

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में पहली बार बड़ी संख्या में दिखे 25 गिद्धों की संदिग्ध मौत ने वन्यजीव संरक्षण पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गांव में झुंड में घूमने वाले आवारा कुत्तों को मारने के लिए कथित रूप से जहर मिलाया गया, जिसका शिकार गिद्ध भी बन गए।
6 गिद्धों को जिंदा बचाया गया, जबकि चावल और विसरा के नमूनों की जांच जारी है।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के बहादुरनगर ग्राम पंचायत के सेमरिया गांव में 25 गिद्धों की मौत से स्थानीय लोग हैरान हैं। गांव के सरपंच देवेंद्र सिंह ने डाउन टू अर्थ को बताया कि उनकी ग्राम पंचायत में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में गिद्ध देखे गए थे। वह बताते हैं कि गांव में आवारा कुत्तों की संख्या बहुत है। ये कुत्ते झुंड में रहते हैं और एक बार में 7-8 बकरियों को मार देते हैं। तीन दिन पहले ही इन कुत्तों ने डिमरौल पंचायत की बकरियों का शिकार किया था।
उनका कहना है कि किसी ने मरी हुई बकरियों में जहर मिलाया था जिसे खाकर चार-पांच कुत्ते भी मर गए। इनमें से एक कुत्ते को गिद्धों ने खाया, जिससे उनकी भी मौत हो गई।
वह कहते हैं कि पास की रत्नापुर पंचायत में भी कुत्तों ने बकरियों का शिकार किया था, जहां कुत्तों को मारने के लिए जहरीले चावल मिले हैं। कुत्तों के इन हमलों से होने वाले नुकसान से बकरी पालने वाले परेशान हैं और इन्हीं में से किसी ने मरी हुई बकरी में जहर मिला दिया, ताकि कुत्तों से छुटकारा मिल सके।
देवेंद्र सिंह का कहना है कि 7 अप्रैल की सुबह करीब 8 बजे जहर से संक्रमित कुत्ते को तीन चार घंटों में गिद्धों ने खा लिया। इसके कुछ समय बाद ही गिद्ध अचानक मरने लगे और उनके शवों का ढेर लग गया। मृत गिद्धों का सैंपल विसरा जांच के लिए बरेली भेजा गया है।
अमर उजाला के अनुसार, दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन की उपनिदेशक कीर्ति चौधरी ने बताया कि जो कुत्ते मरे थे, वे लावारिस थे और गांव में बकरियों पर हमला कर देते थे। आशंका है कि कुत्तों को मारने के लिए किसी ने पके चावलों में जहर मिलाकर डाला था।
फिलहाल मौके से मिले चावल का सैंपल भी जांच के लिए भेजा गया है। जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, मरे हुए हिमालयन ग्रिफन प्रजाति के थे। 6 गिद्धों को बचा लिया है जिनमें से चार इंजेक्शन देने के बाद उड़ गए। शेष गिद्धों का रेंज परिसर में इलाज चल रहा है।