

एक जून से पांच जुलाई 2026 तक पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 42 फीसदी बारिश की कमी दर्ज, देश में सबसे बड़ी कमी।
लद्दाख में सामान्य से 121 फीसदी अधिक बारिश दर्ज हुई, जबकि अधिकांश राज्यों में मानसून सामान्य से कमजोर बना रहा।
बिहार, झारखंड, असम, मेघालय और मणिपुर समेत कई राज्यों में सामान्य से 50 फीसदी तक कम बारिश रिकॉर्ड की गई।
उत्तर-पश्चिम भारत में 22 फीसदी, जबकि मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में 14-14 फीसदी कम वर्षा दर्ज की गई।
देश के केवल दो राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश हुई, जबकि 20 राज्यों में बारिश की कमी दर्ज की गई।
दक्षिण-पश्चिम मानसून का पहला महीना जून समाप्त हो चुका है और जुलाई का पहला सप्ताह चल रहा है। ऐसे में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक जून से पांच जुलाई 2026 तक के बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि में पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सबसे अधिक, 42 फीसदी बारिश की कमी रिकॉर्ड की गई।
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एक जून से पांच जुलाई 2026 के बीच केवल एक राज्य, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में सामान्य से बहुत अधिक, यानी 121 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। जबकि केवल दो राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश हुई, 11 राज्यों में सामान्य वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि 20 राज्यों में बारिश में कमी और दो राज्यों में भारी कमी दर्ज की गई।
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में कितना बरसा पानी?
देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश पर गहनता से नजर डालें तो पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश में एक जून से पांच जुलाई 2026 के दौरान सामान्य से 50 फीसदी बारिश कम हुई, इस बीच यहां सामान्य रूप से 545.4 मिमी तक बारिश होती है जबकि 270.8 मिमी ही बारिश हुई। वहीं असम में बारिश में 42 फीसदी की गिरावट रिकॉर्ड की गई, यहां भी सामान्यतः 494.1मिमी बारिश होती है जबकि यहां, इस दौरान 286.9 मिमी तक ही बरसे बादल।
मेघालय में 66 फीसदी की कमी, नागालैंड में 51 फीसदी की गिरावट देखी गई है, मौसम विभाग के द्वारा मेघालय को बहुत भारी बारिश में कमी की श्रेणी में जबकि नागालैंड को कमी की श्रेणी के रूप में रखा गया है। मणिपुर में 73 फीसदी की कमी, जो बहुत ज्यादा बारिश में कमी वाले पायदान में रखा गया है। मिजोरम में 31 फीसदी की कमी और त्रिपुरा में 33 फीसदी की कमी को भी कमी के रूप में रखा गया है। सिक्किम में 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जिसे सामान्य की श्रेणी में रखा गया है। कुल मिलाकर इस दौरान पूर्वोत्तर भारत के अधिकतर राज्य बारिश के लिए तरसते रहे हैं।
इसी दौरान पश्चिम बंगाल में सामान्य से छह फीसदी की, यानी सामान्य से मामूली कमी को भी सामान्य में रखा गया है। वहीं, झारखंड में 50 फीसदी बारिश कम रिकॉर्ड की गई, जबकि बिहार में सामान्य के मुकाबले बारिश में 55 फीसदी की कमी दर्ज की गई, इस तरह इन दोनों राज्यों को वर्षा की कमी वाले स्थान में रखा गया है। कुल मिलाकर पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में एक जून से पांच जुलाई 2026 के दौरान बारिश में 42 फीसदी यानी पूरे देश में सबसे ज्यादा कमी दर्ज की गई।
उत्तर पश्चिम भारत में क्या रहा बारिश का हाल?
एक से जून, से पांच जुलाई, 2026 के दौरान उत्तर पश्चिम भारत में कितने बरसे बादल, मौसम विभाग के आंकड़ों को देखें तो उत्तर प्रदेश में सामान्य की तुलना में 46 फीसदी की कमी, जिसे बारिश की कमी के रूप में दर्ज किया गया है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में सामान्य के मुकाबले 23 फीसदी की कमी, यानी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। हरियाणा में 26 फीसदी कम बरसे बादल, जबकि चंडीगढ़ में सामान्य की अपेक्षा 59 फीसदी कम बारिश हुई है, जिसे मौसम विभाग ने बारिश की कमी वाली श्रेणी में रखा है।
देश की राजधानी दिल्ली में इस अवधि के दौरान बारिश में सामान्य के मुकाबले 52 फीसदी की कमी रेकॉर्ड की गई है, यहां सामान्यतया 83.6 मिमी तक बारिश होती है, जबकि मात्र 40.4 मिमी ही बरसे बादल। वहीं पंजाब में बारिश में 25 फीसदी किमी कमी दर्ज की गई जिसे बारिश के सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में शामिल किया गया है।
वहीं दो और पहाड़ी राज्यों में से एक हिमाचल प्रदेश में सामान्य की अपेक्षा 10 फीसदी कम बारिश हुई, जम्मू और कश्मीर में भी 10 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। जबकि केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख में 121 फीसदी, यानी सामान्य के मुकाबले बहुत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि राजस्थान में भी सामान्य से 2 फीसदी कम बारिश हुई, यानी इसे सामान्य श्रेणी में इसे रखा गया है। उत्तर पश्चिम भारत में एक जून से लेकर पांच जुलाई 2026 तक 22 फीसदी कम बरसे बादल।
मध्य भारत में कितनी बरसे बादल?
