों की छलांग लगाकर ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया। स्थिति इतनी गंभीर है कि वहां पीएम10 कणों का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 500 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।
इसके उलट कर्नाटक का मदिकेरी 18 एक्यूआई के साथ देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जो धनबाद और मदिकेरी के बीच हवा की गुणवत्ता में 18 गुना का अंतर दिखाता है।
हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर कुछ राहत के संकेत भी मिले हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 235 शहरों के आंकड़ों के अनुसार 57.4 फीसदी शहरों में हवा ‘संतोषजनक’ और 15.7 फीसदी शहरों में ‘बेहतर’ श्रेणी में रही।
दिल्ली, फरीदाबाद और बल्लभगढ़ जैसे शहरों में भी पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदूषण में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी ओर कैथल, कुरुक्षेत्र, मेरठ, बागपत और ग्रेटर नोएडा जैसे शहर अब भी खराब हवा से जूझ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि देश के अधिकांश शहरों में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन कुछ औद्योगिक और उत्तर भारतीय शहरों में प्रदूषण अब भी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 07 जून 2026 को देश में धनबाद सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 291 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल धनबाद में सूचकांक 209 दर्ज किया गया था। मतलब कि वहां कल से प्रदूषण में 82 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि धनबाद की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
धनबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 18 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर धनबाद की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 18 गुणा खराब है।
बता दें कि इससे पहले कल बल्लभगढ़ में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 280 तक पहुंच गया। हालांकि आज 131 अंकों के भारी सुधार के साथ बल्लभगढ़ में सूचकांक 149 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 176 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 144 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 32 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
इससे पहले 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 237 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 112 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता खराब से एक बार फिर मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 07 जून 2026 को 235 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 15.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 57.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 26.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 7.5 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 7.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 6.5 फीसदी की कमी आई है। खराब हवा वाले शहरों के आंकड़ों को देखें तो उसमें 37.5 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में कैथल (222) दूसरे जबकि कुरुक्षेत्र तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मेरठ (208) चौथे स्थान पर है। बागपत (203) - ग्रेटर नोएडा (200) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
मुजफ्फरनगर (194) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में रूपनगर (193), पानीपत (192) और बद्दी (190) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के चार शहर (मेरठ, बागपत, ग्रेटर नोएडा (गौतम बुद्ध नगर), मुजफ्फरनगर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि कैथल, रूपनगर, भिवानी, जींद, बर्नीहाट (मेघालय), करनाल, अंबाला, बहादुरगढ़, पंचगांव, वातवा, धारूहेड़ा, मंडीदीप, बठिंडा, बर्नीहाट (असम), वापी, चरखी दादरी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं धनबाद, कुरुक्षेत्र, मेरठ, बागपत, ग्रेटर नोएडा, मुजफ्फरनगर, पानीपत, बुलंदशहर, गाजियाबाद, सोनीपत, सिंगरौली, नोएडा, बल्लभगढ़, दिल्ली, पाली, यमुना नगर, हापुड़, पटियाला, गुरुग्राम, विशाखापत्तनम, पीथमपुर, हनुमानगढ़, हिसार, गया, चूरू, बांसवाड़ा, फतेहाबाद, अमृतसर, भिवाड़ी, लखनऊ, छपरा, फरीदाबाद, अगरतला, मुरादाबाद, उदयपुर, खन्ना, लुधियाना, बाड़मेर, खुर्जा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 15.7 फीसदी यानी 37 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, धौलपुर, गडग, गंगटोक, हुबली, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मैंगलोर, मुंगेर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 135 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलासपुर, बोइसर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालौर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेहसाणा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 58 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, अंबाला, अमृतसर, बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, बठिंडा, भरतपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट मेघालय), चरखी दादरी, छपरा, चूरू, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, झालावाड़, जींद, करनाल, खन्ना, खुर्जा, लखनऊ, लुधियाना, मंडीदीप, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पाली, पंचगांव, पानीपत, पटियाला, पीथमपुर, रूपनगर, सिंगरौली, सोनीपत, तालचेर, तुमडीह, उदयपुर, वापी, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बागपत, धनबाद, कैथल, कुरुक्षेत्र, मेरठ में स्थिति खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 235 में से 37 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 135 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 06 जून को यह आंकड़ा 126 दर्ज किया गया था।
58 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज धनबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 291 दर्ज किया गया। हालांकि कल वहां एक्यूआई 209 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में धनबाद में प्रदूषण के स्तर में 82 अंकों का भारी उछाल आया है।
इससे पहले कल बल्लभगढ़ में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 280 तक पहुंच गया। हालांकि आज 131 अंकों के भारी सुधार के साथ बल्लभगढ़ में सूचकांक 149 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 176 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 144 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 32 अंकों का सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 237 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 112 पर पहुंच गया। इसके साथ ही फरीदाबाद में आज वायु गुणवत्ता खराब से एक बार फिर मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 07 जून को मेरठ (208) चौथे स्थान पर है, वहीं कैथल (222) दूसरे, जबकि कुरुक्षेत्र (222) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 81, गाजियाबाद में 164, गुवाहाटी में 68, गुरूग्राम में 134, नोएडा में 150, ग्रेटर नोएडा में 200 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 66 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 113, चेन्नई में 59, चंडीगढ़ में 86, हैदराबाद में 63, जयपुर में 83 और पटना में 76 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 37 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, अंबरनाथ, बैरकपुर, बेगूसराय, बेतिया, भिलाई, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, धौलपुर, गडग, गंगटोक, हुबली, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कोहिमा, कोरबा, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मैंगलोर, मुंगेर, मैसूर, नलबाड़ी, पंपोर, पुडुचेरी, रामनगर, समस्तीपुर, सांगली, शिवसागर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, उल्हासनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंगुल, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बारबिल, बरेली, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलासपुर, बोइसर, बूंदी, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालौर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटिहार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाद, मैहर, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मानेसर, मेहसाणा, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सासाराम, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, टोंक, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन आदि 135 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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