प्रशांत क्षेत्र में व्हेल और डॉल्फिन में खोजा गया नया घातक वायरस: शोध

व्हेल और डॉल्फिन में चोंच वाले व्हेल सर्कोवायरस (बीडब्ल्यूसीवी) नामक वायरस से 50 फीसदी जीव संक्रमित पाए गए
फोटो साभार : विकिमीडिया कॉमन्स, ग्रेगरी "स्लोबर्डर" स्मिथ
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हवाई आई हेल्थ और स्ट्रैंडिंग लैब विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा व्हेल और डॉल्फिन में एक नए घातक वायरस की खोज की गई है। प्रशांत क्षेत्र में 10 व्हेल और डॉल्फिन प्रजातियों में इसकी खोज से पहले, वायरस दुनिया भर में केवल एक समुद्री स्तनपायी में पाया गया था, जो 2010 में माउ पर फंसी एक लॉन्गमैन की चोंच वाली व्हेल थी।  

व्हेल और डॉल्फिन में चोंच वाले व्हेल सर्कोवायरस (बीडब्ल्यूसीवी) की खोज से समुद्री स्तनपायी प्रजातियों की जानकारी बढ़ती है, जो इस रोग से संक्रमित हो सकते हैं। सर्कोवायरस डीएनए वायरस हैं जो पक्षियों, सूअरों और कुत्तों को बीमार करते हैं और गंभीर मामलों में जानलेवा हो सकते हैं।

यूएच हेल्थ एंड स्ट्रैंडिंग लैब के निदेशक क्रिस्टी वेस्ट ने कहा, हमारे अध्ययन में पाया गया कि साइपन और अमेरिकन समोआ में क्यूवियर की चोंच वाली व्हेल बीडब्ल्यूसीवी के लिए पॉजिटिव पाई गई, जो पहले खोजे गए मामले से लगभग 4,000 मील दूर थी।

हवाई के बाहर पाए गए पॉजिटिव मामले आश्चर्यजनक थे और ये इस ओर इशारा करते हैं कि यह वायरस मध्य तथा पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में फैला हुआ है। उन्होंने आशंका जताई कि, दुनिया भर के समुद्री स्तनधारियों में इसकी मौजूदगी हो सकती है।

शोधकर्ताओं ने जिन व्हेल और डॉल्फिन का परीक्षण किया, वे प्रशांत क्षेत्र के कई इलाकों से आई थीं, जिनमें से अधिकांश जानवरों का परीक्षण पॉजिटिव पाया गया था।

कॉलेज ऑफ ट्रॉपिकल एग्रीकल्चर एंड ह्यूमन रिसोर्सेज में पीएचडी के छात्र कोडी क्लिफ्टन ने कहा, हमें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि बीडब्ल्यूसीवी से कुल कितनी अलग-अलग प्रजातियां और कितने जानवर संक्रमित थे। उन्होंने आगे बताया कि 50 फीसदी जानवर इस वायरस के लिए पॉजिटिव पाए गए थे। 

उन्होंने कहा शोध का उद्देश्य जानवरों का परीक्षण करना था, क्योंकि हम जानते थे कि बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन पता लगने की इतनी अधिक दर अप्रत्याशित थी।

22 साल से अज्ञात बीमारियां

अध्ययन में पाया गया कि सर्कोवायरस कम से कम पिछले 22 वर्षों से प्रशांत क्षेत्र में मौजूद है। शोधकर्ताओं ने यूएच हेल्थ एंड स्ट्रैंडिंग लैब सैंपल आर्काइव से जानवरों का परीक्षण किया, जिसमें जानवरों के नमूने शामिल हैं जो 1997 से पहले के हैं। उन मामलों में, शोधकर्ताओं ने बीडब्ल्यूसीवी को एक पिग्मी स्पर्म व्हेल में पाया जो 2000 में ओहहू पर फंसे थे, यह दिखाते हुए कि यह वायरस है तब से हवाईयन व्हेल और डॉल्फिन के बीच मौजूद हैं।

वर्तमान में, यह अज्ञात है कि बीडब्ल्यूसीवी से संक्रमित जीव पर किस प्रकार का प्रभाव पड़ सकता है। बीडब्ल्यूसीवी का प्रारंभिक मामला घातक रूप से बीमार व्हेल में था लेकिन यह जानवर अन्य रोगजनकों से भी संक्रमित था। शोधकर्ताओं ने कहा यह समझने के लिए और अधिक काम करने की आवश्यकता है कि क्या इस वायरस का डॉल्फिन और व्हेल के स्वास्थ्य पर औसत दर्जे का प्रभाव पड़ता है।

वेस्ट ने कहा, हमें इन प्रजातियों की बेहतर सुरक्षा के लिए मृत्यु दर के कारणों और हवाई के डॉल्फिन और व्हेल के खतरों को समझने की ज़रूरत है। हवाई के कई डॉल्फिन और व्हेल छोटे द्वीप से जुड़ी आबादी के निवासी हैं जहां गंभीर बीमारी और मृत्यु दर का कारण बनने वाली बीमारी का प्रकोप विनाशकारी प्रभाव डाल सकता है।

महासागर स्वास्थ्य के प्रहरी

समुद्री स्तनधारी हवाई के लोगों के लिए सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं और समुद्र के स्वास्थ्य के मान्यता प्राप्त प्रहरी हैं। प्रभावी संरक्षण और प्रबंधन के लिए डॉल्फिन और व्हेल जैसी संरक्षित प्रजातियों के सामने आने वाले खतरों को समझना महत्वपूर्ण है।

शोधकर्ता पूरी तरह से समुद्री स्तनधारियों की सार्वजनिक रिपोर्टिंग पर भरोसा करते हैं जो बीमार या मृत हैं, जो मृत्यु दर के कारणों को समझने और हवाई और प्रशांत क्षेत्र में संरक्षित प्रजातियों के खतरों की पहचान करने और उनका मूल्यांकन करने के लिए महत्वपूर्ण है। आम लोगों को एनओएए हॉटलाइन पर संकटग्रस्त, घायल और मृत समुद्री स्तनधारियों की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। शोध के निष्कर्ष फ्रंटियर्स इन मरीन साइंस में प्रकाशित हुए हैं।