पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, कई राज्यों में भारी बारिश-आंधी-तूफान का अलर्ट, पूर्वी-पूर्वोत्तर में उमस बढ़ी

दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल; कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान तो कुछ राज्यों में उमस भरे मौसम की चेतावनी
पूर्वोत्तर राज्यों, ओडिशा और तटीय आंध्र प्रदेश में गर्म और उमस भरे मौसम की चेतावनी, लोगों को सतर्क रहने की सलाह।
पूर्वोत्तर राज्यों, ओडिशा और तटीय आंध्र प्रदेश में गर्म और उमस भरे मौसम की चेतावनी, लोगों को सतर्क रहने की सलाह।
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सारांश
  • पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में हल्की बारिश, गरज-चमक और 50 किमी प्रति घंटा तक तेज हवाओं का अनुमान।

  • केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पश्चिम मध्य प्रदेश में भारी बारिश, कई जिलों में येलो-ऑरेंज अलर्ट।

  • राजस्थान, गुजरात, ओडिशा और मध्य प्रदेश में आंधी-तूफान का खतरा, कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की भी आशंका।

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां, अगले दो-तीन दिनों में कई नए क्षेत्रों में प्रवेश संभव।

  • पूर्वोत्तर राज्यों, ओडिशा और तटीय आंध्र प्रदेश में गर्म और उमस भरे मौसम की चेतावनी, लोगों को सतर्क रहने की सलाह।

देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के द्वारा आज, यानी दो जून, 2026 को जारी बुलेटिन के अनुसार, उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों और आसपास के इलाकों में बना पश्चिमी विक्षोभ अभी भी सक्रिय है।

साथ ही देश के कई इलाकों में ऊपरी हवाओं का चक्रवाती प्रसार जारी है। इन मौसमीय प्रणालियों के कारण दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में बादल छाए रहने, हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना बनी हुई है।

आज, दो जून, 2026 को दिल्ली और आसपास के इलाकों में पूरे दिन आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। कुछ इलाकों में हल्की बारिश के साथ गरज और बिजली चमकने की भी आशंका है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली में अधिकतम तापमान के 39 डिग्री और न्यूनतम तापमान के 30 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। बादलों और बारिश के कारण लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।

कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश होने की आशंका जताई है। तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और पश्चिम मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। यहां बारिश के लिए कुछ राज्यों में येलो तो कुछ में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में 64.5 से 115.5 मिमी तक बारिश हो सकती है।

आंधी, बिजली और ओलावृष्टि की चेतावनी

पश्चिम मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि होने का अंदेशा है। वहीं राजस्थान, गुजरात, ओडिशा, पश्चिम मध्य प्रदेश और तटीय आंध्र प्रदेश में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, केरल, गोवा, तमिलनाडु, अंडमान-निकोबार और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के आसार हैं। ऐसे मौसम में लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।

समुद्री क्षेत्रों में खराब मौसम

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में भी मौसम खराब रहने के आसार हैं। अरब सागर के उत्तर-पूर्वी भाग, गुजरात तट और ओमान तट के पास 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ जगहों पर हवा की गति 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। बंगाल की खाड़ी, तमिलनाडु तट, दक्षिण आंध्र प्रदेश तट और अंडमान सागर के आसपास भी तेज हवाएं चलने और समुद्र में ऊंची लहरें उठने की आशंका है। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है।

कहां पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून?

मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। अगले दो से तीन दिनों में मानसून केरल, तमिलनाडु, लक्षद्वीप और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है।

मानसून की प्रगति से दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे किसानों को खरीफ फसलों की तैयारी में मदद मिलेगी और जल स्रोतों में भी सुधार होगा।

तापमान में उतार-चढ़ाव

मौसम विभाग के द्वारा जारी पूर्वानुमान में कहा गया है कि उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान में चार से छह डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं महाराष्ट्र में पांच जून तक तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है।

गुजरात में भी तीन जून से छह जून के बीच तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की कमी हो सकती है। पूर्वी भारत और देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है।

एक जून, 2026 को देश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान तेलंगाना के आदिलाबाद में 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान असम के हाफलोंग में 18 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

कहां रहेगा गर्म और उमस भरा मौसम?

मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में गर्म और उमस भरे मौसम की चेतावनी जारी की है। आज, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ इलाकों में गर्म और उमस भरा मौसम बने रहने की आशंका है

दिन के समय तापमान अधिक रहने और हवा में नमी बढ़ने के कारण लोगों को असहज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मौसम में शरीर से अधिक पसीना निकलता है, जिससे थकान, कमजोरी और डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के और सूती कपड़े पहनने तथा दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

मौसम विभाग ने किसानों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है। जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की आशंका है, वहां किसान फसलों की कटाई और भंडारण का काम जल्द पूरा कर लें। कटे हुए अनाज और कृषि उत्पादों को सुरक्षित स्थान पर रखें ताकि बारिश से नुकसान न हो।

तेज हवाओं और आंधी को देखते हुए बागवानी फसलों, सब्जियों और फलदार पेड़ों को सहारा देने की व्यवस्था करें। जिन क्षेत्रों में भारी बारिश का अनुमान है, वहां खेतों से पानी निकालने के लिए उचित व्यवस्था रखें ताकि जलभराव न हो।

पशुपालकों को भी सलाह दी गई है कि वे पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें और बिजली चमकने के समय खुले मैदानों में न छोड़ें। बारिश की संभावना वाले क्षेत्रों में फिलहाल कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव टालना बेहतर रहेगा।

लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

मौसम विभाग ने कहा है कि आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में मौसम तेजी से बदल सकता है। इसलिए लोगों को मौसम संबंधी ताजा जानकारी पर नजर रखनी चाहिए। गरज-चमक, बिजली, तेज हवाओं और भारी बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। प्रशासन और नागरिकों की सतर्कता से मौसम से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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