उत्तर में लू की आशंका, ब्रह्मपुरी में पारा 45 डिग्री पार, जानें कहां हैं भारी बारिश के आसार

उत्तर-पश्चिम भारत में लू का असर बरकरार, जबकि दक्षिण, पश्चिम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी।
हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, पश्चिमी राजस्थान और तटीय आंध्र प्रदेश में लू या हीटवेव चलने की आशंका जताई गई है।
हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, पश्चिमी राजस्थान और तटीय आंध्र प्रदेश में लू या हीटवेव चलने की आशंका जताई गई है।
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सारांश
  • उत्तर-पश्चिम भारत में 10 जून तक तापमान बढ़ेगा, जबकि 11 जून से पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से राहत मिलेगी।

  • पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बारिश, आंधी, बिजली गिरने और तेज हवाओं के आसार।

  • तटीय कर्नाटक में अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट, जबकि केरल, माहे और आंतरिक कर्नाटक में ऑरेंज अलर्ट।

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में आगे बढ़ने की संभावना।

  • महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी में 45.2 डिग्री सेल्सियस के साथ देश का सर्वाधिक तापमान दर्ज, कई राज्यों में लू की चेतावनी।

देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। एक ओर उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान बढ़ने से लू की आशंका बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर दक्षिण, पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी रहने के संकेत हैं।

मौसम विभाग के द्वारा आज सुबह, आठ जून, 2026 को जारी ताजा अपडेट के अनुसार, देश के कई हिस्सों में बने ऊपरी हवाओं के चक्रवाती परिसंचरण के कारण उत्तर-पश्चिम समेत भारत के कई राज्यों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां जारी रहेंगी।

मौसम विभाग के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख तथा उत्तराखंड में आठ से 13 जून तक हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं 11 जून से सक्रिय होने वाले नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी मौसम बदल सकता है। इन इलाकों में 11 से 13 जून के बीच बारिश, आंधी और गरज-चमक देखने को मिल सकती है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 10 से 13 जून तक बारिश की संभावना जताई गई है।

राजस्थान में आंधी-तूफान का असर

पूर्वी राजस्थान में आठ से 10 जून, 2026 के बीच गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि कुछ हिस्सों में रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

मौसम विभाग के द्वारा जारी पूर्वानुमान में कहा गया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले तीन से चार दिनों में और आगे बढ़ सकता है। इसके महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, ओडिशा तथा पूर्वोत्तर के राज्यों के शेष हिस्सों तक पहुंचने की संभावना है। इससे कई क्षेत्रों में किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है और खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी तेज हो सकती है।

स्रोत : भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी)

दक्षिण और पश्चिम भारत में भारी बारिश

दक्षिण भारत के कई राज्यों में मानसून की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। आज, आठ जून, 2026 को तटीय कर्नाटक के कई इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश होने का अंदेशा जताया गया है। तटीय कर्नाटक में 204.5 मिमी से अधिक बरस सकते हैं बादल। यहां बारिश के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है।

वहीं आज, आंतरिक कर्नाटक, केरल और माहे में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। विभाग ने इन राज्यों में बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां 115.6 से 204.4 मिमी तक बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग के मुताबिक, आज आठ जून, 2026 को कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुडुचेरी, रायलसीमा और लक्षद्वीप के कई इलाकों में भी भारी बारिश हो सकती है। यहां 64.5 से 115.5 मिमी तक बादलों के बरसने के आसार हैं। यहां बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में जलभराव और स्थानीय बाढ़ जैसी परिस्थितियों के प्रति सतर्क रहने को कहा है।

पूर्वोत्तर राज्यों में भी सक्रिय रहेगा मौसम

अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। कुछ हिस्सों में भारी बारिश भी हो सकती है। मेघालय और असम में पिछले 24 घंटों के दौरान भी अच्छी बारिश दर्ज की गई है। चेरापूंजी में 80 मिमी और उत्तर लखीमपुर में 70 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

तापमान में उतार-चढ़ाव जारी

मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में 10 जून तक अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे दो से तीन डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने के आसार हैं। इसके बाद 11 जून से तापमान में कमी का दौर शुरू हो सकता है और अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है। यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ और बारिश की गतिविधियों के कारण होने की संभावना है।

देश के अन्य अधिकतर इलाकों में 13 जून तक अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। वहां तापमान सामान्य स्तर के आसपास बना रह सकता है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार सात जून 2026 को देश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी में 45.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं मैदानी क्षेत्रों में सबसे कम न्यूनतम तापमान असम के हाफलोंग में 18.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह दर्शाता है कि देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम की स्थितियों में काफी अंतर बना हुआ है।

कुछ राज्यों में गर्मी का प्रकोप जारी

बारिश की गतिविधियों के बावजूद देश के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर बना हुआ है। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, पश्चिमी राजस्थान और तटीय आंध्र प्रदेश में लू या हीटवेव चलने की आशंका जताई गई है। लोगों को दोपहर के समय धूप में निकलने से बचने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी गई है।

वहीं आज, कोंकण-गोवा और ओडिशा के कुछ इलाकों में उमस भरा मौसम लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है। ओडिशा में गर्म और उमस भरे मौसम के साथ कुछ हिस्सों पर गर्म रातें रहने का अंदेशा जताया गया है

किसानों के लिए जरूरी सलाह

मौसम विभाग ने किसानों को मौसम की जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी है। जिन राज्यों में भारी बारिश की संभावना है, वहां खेतों से पानी निकासी की उचित व्यवस्था करनी चाहिए। पकी हुई फसलों की कटाई और सुरक्षित भंडारण का कार्य समय रहते पूरा कर लेना चाहिए।

तेज हवा और गरज-चमक वाले क्षेत्रों में किसान दवा और उर्वरक का छिड़काव फिलहाल टाल सकते हैं। पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखना चाहिए और उनके लिए पर्याप्त पानी तथा चारे की व्यवस्था करनी चाहिए।

जहां मानसून आगे बढ़ रहा है, वहां किसान खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी शुरू कर सकते हैं। अच्छी बारिश से धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों को लाभ मिलने की संभावना है।

सतर्कता ही सुरक्षा

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और जलाशयों के पास जाने से बचें। भारी बारिश वाले राज्यों में अनावश्यक यात्रा न करें। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ के प्रति विशेष सतर्क रहने की जरूरत है।

आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। ऐसे में मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करना और समय पर सावधानी बरतना सबसे सुरक्षित उपाय होगा।

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