आठ राज्यों में जलाशयों का जलस्तर गिरा, 40% से नीचे पहुंचा जल संग्रह; तीन नदी घाटियां भी संकट में

केंद्रीय जल आयोग देश के 166 जलाशयों और 20 नदी घाटियों की निगरानी कर रहा है। आयोग की 30 अप्रैल की रिपोर्ट ने अहम संकट के संकेत दिए हैं
प्रतीकात्मक; फोटो: आईस्टॉक
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देश में जल भंडारण की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। जहां एक ओर 166 जलाशयों में पानी का भंडारण 40 फीसदी से नीचे पहुंच चुका है, वहीं नदी घाटियों में भी जल स्तर लगातार कम हो रहा है। असम, गोवा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में जलाशयों का स्तर पिछले साल से कम हो गया है। 30 अप्रैल 2026 को केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी साप्ताहिक बुलेटिन में इस आशय के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।

केंद्रीय जल आयोग देश के 166 जलाशयों के लाइव स्टोरेज की निगरानी करता है और हर गुरुवार को साप्ताहिक बुलेटिन जारी करता है। इन जलाशयों में से 20 जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े हैं, जिनकी कुल लाइव स्टोरेज क्षमता 35.299 अरब घन मीटर (बीसीएम) है। इन 166 जलाशयों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता 183.565 बीसीएम है, जो देश में सृजित अनुमानित कुल क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 71.20 प्रतिशत है।

30 अप्रैल 2026 के बुलेटिन के अनुसार, इन जलाशयों में उपलब्ध लाइव स्टोरेज 71.082 बीसीएम है, जो उनकी कुल क्षमता का 38.72 प्रतिशत है, जो 9 अप्रैल 2026 को 44.71 प्रतिशत थी।

हालांकि इसकी तुलना सामान्य के स्तर या पिछले साल से की जाए तो अभी स्थिति बेहतर बताई जा रही है, क्योंकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह स्टोरेज 62.296 बीसीएम था, जबकि सामान्य (नॉर्मल) स्टोरेज 56.176 बीसीएम था। सामान्य भंडारण का अर्थ पिछले दस वर्षों के औसत भंडारण से है।

लेकिन पूर्वी और पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में हालात बहुत खराब हैं। असम में जलाशयों में सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो सबसे खराब स्थिति में है। त्रिपुरा के जलाशयों में करीब 42 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में लगभग 58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इन राज्यों में कई जलाशय 40 प्रतिशत से नीचे की श्रेणी में हैं।

दक्षिण भारत में कुल भंडारण सामान्य से बेहतर बताई गई है, लेकिन कुछ प्रमुख राज्यों में गिरावट चिंता बढ़ा रही है। कर्नाटक में सामान्य से लगभग 14 प्रतिशत कम जल भंडारण हैं। केरल में हल्की गिरावट है, लेकिन जल स्तर लगातार कम हो रहा है। तमिलनाडु के जलाशयों में करीब 22 प्रतिशत कमी रिकॉर्ड की गई है, जो कावेरी बेसिन पर दबाव का संकेत है। सबसे अहम बात यह है कि दक्षिण भारत में 36 जलाशय 40 प्रतिशत से नीचे हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है।

मध्य प्रदेश के जलाशयों में पिछले साल के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई है, जबकि पश्चिम भारत के गोवा में केवल 1 जलाशय है लेकिन यहां 12 प्रतिशत से अधिक कमी दर्ज की गई है।

इन जलाशयों में हालात खराब

देश में ऐसे 9 प्रमुख जलाशय हैं, जहां पानी सामान्य स्तर के 50 प्रतिशत से भी कम रह गया है। इनमें असम का खांडोंग (21.16 प्रतिशत), झारखंड का चंदन डैम (0.00 प्रतिशत), कर्नाटक का तट्टिहल्ला (24.63 प्रतिशत), केरल का पेरियार (29.21 प्रतिशत), तमिलनाडु के अलियार (48.89 प्रतिशत), करायर (49.89 प्रतिशत) और वैगई (15.17 प्रतिशत), तेलंगाना का प्रियदर्शिनी जूराला (46.56 प्रतिशत) तथा पश्चिम बंगाल का कांगसबाती (28.54 प्रतिशत) शामिल हैं। इन जलाशयों की स्थिति खास तौर पर चिंता बढ़ाती है क्योंकि इनमें से कई ऐसे राज्यों में स्थित हैं जहां जल भंडारण पहले से ही पिछले वर्ष की तुलना में कम हो गया है।

