स्रोत: मौसम विज्ञान विभाग
स्रोत: मौसम विज्ञान विभाग

नक्शे से जानें, 2019 में मौसम के कहर ने किन राज्यों में किया कितना नुकसान

साल 2019 में अतिशय मौसम की घटनाओं ने 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में जानमाल को भारी क्षति पहुंचाई। बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और झारखंड सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में शामिल रहे

साल 2019 मौसम के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहा। इस साल औसत तापमान सामान्य से अधिक रहा। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का कहना है कि यह साल 1901 के बाद के सातवां सबसे गर्म साल भी रहा। इस साल देश का औसत तापमान 1981-2000 के औसत तापमान से +0.36 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। अब तक के 15 सबसे गर्म सालों में 11 साल 2005-2019 के दौरान रहे। यानी पिछले दो दशकों में जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी स्पष्ट रूप से देखी गई है।

2019 में देश में 109 प्रतिशत बारिश हुई। आंकड़ों में बारिश भले की सामान्य से अधिक दिखाई दे लेकिन बारिश का वितरण बहुत असमान रहा जिससे अतिशत बारिश की घटनाएं देखी गईं। इसका नतीजा कई राज्यों में भीषण बाढ़ के रूप में देखने को मिला। सबसे गौर करने वाली बात रही कि हिंद महासागर और अरब सागर में इस साल आठ चक्रवात बने। इनमें से पांच चक्रवात अरब सागर में बने जिनमें से दो बेहद भीषण थे।

अरब सागर में आमतौर पर हर साल एक चक्रवात आता है। इतने चक्रवात 1902 के बाद पहली बार बने हैं। आईएमडी के अनुसार, 2019 में भारी बारिश, हीटवेव और शीतलहर ने जमकर कहर बरपाया। बिहार अतिशय मौसम की इन घटनाओं से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ। राज्य में भारी बारिश, बाढ़, हीटवेव, बिजली गिरने, आंधी तूफान और ओलावृष्टि से लगभग 650 लोगों की मौत हो गई।

देश के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़ और बारिश 850 लोगों को जान गंवानी पड़ी। इनमें से 306 मौतें बिहार, 136 मौतें महाराष्ट्र, 107 मौतें उत्तर प्रदेश, 88 मौतें केरल, 80 मौतें राजस्थान और 43 मौतें कर्नाटक में हुईं। मार्च से जून के बीच हीटवेव के कारण 350 लोगों को जान गंवानी पड़ी। हीटवेव से सर्वाधिक 293 मौतें बिहार में हुईं। बिजली गिरने और आंधी तूफान ने 380 लोगों की जान ली, जबकि बर्फबारी और हिमस्खलन से जम्मू एवं कश्मीर में 33 और लेह में 18 लोगों की मौत हो गई। दिसंबर में शीतलहर ने उत्तर प्रदेश में 28 लोगों को मौत की नींद सुला दिया।

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