मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक बाघिन को जहर देकर मार दिया गया है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, उसका शव शुक्रवार 27 मार्च 2026 को सड़ी गली अवस्था में मिला।।
उसे सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की सीमा के नजदीक संगखेड़ा रेंज में गाड़ा गया था। यह इलाका पश्चिमी छिंदवाड़ा डिवीजन में आता है। इस मामले में पांच लोगों को वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है।
द हिंदू अखबार से बात करते हुए सतपुड़ा के फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने कहा कि मृत बाघिन को 2018 में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लाया गया था। और इस बाघिन ने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की सीमा के बाहर अपना एक इलाका बनाया था।
यह बाघिन आधिकारिक रूप से रेडिया कॉलर्ड बाधिन थी। यह ऐसी तकनीक होती है जिससे उसकी गतिविधि पता चलती है और शिकार से बचाया जाता है। इस वजह से उसकी मौत संदेह पैदा करती है।
'न्यू इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, पशुओं पर हुए हमले का बदला लेने के लिए 50 वर्षीय एक व्यक्ति ने अपने बैल के शव में यूरिया मिलाकर बाघिन को जहर दे दिया। बाद में अपने अपराध को छिपाने के लिए उसने चार साथियों की मदद से उस बाघिन को दफना दिया और उसके रेडियो कॉलर को जला दिया।
लेकिन यह मामला उसका सीधा नहीं है जितना दिखता है।
एक सूत्र ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मुख्य आरोपी ने बाघिन को जहर देकर उसके रेडियो-कॉलर को इसलिए जला दिया,, ताकि वन विभाग के अधिकारी जानवर की गतिविधियों पर नजर रखते हुए पास में मौजूद अफीम की अवैध खेती का पता न लगा सकें।
भोपाल में रहने वाले एक वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने बताया कि जिस इलाके में अपराध हुआ है वह पेड़ों की अवैध कटाई और अफीम की खेती का गढ़ है। अत्यधिक जोखिमपूर्ण वाले इस क्षेत्र में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीमें निष्क्रिय बनी रहीं और वे ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए जरूरी निगरानी करने में विफल रहीं।
कार्यकर्ता ने यह भी कहा कि रेडिया कॉलर्ड बाघिन के ट्रैकिंग उपकरण ने 3 मार्च 2026 से उसकी लोकेशन बतानी बंद कर दी थी। इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारियों ने उसकी खोज तब शुरू की जब 26 मार्च से सिग्नल मिलने बंद हो गए।
यानी वन विभाग के अधिकारी 23 दिन तक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे।
बाघिन की यह हत्या ऐसे वक्त में हुई है जब मध्य प्रदेश में बाघों की मृत्युदर में इजाफा हुआ है। राज्य में जनवरी 2026 से 14 बाघों की मौत हो चुकी है। इसका अर्थ यह भी है कि मवेशियों के कारण बाघों और जंगलों के पास रहने वाले लोगों के बीच टकराव बढ़ रहा है।