पूर्वोत्तर मानसून देगा दक्षिण में दस्तक, कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश के आसार

उत्तर-पश्चिमी यूपी के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, चक्रवाती परिसंचरण और पछुआ हवाओं की ट्रफ से उत्तर भारत के मौसम में बदलाव के संकेत; कम दबाव से दक्षिण भारत में भी बदलाव संभव
उत्तर भारत में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं से मौसम बदलने के आसार।
उत्तर भारत में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं से मौसम बदलने के आसार।फोटो: डीएनएम
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सारांश
  • पूर्वोत्तर मानसून अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण भारत में दे सकता है दस्तक, कई राज्यों में बारिश के आसार।

  • दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में 14-15 अक्टूबर को ओलावृष्टि की आशंका, 50 किमी प्रति घंटे तक चलेंगी तेज हवाएं।

  • उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, उत्तर भारत में गरज-चमक और तेज हवाओं से मौसम बदलने के संकेत।

  • दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में 13 अक्टूबर के आसपास कम दबाव बनने के आसार, दक्षिण भारत में बढ़ सकती हैं मौसमी गतिविधियां।

  • राजकोट में अधिकतम तापमान 39.8 डिग्री पहुंचा, करनाल में न्यूनतम तापमान 15 डिग्री दर्ज; कई राज्यों में सामान्य से अधिक गर्मी।

देशभर में मौसम एक बार फिर करवट लेने की तैयारी में है। कहीं मानसून की विदाई का सिलसिला तेज हो रहा है, तो कहीं गरज-चमक, तेज हवाओं और ओलावृष्टि का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग की ओर से आज, 13 अक्टूबर 2026 की सुबह जारी ताजा अपडेट के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ व चक्रवाती प्रसार के चलते दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब के कुछ हिस्सों में 14 और 15 अक्टूबर को ओले गिरने की आशंका है।

इस दौरान बिजली कड़कने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका भी जताई गई है। मौसम के इस बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि तेज हवा और ओले खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ेगी मौसम की हलचल

राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में आने वाले दिनों में मौसम का रंग बदल सकता है। मौसम विभाग ने हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। 14 और 15 अक्टूबर को इन राज्यों में ओलावृष्टि का भी अंदेशा जताया गया है। हालांकि इसका असर हर जगह एक जैसा नहीं होगा और कुछ हिस्सों तक ही सीमित रह सकता है।

तेज हवाओं के कारण पेड़ों की शाखाएं टूटने, बड़े पेड़ों के उखड़ने और बिजली व संचार लाइनों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ओले गिरने की स्थिति में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

कई राज्यों में गरज-चमक के आसार

देश के कई इलाकों में भी मौसम के सक्रिय रहने की संभावना है। आंध्र प्रदेश, राजस्थान, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख तथा आसपास के इलाकों में बारिश, बिजली कड़कने के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज सतही हवाएं चलने की भी आशंका जताया गई है।

हिमाचल प्रदेश, केरल और माहे, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा तथा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के अलग-अलग हिस्सों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने और बिजली गिरने के आसार हैं। वहीं, कोंकण और गोवा के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम लोगों को परेशान कर सकता है।

मानसून की विदाई, दक्षिण में नई शुरुआत

देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का सिलसिला लगातार जारी है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में देश के बाकी हिस्सों से भी मानसून की विदाई हो सकती हैं। इसी दौरान दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून की बारिश शुरू होने की संभावना है।

दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के इलाकों में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके प्रभाव से 13 अक्टूबर के आसपास दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने के आसार हैं। आने वाले दिनों में यह मौसमी गतिविधि दक्षिण भारत के मौसम को प्रभावित कर सकती है।

राजकोट सबसे गर्म, करनाल में सबसे कम तापमान

तापमान के आंकड़े भी मौसम की अलग-अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। 12 अक्टूबर, 2026 को गुजरात के राजकोट में देश का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, देश के मैदानी इलाकों में हरियाणा के करनाल में न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रहा।

तटीय कर्नाटक सहित कुछ राज्यों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया। असम और मेघालय के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से काफी अधिक रिकॉर्ड किया जा रहा है।

किसानों के लिए मौसम की चेतावनी

मौसम में आने वाला यह बदलाव किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। तेज हवा और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। केले और पपीते जैसे पौधों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। बागवानी करने वाले किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

तेज हवा चलने पर पेड़ों की कमजोर शाखाएं टूट सकती हैं और खेतों में काम कर रहे लोगों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। खुले स्थानों पर ओले गिरने से इंसानों और पशुओं को चोट लगने का खतरा भी रहता है। इसलिए किसानों और ग्रामीणों को मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए।

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