भारत में बढ़ रही एक सींग वाले गैंडों की संख्या, लेकिन अवैध शिकार बड़ी चुनौती

विश्व गैंडा दिवस: भारत में एक सींग वाले गैंडों की बढ़ती संख्या संरक्षण प्रयासों की सफलता दिखाती है, लेकिन आवास संरक्षण व अवैध शिकार रोकना अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
आवास संरक्षण, घास के मैदानों की सुरक्षा और अवैध शिकार रोकना गैंडों के लंबी अवधि के संरक्षण के लिए जरूरी है।
आवास संरक्षण, घास के मैदानों की सुरक्षा और अवैध शिकार रोकना गैंडों के लंबी अवधि के संरक्षण के लिए जरूरी है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • भारत में एक सींग वाले गैंडों की संख्या बढ़ी, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश संरक्षण के प्रमुख केंद्र बने।

  • असम में गैंडों की आबादी 3,260 पहुंची, 2025 में अवैध शिकार की कोई ज्ञात घटना दर्ज नहीं हुई।

  • पश्चिम बंगाल में गैंडों की संख्या बढ़कर 392 हुई, जलदापाड़ा और गोरुमारा प्रमुख संरक्षण क्षेत्र बने।

  • दुधवा टाइगर रिजर्व में गैंडों की संख्या 53 पहुंची, असम और नेपाल से शुरू हुआ पुनर्वास कार्यक्रम सफल रहा।

  • आवास संरक्षण, घास के मैदानों की सुरक्षा और अवैध शिकार रोकना गैंडों के लंबी अवधि के संरक्षण के लिए जरूरी है।

दुनिया के पांचों गैंडा प्रजातियों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 22 सितंबर को विश्व गैंडा दिवस मनाया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दिन का उद्देश्य गैंडों के सामने मौजूद खतरों और उनके संरक्षण के प्रयासों की जानकारी लोगों तक पहुंचाना है। इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन के अनुसार, यह दिवस वर्ष 2011 से 22 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस साल संरक्षण अभियान में पांचों प्रजातियों को बचाए रखने का संदेश प्रमुख है।

भारत में एक सींग वाले गैंडे की संख्या बढ़ी

भारत दुनिया में एक सींग वाले गैंडे यानी ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो का सबसे बड़ा घर है। इसका वैज्ञानिक नाम राइनोसिरोस यूनिकॉर्निस है। इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में इस प्रजाति के करीब 4,075 गैंडे हैं। इनमें भारत और नेपाल प्रमुख देश हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो दशकों में इस प्रजाति की संख्या में अच्छी वृद्धि हुई है।

भारत में एक सींग वाले गैंडे मुख्य रूप से असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं। इनका प्राकृतिक आवास नदियों के किनारे के घास के मैदान, दलदली क्षेत्र और तराई के जंगल हैं।

असम बना हुआ है सबसे बड़ा गढ़

भारत में एक सींग वाले गैंडों की सबसे बड़ी आबादी असम में है। राज्य में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान इन गैंडों का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ठिकाना है। इसके अलावा पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य, ओरांग राष्ट्रीय उद्यान और मानस राष्ट्रीय उद्यान भी गैंडों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

काजीरंगा में संरक्षण के लिए लंबे समय से गश्त, आवास प्रबंधन और अवैध शिकार रोकने के उपाय किए जा रहे हैं। साल 2022 की गणना में काजीरंगा में 2,613 गैंडे दर्ज किए गए थे। असम की हाल की गणना में राज्य में गैंडों की संख्या 3,260 बताई गई है।

गैंडों की सुरक्षा में असम को हाल के वर्षों में अहम सफलता मिली है। इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन के अनुसार, साल 2025 में असम में गैंडे के अवैध शिकार की कोई घटना दर्ज नहीं हुई।

पश्चिम बंगाल में 392 गैंडे

पश्चिम बंगाल भी एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मार्च 2025 में हुई गणना के अनुसार राज्य में कुल 392 गैंडे पाए गए। इनमें जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान में 331 और गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान में 61 गैंडे दर्ज किए गए। साल 2013 में राज्य में गैंडों की संख्या 229 थी। जलदापाड़ा को भारत में काजीरंगा के बाद एक सींग वाले गैंडों का दूसरा बड़ा आवास माना जाता है।

दुधवा में भी बढ़ी संख्या

उत्तर प्रदेश में गैंडों की आबादी मुख्य रूप से दुधवा टाइगर रिजर्व में है। जून 2026 में हुई चौथी गैंडा गणना में यहां कुल 53 गैंडे मिले। इनमें 17 नर, 25 मादा और 11 छोटे गैंडे शामिल हैं। पिछली गणना में इनकी संख्या 51 थी।

दुधवा में गैंडों को फिर से बसाने का काम 1980 के दशक में शुरू हुआ था। वर्ष 1984 में असम और नेपाल से सात गैंडे यहां लाए गए थे। इसके बाद धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ी।

संरक्षण के सामने अब भी चुनौतियां

गैंडों की संख्या बढ़ना संरक्षण के लिए अच्छी खबर है, लेकिन चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। अवैध शिकार के अलावा प्राकृतिक घास के मैदानों में कमी, आवास का नुकसान और बाहरी पौधों का फैलाव गैंडों के लिए चिंता का विषय हैं। बढ़ती आबादी के साथ उनके लिए पर्याप्त और सुरक्षित प्राकृतिक आवास बनाए रखना जरूरी है।

दुनिया में अब केवल पांच गैंडा प्रजातियां बची हैं-ग्रेटर वन-हॉर्न्ड, सफेद, काला, जावन और सुमात्राई गैंडा। इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन के अनुसार, दुनिया में सभी पांच प्रजातियों को मिलाकर करीब 26,700 गैंडे बचे हैं।

विश्व गैंडा दिवस इस बात की याद दिलाता है कि संरक्षण केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। गैंडों के प्राकृतिक घर, घास के मैदान और जंगल सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। भारत में एक सींग वाले गैंडे की बढ़ती संख्या संरक्षण प्रयासों की एक महत्वपूर्ण मिसाल है।

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