

अवैध मछली पकड़ना वैश्विक समुद्री कारोबार की बड़ी समस्या, हर साल अरबों डॉलर का अवैध व्यापार होने का अनुमान।
पश्चिम अफ्रीका और एशिया के कई क्षेत्र प्रभावित, जबकि अवैध तरीके से पकड़ी मछली अमीर देशों के बाजारों तक पहुंचती है।
फर्जी दस्तावेज, समुद्र में मछली का हस्तांतरण और गलत जानकारी देकर अवैध मछली को कानूनी बाजारों में पहुंचाया जाता है।
सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से निगरानी बेहतर हुई, लेकिन कमजोर कार्रवाई और कम जुर्माने से समस्या जारी है।
कड़े नियम, पारदर्शी जहाज मालिकाना व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही अवैध मछली पकड़ने पर प्रभावी रोक संभव।
दुनिया के समुद्रों में बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से मछली पकड़ना लगातार बढ़ रहा है। इससे समुद्री जीवन, मछलियों की संख्या और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है। ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय (यूबीसी) के एक नए अध्ययन के अनुसार, अवैध मछली पकड़ना केवल कुछ लोगों की गैरकानूनी गतिविधि नहीं है, बल्कि यह दुनिया के समुद्री कारोबार की एक बड़ी समस्या बन चुका है।
शोध पत्र में यूबीसी के शोधकर्ताओं के हवाले से कहा गया है कि कमजोर नियम, कम निगरानी, सरकारी सब्सिडी और मछली के कारोबार की जटिल व्यवस्था अवैध मछली पकड़ने को बढ़ावा देती है। इस अध्ययन को ‘कास्टिंग लाइट ऑन द वर्किंग्स ऑफ इलीगल फिशिंग मार्केट्स’ नाम से प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज' में प्रकाशित किया गया है।
अरबों डॉलर का अवैध कारोबार
अध्ययन के मुताबिक, दुनिया में समुद्र से पकड़ी जाने वाली कुल जंगली मछलियों में लगभग आठ से 15 प्रतिशत हिस्सा अवैध या बिना सही जानकारी के पकड़ी गई मछलियों का हो सकता है। इससे हर साल करीब 6.2 अरब से 12.2 अरब अमेरिकी डॉलर का अवैध कारोबार होता है।
अवैध मछली पकड़ने का असर दुनिया के कई हिस्सों में देखा जाता है, लेकिन पश्चिम अफ्रीका, पूर्वी एशिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया इससे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में हैं। इन इलाकों में समुद्र से मिलने वाली मछली स्थानीय लोगों के भोजन और रोजगार का महत्वपूर्ण साधन है। इसके बावजूद अवैध तरीके से पकड़ी गई मछलियों का बड़ा हिस्सा अमीर देशों के बाजारों तक पहुंच जाता है।
इस स्थिति में नुकसान गरीब तटीय देशों और स्थानीय मछुआरों को होता है, जबकि आर्थिक फायदा दूसरे देशों की कंपनियों और बाजारों को मिल जाता है।
अवैध मछली बाजार में कैसे पहुंचती है
अवैध तरीके से पकड़ी गई मछलियों को सीधे बाजार में बेचने के बजाय कई बार उन्हें कानूनी मछलियों के साथ मिला दिया जाता है। गलत दस्तावेज तैयार किए जाते हैं और मछली की प्रजाति या उसके पकड़े जाने की जगह के बारे में गलत जानकारी दी जाती है।
समुद्र के बीच एक जहाज से दूसरे जहाज में मछली पहुंचाना भी निगरानी को मुश्किल बनाता है। इसके अलावा कई जहाजों के मालिकों की सही जानकारी सामने नहीं आती। कुछ जहाज अलग-अलग देशों के झंडे के तहत काम करते हैं, जिससे उनके खिलाफ कार्रवाई करना और जिम्मेदार लोगों तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
तकनीक मददगार, लेकिन अकेली काफी नहीं
आज समुद्र में निगरानी के लिए सैटेलाइट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इनसे संदिग्ध जहाजों और उनकी गतिविधियों का पता लगाना पहले की तुलना में आसान हुआ है।
लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल तकनीक से समस्या खत्म नहीं होगी। अगर संदिग्ध गतिविधि का पता चलने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, जुर्माना कम होता है या दोषियों को आसानी से बचने का रास्ता मिल जाता है, तो अवैध मछली पकड़ने का कारोबार जारी रहेगा।
छोटे मछुआरों पर बड़ा असर
अवैध मछली पकड़ने का नुकसान केवल समुद्री पर्यावरण तक सीमित नहीं है। इससे छोटे मछुआरों की आय घटती है और उनके लिए मछली पकड़ना मुश्किल होता जाता है। कई तटीय समुदाय भोजन और रोजगार के लिए समुद्र पर निर्भर हैं।
शोधकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि कुछ बड़े मछली पकड़ने वाले जहाजों पर काम करने वाले कर्मचारियों को खराब परिस्थितियों, असुरक्षित काम और जबरन मजदूरी जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
समाधान के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी
शोधकर्ताओं के अनुसार, समस्या से निपटने के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा। मछली पकड़ने वाले जहाजों की पहचान और निगरानी को अनिवार्य बनाना, बंदरगाहों पर जांच मजबूत करना और जहाजों के असली मालिकों की जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी है।
नुकसान पहुंचाने वाली सरकारी सब्सिडी को कम करना और छोटे तथा स्थानीय मछुआरों के अधिकारों की रक्षा करना भी महत्वपूर्ण है। हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ अच्छे कदम उठाए गए हैं, लेकिन इन नियमों को जमीन पर लागू करना सबसे बड़ी चुनौती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र को बचाने के लिए केवल ज्यादा निगरानी नहीं, बल्कि पूरी समुद्री अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। जब तक अवैध मछली पकड़ने से होने वाला मुनाफा कम नहीं होगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।