मध्य भारत में बारिश को लेकर मौसम विभाग के एक जून से पांच जुलाई 2026 तक के आंकड़े देखें तो ओडिशा में इस दौरान सामान्य से 4 फीसदी अधिक बारिश बारिश दर्ज की गई, यहां सामान्यतया इस बीच 255.8 मिमी तक बारिश होती है, जबकि 265.5 मिमी दर्ज की गई, यानी यहां सामान्य बारिश हुई। वहीं मध्य प्रदेश में 6 फीसदी कम बरसे बादल, यानी सामान्य के मुकाबले कम बारिश दर्ज की गई।
इस दौरान गुजरात पर भी बादल मेहरबान नहीं हुए, यहां सामान्य की अपेक्षा 32 फीसदी, यानी बहुत कम बारिश बारिश हुई। वहीं, केन्द्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव में सामान्य से 33 फीसदी कम बारिश हुई, इसे भी बारिश के सामान्य से बहुत कम बारिश की श्रेणी में रखा गया है।
गोवा में सामान्य से 27 फीसदी कम बारिश हुई, मौसम विभाग ने इसे कम बारिश की श्रेणी में रखा है। जबकि महाराष्ट्र में सामान्य के मुकाबले 15 फीसदी कम बारिश हुई जिसे सामान्य की श्रेणी में रखा गया है। छत्तीसगढ़ में बारिश में सामान्य से 30 फीसदी की कमी रेकॉर्ड की गई। एक जून से लेकर पांच जुलाई 2026 तक मध्य भारत में कुल मिलाकर 14 फीसदी कम पानी बरसा।
क्या भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप में मेहरबान रहे बादल?
भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप में एक जून से पांच जुलाई 2026 के दौरान कितने बरसे बादल, केंद्र शासित प्रदेश अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह में इस दौरान सामान्य की अपेक्षा 52 फीसदी अधिक बारिश हुई, यहां सामान्यतया 474.6 मिमी बारिश होती हैं जबकि इस दौरान सामान्य से अधिक यानी 722.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
आंध्र प्रदेश में सामान्य के मुकाबले 5 फीसदी और तेलंगाना में सामान्य के मुकाबले 4 29 फीसदी बारिश कम हुई, यानी यहां सामान्य बारिश दर्ज की गई। तमिलनाडु में सामान्य की अपेक्षा 33 फीसदी अधिक, यानी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। पुडुचेरी में 34 फीसदी की कमी, यानी सामान्य बहुत कम बारिश हुई।
जबकि कर्नाटक में सामान्य की अपेक्षा 27 फीसदी कम बारिश हुई, हालांकि मौसम विभाग ने इसे सामान्य कम बारिश की श्रेणी में रखा है। जिस राज्य में हर बार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की शुरुआत होती है, यानी केरल में 27 फीसदी की कमी के साथ इसे भी सामान्य कम बारिश की श्रेणी में जगह दी गई है।
लक्षद्वीप में सामान्य के मुकाबले 3 फीसदी कम बरसे बादल, यहां एक जून से लेकर पांच जुलाई 2026 तक सामान्यतः 379.3 मिमी तक बारिश होती है जबकि 367 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, यानी इस राज्य में भी बारिश में कमी दर्ज की गई है। कुल मिलाकर दक्षिणी प्रायद्वीप में एक जून से लेकर पांच जुलाई 2026 तक 14 फीसदी की कमी देखी गई है।
एक जून से पांच जुलाई 2026 के दौरान मानसून का प्रदर्शन देशभर में असमान रहा। सबसे अधिक बारिश की कमी पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 42 फीसदी दर्ज की गई, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में 22 फीसदी तथा मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में 14-14 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई। दूसरी ओर, लद्दाख और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह ऐसे क्षेत्र रहे, जहां सामान्य से काफी अधिक बारिश दर्ज की गई।