

छह मार्च से नया विक्षोभ हिमालयी क्षेत्रों के मौसम पर असर डालेगा, सात से दस मार्च के बीच बारिश-बर्फबारी संभव।
उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अगले चार दिनों में तापमान दो से तीन डिग्री बढ़ने और सामान्य से अधिक रहने के आसार।
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सात से दस मार्च के बीच हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना।
गुजरात, तटीय आंध्र प्रदेश और उत्तरी कोंकण के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरे मौसम के आसार हैं।
बढ़ते तापमान को देखते हुए किसानों को गेहूं, सरसों, चना और सब्जियों में हल्की सिंचाई और मिट्टी की नमी बनाए रखने की सलाह।
इस समय एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है और एक नया पश्चिमी विक्षोभ छह मार्च से पश्चिमी हिमालयी इलाकों के मौसम को बदल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ एक ऐसी मौसम प्रणाली है जो भूमध्यसागर से चलकर उत्तर भारत तक पहुंचती है और खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी कराती है।
मौसम विभाग के द्वारा आज सुबह, पांच मार्च, 2026 को जारी पूर्वानुमान में देश के कई हिस्सों में तापमान बढ़ने की आशंका जताई गई है। विशेष रूप से उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में आने वाले दिनों में तापमान सामान्य से अधिक रहने के आसार हैं। यह स्थिति किसानों और आम लोगों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी की संभावना
फिलहाल देशभर में मौसम के शुष्क रहने का अनुमान है, हालांकि वर्तमान पश्चिमी विक्षोभ मध्य स्तरों की पश्चिमी हवाओं में एक ट्रफ के रूप में मौजूद है। इसका असर समुद्र तल से लगभग 5.8 किमी की ऊंचाई पर देखा जा रहा है।
वहीं, एक और नए पश्चिमी विक्षोभ के छह मार्च से पश्चिमी हिमालयी इलाकों में सक्रिय होने की संभावना है। इसके कारण पहाड़ी राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है।
वर्तमान में पूर्वोत्तर भारत पर उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम के ऊपर सक्रिय है। इसकी हवाओं की गति 150 किमी प्रति घंटे के आसपास है। जेट स्ट्रीम मौसम प्रणालियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसकी वजह से पश्चिमी विक्षोभ हिमालय की ओर बढ़ते हैं और वहां बारिश या बर्फबारी कराते हैं।
पश्चिमी विक्षोभ के चलते सात से 10 मार्च के बीच जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख के अलग-अलग इलाकों में हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना है। इसी दौरान हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है।
इसके अलावा आठ से 10 मार्च के बीच उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश या हिमपात होने की संभावना है। यह मौसमी बदलाव पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड को कुछ समय के लिए बढ़ा सकता है।
पश्चिमी हिमालयी इलाकों में तापमान में उतार-चढ़ाव
पश्चिमी हिमालयी इलाकों में अगले दो दिनों तक अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। इसके बाद अगले पांच दिनों में अधिकतम तापमान में लगभग तीन से चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो सकती है। यह गिरावट मुख्य रूप से बादल और बारिश के कारण हो सकती है। इससे पहाड़ी इलाकों में मौसम ठंडा बना रह सकता है।
उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में बढ़ेगा तापमान
पश्चिमी हिमालय के विपरीत, उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में तापमान बढ़ने का अंदेशा जताया गया है। अगले चार दिनों में अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। इसके बाद अगले तीन दिनों तक तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। इस वजह से कई इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से चार से छह डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो सकता है।
इन राज्यों में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। यहां के लोगों को दिन के समय गर्मी का अहसास हो सकता है। इसके अलावा इन राज्यों में न्यूनतम तापमान यानी रात का तापमान भी अगले चार दिनों में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।
भारत के अन्य हिस्सों में भी तापमान में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है। मध्य भारत में अगले चार दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की आशंका है। इसी तरह आंध्र प्रदेश में भी अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।
इसके अलावा उत्तर महाराष्ट्र में अगले 24 घंटों में तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। पूर्वी भारत में भी अगले तीन दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने का अंदेशा है। देश के बाकी हिस्सों में तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है।
देश भर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान की बात करें तो कल, चार मार्च, 2026 को ओडिशा के झारसुगुड़ा में अधिकतम तापमान 39.6 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि कल, देश के मैदानी इलाकों में हिमाचल प्रदेश के मंडी में न्यूनतम तापमान 9.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
तटीय क्षेत्रों में गर्म और उमस भरा मौसम
कुछ जगहों पर गर्म और उमस भरा मौसम भी देखने को मिल सकता है। यह स्थिति खासकर गुजरात, तटीय आंध्र प्रदेश और उत्तरी कोंकण के अलग-अलग हिस्सों पर हो सकती है। उच्च तापमान और अधिक नमी के कारण लोगों को असहजता महसूस हो सकती है।
किसानों के लिए सुझाव
तापमान के सामान्य से अधिक रहने को देखते हुए किसानों के लिए मौसम विभाग ने खेती को लेकर कुछ अहम सलाह जारी की है। जम्मू और कश्मीर में किसानों को गेहूं, सरसों और सब्जियों की फसलों में हल्की सिंचाई करने का सुझाव दिया गया है।
हिमाचल प्रदेश में किसानों को गेहूं और शुरुआती सब्जियों की फसलों के लिए सिंचाई करने की सलाह दी गई है। पॉलीहाउस में उगाई जा रही शिमला मिर्च और टमाटर की फसलों में उचित वेंटिलेशन बनाए रखना भी जरूरी है।
पंजाब और हरियाणा में किसानों को सरसों, आलू और चने की फसलों में मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए सिंचाई करने का सुझाव दिया गया है।
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में किसानों को गेहूं, मसूर, चना और सरसों की फसलों में हल्की और बार-बार सिंचाई करने की सलाह दी गई है, खासकर वो फसल जो विकास के अहम चरणों में हैं।
मार्च 2026 के शुरुआती दिनों में भारत के मौसम में विविधता देखने को मिल रही है। फिलहाल पूरे देश में मौसम के शुष्क बने रहने के आसार हैं। पश्चिमी विक्षोभ के कारण दो से तीन दिनों में हिमालयी इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है। जबकि उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की आशंका व्यक्त की गई है।
ऐसी परिस्थितियों में किसानों को अपनी फसलों की सही देखभाल और समय पर सिंचाई करना बहुत जरूरी है। सही कृषि प्रबंधन और मौसम की जानकारी से फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सकता है।