इसी तरह कुल 166 जलाशयों में से 22 जलाशय ऐसे हैं, जहां पानी का स्तर सामान्य के 80 प्रतिशत या उससे कम है। इनमें से 9 जलाशय 50 प्रतिशत से भी नीचे हैं, जबकि 13 जलाशय 51 प्रतिशत से 80 प्रतिशत के बीच हैं। इन 13 में भी 3 जलाशय 51 से 60 प्रतिशत, 4 जलाशय 61 से 70 प्रतिशत और 6 जलाशय 71 से 80 प्रतिशत के दायरे में हैं, जो संकेत देता है कि बड़ी संख्या में जलाशय अभी भी पूरी तरह संतोषजनक स्थिति में नहीं हैं।

नदी घाटियों में कम हो रहा है जलस्तर

जल आयोग के 9 अप्रैल 2026 के बुलेटिन की तुलना में 30 अप्रैल 2026 के ताज़ा आंकड़े मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। अप्रैल की शुरुआत में गंगा (53.8 प्रतिशत), गोदावरी (47.58 प्रतिशत), नर्मदा (46.09 प्रतिशत) और ताप्ती (60.71 प्रतिशत) अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में थे, हालांकि ये भी आधे या उससे थोड़ा अधिक ही भरे थे। अब ताज़ा बुलेटिन में गंगा बेसिन लगभग 50.01 प्रतिशत पर है, गोदावरी 40.69 प्रतिशत और नर्मदा 38.82 प्रतिशत पर आ गए हैं, यानी इनमें कुछ गिरावट आई है, जबकि ताप्ती अभी भी अपेक्षाकृत संतुलित स्थिति में बना हुआ है। कृष्णा बेसिन पहले 31.31 प्रतिशत पर था और अब भी लगभग 22.55 प्रतिशत के आसपास कमजोर स्थिति में बना हुआ है, जबकि कावेरी (अब 35.74 प्रतिशत) और महानदी (43.51 प्रतिशत) में भी गिरावट दिखती है।

उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर बेसिनों में भी बदलाव देखने को मिला है। पहले सिंधु बेसिन 41.52 प्रतिशत और माही 48.70 प्रतिशत पर थे, अब माही बेहतर होकर 44.71 प्रतिशत के आसपास बना हुआ है, जबकि सिंधु बेसिन में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। ब्रह्मपुत्र, जो पहले 35.20 प्रतिशत पर था, अब लगभग सामान्य के आसपास स्थिर दिख रहा है। हालांकि पूर्वोत्तर के बराक बेसिन की स्थिति और कमजोर बनी हुई है, जहां अब भी सामान्य से करीब 24 प्रतिशत की कमी दर्ज हो रही है, जिससे यह सबसे कमजोर बेसिन बना हुआ है।

छोटे और तटीय बेसिनों में असमानता और साफ हो गई है। 9 अप्रैल को पेनार 73.43 प्रतिशत और साबरमती 57.19 प्रतिशत पर थे, जबकि सुबर्णरेखा 80.48 प्रतिशत के साथ सबसे बेहतर स्थिति में था। ताज़ा आंकड़ों में साबरमती और सुबर्णरेखा अभी भी मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन पेनार में गिरावट आई है और यह सामान्य से नीचे चला गया है। ब्राह्मणी–बैतरणी, जो पहले 41.42 प्रतिशत पर था, अब भी सामान्य से नीचे बना हुआ है। वहीं पूर्वी तटीय नदियों (महानदी–पेनार के बीच) और पश्चिमी तटीय नदियों (तदरी–कन्याकुमारी) में पानी का स्तर कम बना हुआ है, जिससे साफ है कि महीने भर में कुल मिलाकर कई बेसिनों में गिरावट आई है और क्षेत्रीय जल असंतुलन और गहरा हुआ है।

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