बंगाल की खाड़ी में बढ़ी हलचल, अंडमान व अरुणाचल में भारी बारिश, इन राज्यों में गरज-चमक

बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र हुआ मजबूत, अगले 12 घंटे में डिप्रेशन के आसार, अंडमान-अरुणाचल में भारी बारिश, कई राज्यों में आंधी-बारिश की चेतावनी।
अंडमान-निकोबार और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के आसार, 115.5 मिमी तक बरस सकते हैं बादल।
अंडमान-निकोबार और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के आसार, 115.5 मिमी तक बरस सकते हैं बादल।फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स
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सारांश
  • बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र मजबूत, अगले 12 घंटों में डिप्रेशन में तब्दील होने के आसार।

  • दो नवंबर की शाम आंध्र प्रदेश के तट के पास पहुंच सकती है मौसमी प्रणाली, समुद्र में बढ़ेगी हलचल।

  • अंडमान-निकोबार और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के आसार, 115.5 मिमी तक बरस सकते हैं बादल।

  • ओडिशा और तेलंगाना में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने की आशंका।

  • पश्चिमी विक्षोभ के असर से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में अगले तीन दिन बारिश के आसार।

देश के अलग-अलग इलाकों में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलने जा रहा है। बंगाल की खाड़ी में बन रहा कम दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे ताकतवर हो रहा है और अगले कुछ घंटों में इसके डिप्रेशन में बदलने के आसार हैं। इसके बाद यह और मजबूत होकर चक्रवाती तूफान का रूप भी ले सकता है।

मौसम विभाग के द्वारा आज, 31 अक्टूबर, 2026 को जारी बुलेटिन के अनुसार, यह प्रणाली पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए दो नवंबर की शाम तक आंध्र प्रदेश के तट के पास पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में पहुंच सकती है। दूसरी ओर, उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के असर से पहाड़ी राज्यों में बारिश-बर्फबारी और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बारिश की संभावना बनी हुई है।

बंगाल की खाड़ी में बढ़ रही हलचल

मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के इलाकों में बना कम दबाव का क्षेत्र आगे बढ़कर दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के आसपास पहुंच गया है। अब यह एक सुस्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र यानी वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया बन चुका है। इसके साथ जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 7.6 किमी की ऊंचाई तक फैला हुआ है। यही मौसमी हलचल इस प्रणाली को लगातार ताकत दे रही है।

अनुकूल समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण अगले 12 घंटों में इसके डिप्रेशन में तब्दील होने की आशंका है। इसके बाद भी इसके मजबूत होने के संकेत हैं। यदि यह सिलसिला जारी रहा तो आगे चलकर यह चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। हालांकि फिलहाल इसे चक्रवाती तूफान कहना जल्दबाजी होगी।

बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र मजबूत, अगले 12 घंटों में डिप्रेशन में तब्दील होने के आसार।
बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र मजबूत, अगले 12 घंटों में डिप्रेशन में तब्दील होने के आसार।स्रोत: भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी)

आंध्र प्रदेश के तट पर बढ़ सकती है चिंता

इस मौसमी प्रणाली का असर आने वाले दिनों में आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में दिखाई दे सकता है। मौसम विभाग ने एक से चार नवंबर, 2026 के बीच आंध्र प्रदेश के तट और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति प्रभावित रहने का अंदेशा जताया है। मछुआरों और समुद्र में जाने वाले लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देने की जरूरत है। अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में भी एक नवंबर तक तेज मौसमी गतिविधियां बनी रह सकती हैं।

ओडिशा व तेलंगाना में गरज-चमक, अंडमान व अरुणाचल में भारी बारिश के आसार

देश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में भी मौसम करवट लेगा। ओडिशा और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में बिजली चमकने के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के आसार हैं। छत्तीसगढ़ में भी कुछ जगहों पर बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने के आसार हैं।

वहीं आज, 31 अक्टूबर, 2026 को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अंदेशा जताया गया है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। यहां 64.5 से 115.5 मिमी तक बादल बरस सकते हैं।

पश्चिमी विक्षोभ से उत्तर भारत में बदलेगा मौसम

बंगाल की खाड़ी की प्रणाली के अलावा उत्तर भारत में एक और मौसमी प्रणाली सक्रिय है। उत्तर हरियाणा और आसपास के इलाकों में समुद्र तल से करीब 4.5 किमी की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। इसके साथ ऊपरी वायुमंडल में पश्चिमी हवाओं के बीच एक ट्रफ भी सक्रिय है।

इसी पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 31 अक्टूबर से दो नवंबर के बीच जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश तथा ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो सकती है। वहीं आज, उत्तराखंड में बिजली चमकने और गरज-चमक की भी आशंका है। राजस्थान के पूर्वी हिस्सों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 31 अक्टूबर को बारिश हो सकती है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में दो नवंबर तक कहीं-कहीं बारिश का दौर जारी रह सकता है।

कहां कितने बरसे बादल?

पिछले 24 घंटों के दौरान देश के कई इलाकों में बारिश दर्ज की गई। ओडिशा के बालासोर और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर हर जगह 50 मिमी बारिश हुई। आंध्र प्रदेश के तुनी में भी 50 मिमी पानी बरसा। उत्तर प्रदेश के बहराइच में 40 मिमी, जबकि लखनऊ, सुल्तानपुर और आजमगढ़ हर जगह 20 मिमी बारिश दर्ज की गई। झारखंड के डाल्टनगंज और असम-मेघालय के बारापानी-शिलांग में भी 20-20 मिमी बारिश हुई।

कुल मिलाकर, अगले कुछ दिन देश के कई इलाकों के लिए मौसमी हलचल वाले रहने वाले हैं। एक ओर बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती प्रणाली आकार ले रही है, तो दूसरी ओर पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में बारिश के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान और चेतावनियों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।