

03 अगस्त 2026 को जारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि बिहार शरीफ एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर सामने आया। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 387 दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है।
चिंताजनक बात यह है कि केवल 24 घंटे में यहां एक्यूआई 278 से बढ़कर 387 पहुंच गया, यानी 109 अंकों का उछाल दर्ज हुआ। शहर की हवा में पीएम2.5 कण पूरी तरह हावी रहे और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 2,470 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।
इसके विपरीत, नाहरलागुन देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जहां एक्यूआई केवल 13 रिकॉर्ड किया गया। दोनों शहरों के बीच वायु गुणवत्ता का अंतर लगभग 30 गुना रहा।
राष्ट्रीय स्तर पर तस्वीर अपेक्षाकृत राहत भरी रही। 255 शहरों में से 105 शहरों की हवा 'बेहतर' और 135 शहरों की 'संतोषजनक' श्रेणी में दर्ज की गई।
दिल्ली में भी पिछले 24 घंटों के दौरान एक्यूआई 78 से घटकर 76 हो गया और हवा संतोषजनक बनी रही। हालांकि बिहार शरीफ जैसे शहर यह संकेत दे रहे हैं कि देश के कई हिस्सों में प्रदूषण अभी भी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 03 अगस्त 2026 को एक बार फिर देश में बिहार शरीफ सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 387 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (02 अगस्त) सरकारी आंकड़ों में बिहार शरीफ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 278 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 109 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बिहार शरीफ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बिहार शरीफ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,470 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में नाहरलागुन की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बिहार शरीफ की तुलना नाहरलागुन से करें तो वहां स्थिति 29.8 गुणा खराब है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 78 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 76 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में दो अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 02 अगस्त को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में मामूली बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 74 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 75 पर पहुंच गया। हालांकि एक अंक के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 03 अगस्त 2026 को 255 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 41.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 53 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 5.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 4.5 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों में 10.7 फीसदी की वृद्धि देखी गई। वहीं मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 30 फीसदी का कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बिलीपाड़ा (178) दूसरे जबकि बर्नीहाट (मेघालय) (154) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सोनीपत (133) चौथे स्थान पर है। विशाखापत्तनम (132) – गुरुग्राम (130) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
जोरापोखर (120) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में पानीपत (119), सिलीगुड़ी (116) और श्री गंगानगर (114) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन शहर (गुरुग्राम, पानीपत और सोनीपत) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बिहार शरीफ, बर्नीहाट (मेघालय) और गुरुग्राम आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं बिलीपाड़ा, सोनीपत, विशाखापत्तनम, जोरापोखर, पानीपत, श्री गंगानगर, कुंजेमुरा, मंडी गोबिंदगढ़, सिवान, वातवा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 41.2 फीसदी यानी 105 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जलगांव, जालोर, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, सांगली, सवाई माधोपुर, शिलांग, सिंगरौली, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विरार आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 135 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, छपरा, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दमोह, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हिसार, हावड़ा, हुबली, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, करनाल, कारवार, कटिहार आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 14 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें बिलीपाड़ा, बर्नीहाट (मेघालय), धनबाद, गुरुग्राम, जोरापोखर, कुंजेमुरा, मंडी गोबिंदगढ़, पानीपत, सिलीगुड़ी, सिवान, सोनीपत, श्री गंगानगर, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं। वहीं बिहार शरीफ (387) में स्थिति 'बेहद खराब' है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 255 में से 105 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 135 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 02 अगस्त को यह आंकड़ा 122 दर्ज किया गया था।
14 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर बिहार शरीफ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 387 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (02 अगस्त) सरकारी आंकड़ों में बिहार शरीफ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 278 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 109 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 78 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 76 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में दो अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में मामूली बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 74 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 75 पर पहुंच गया। हालांकि एक अंक के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 03 अगस्त को सोनीपत (133) चौथे स्थान पर है, वहीं बिलीपाड़ा (178) दूसरे, जबकि बर्नीहाट (मेघालय) (154) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 53, गाजियाबाद में 78, गुवाहाटी में 73, गुरूग्राम में 130, नोएडा में 74, ग्रेटर नोएडा में 85 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 48 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 74, चेन्नई में 75, चंडीगढ़ में 44, हैदराबाद में 49, जयपुर में 48 और पटना में 65 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 105 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, अररिया, बदलापुर, बारां, बरेली, बीड, बेलापुर, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बूंदी, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, देहरादून, धुले, डोंबिवली, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गंगटोक, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जलगांव, जालोर, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुरनूल, लातूर, मदिकेरी, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मथुरा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, सागर, सांगली, सवाई माधोपुर, शिलांग, सिंगरौली, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विरार, वृंदावन, यादगीर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बागलकोट, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, छपरा, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दमोह, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हिसार, हावड़ा, हुबली, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, करनाल, कारवार, कटिहार, खन्ना, खोरा, कोहिमा, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मैसूर, नागांव, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंपोर, पटना, पीथमपुर, पूर्णिया, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सतारा, सतना, शामली, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, सूरत, तालचेर, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, विजयवाड़ा, यमुना नगर आदि 135 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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