भारत के 247 में से 50 फीसदी शहरों में हवा साफ, 201 एक्यूआई के साथ भागलपुर सबसे प्रदूषित

भागलपुर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 700 फीसदी अधिक है।
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सारांश
  • देश के अधिकांश हिस्सों में 31 जुलाई 2026 को हवा ने राहत दी, लेकिन बिहार का भागलपुर प्रदूषण का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 247 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, भागलपुर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 201 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी में है। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि महज 24 घंटे में यहां एक्यूआई 63 से बढ़कर 201 पहुंच गया और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षित सीमा से करीब 700 फीसदी अधिक रहा।

  • इसके विपरीत मदिकेरी और रायपुर सबसे स्वच्छ शहर रहे, जहां एक्यूआई केवल 14 दर्ज किया गया।

  • राहत की बात यह है कि देश के 247 में से 124 शहरों (50.2 फीसदी) में हवा 'बेहतर' और 100 शहरों (40.5 फीसदी) में 'संतोषजनक' रही। दिल्ली और फरीदाबाद में भी प्रदूषण में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जबकि बांसवाड़ा ने 24 घंटे में खराब से साफ हवा तक का सफर तय किया।

  • हालांकि, भागलपुर, गुम्मिडीपूंडी, पाली और हरियाणा के कई शहरों में बढ़ता प्रदूषण यह संकेत देता है कि देश में वायु गुणवत्ता अभी भी तेज उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही है और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर सख्त नियंत्रण की जरूरत बनी हुई है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 31 जुलाई 2026 को देश में भागलपुर  सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 201 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल (30 जुलाई) को भागलपुर में एक्यूआई 63 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 138 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि भागलपुर की हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

भागलपुर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 700 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी- रायपुर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहरों भागलपुर की तुलना मदिकेरी- रायपुर से करें तो वहां स्थिति 14.3 गुणा खराब है।

गौरतलब है कि कल देश में बांसवाड़ा की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता का स्तर 257 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 208 अंकों के भारी सुधार के साथ बांसवाड़ा में एक्यूआई घटकर 49 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सीधे खराब से साफ हो गई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 107 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 77 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 30 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 100 दर्ज किया गया था, जो आज गिरकर 65 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 35 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 31 जुलाई 2026 को 247 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 50.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 40.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 8.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा साफ है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 37.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों में भी 18.7 फीसदी की गिरावट देखी गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 33.3 फीसदी का कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।   

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गुम्मिडीपूंडी (175) दूसरे जबकि पाली (133) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सोनीपत (132) चौथे स्थान पर है। श्री गंगानगर (126) – गांधीनगर (120) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

नारनौल (118) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में चरखी दादरी (116), सिलीगुड़ी (116) और पीथमपुर (115) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन शहर (सोनीपत, नारनौल, और चरखी दादरी) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुम्मिडीपूंडी, नारनौल, चरखी दादरी, गुरुग्राम, अलवर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं पाली, सोनीपत, श्री गंगानगर, गांधीनगर, पीथमपुर, जोधपुर, ग्रेटर नोएडा, बद्दी, भीलवाड़ा, झुंझुनू, सिवान, वातवा, बीकानेर, मंडीदीप आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 50.2 फीसदी यानी 124 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कुड्डालोर, दमोह, दावनगेरे, डोंबिवली, दुर्गापुर, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गजरौला, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, जलना, जींद, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कारवार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, मदिकेरी, महाद, मैहर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 100 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें छपरा, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, देहरादून, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, ग्वालियर, हापुड़, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करनाल, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मोतिहारी, मुंबई, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नेल्लोर, नोएडा, पटना, प्रतापगढ़ आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 22 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अलवर, बद्दी, भीलवाड़ा, बीकानेर, चरखी दादरी, धनबाद, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, झुंझुनू, जोधपुर, खोरा, मंडीदीप, नारनौल, पाली, पीथमपुर, सिलीगुड़ी, सिवान, सोनीपत, श्री गंगानगर, वातवा आदि शामिल हैं। वहीं भागलपुर (201) में स्थिति 'खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 247 में से 124 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 100 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 30 जुलाई को यह आंकड़ा 123 दर्ज किया गया था।

22 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज भागलपुर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 201 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (30 जुलाई) को भागलपुर में एक्यूआई 63 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 138 अंकों का भारी उछाल आया है।

गौरतलब है कि कल देश में बांसवाड़ा की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता का स्तर 257 तक पहुंच गया था। हालांकि आज 208 अंकों के भारी सुधार के साथ बांसवाड़ा में एक्यूआई घटकर 49 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सीधे खराब से साफ हो गई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 107 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 77 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 30 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 100 दर्ज किया गया था, जो आज गिरकर 65 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 35 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 31 जुलाई को सोनीपत (132) चौथे स्थान पर है, वहीं गुम्मिडीपूंडी (175) दूसरे, जबकि पाली (133) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 53, गाजियाबाद में 66, गुवाहाटी में 41, गुरूग्राम में 111, नोएडा में 82, ग्रेटर नोएडा में 109 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 53 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 59, चेन्नई में 97, चंडीगढ़ में 37, हैदराबाद में 45, जयपुर में 58 और पटना में 51 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 124 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागपत, बालासोर, बांसवाड़ा, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बीड, बेलापुर, बेंगलुरु, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, दमोह, दावनगेरे, डोंबिवली, दुर्गापुर, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गजरौला, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, जलना, जींद, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कारवार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, मदिकेरी, महाद, मैहर, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतारा, शामली, शिलांग, सिलचर, सिंगरौली, सोलापुर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुमाला, उज्जैन, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयपुरा, विरार, वृंदावन, यादगीर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, बागलकोट, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारां, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, भावनगर, भिवाड़ी, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बर्नीहाट (मेघालय), चेन्नई, छाल, छपरा, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, देहरादून, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, ग्वालियर, हापुड़, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करनाल, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मोतिहारी, मुंबई, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नेल्लोर, नोएडा, पटना, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, राजकोट, राजसमंद, सतना, सवाई माधोपुर, सिरोही, सिरसा, सूरत, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, टोंक, तुमकुरु, तुमडीह, उदयपुर, वडोदरा, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि 100 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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