

देश में पहली बार 2019-20 में सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने देशभर में भूजल में यूरेनियम की निगरानी की। कुल 14,377 नमूने जांचे गए, जो नियमित रूप से मॉनिटर किए जा रहे हैं। चौंकाने वाला यह है कि भारत में भूजल में यूरेनियम की मात्रा 0 से 2876 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक पाई गई। यानी स्वीकार्य सीमा से 96 गुना अधिक तक। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सीमा पीने के पानी में 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर है। वहीं, भारतीय मानक ब्यूरो ने अभी तक कोई मानक तय नहीं किया है।
जबकि एईआरबी ने रेडियोलॉजिकल आधार पर पीने के पानी में यूरेनियम की अधिकतम सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तय की है। बोर्ड के मुताबिक, 18 राज्यों के 151 जिले आंशिक रूप से भूजल में यूरेनियम की उच्च सांद्रता (>30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर) से प्रभावित हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर या पार्ट्स प्रति बिलियन-पीपीबी की सीमा से अधिक यूरेनियम सांद्रता वाले कुओं के प्रतिशत के आधार पर सबसे अधिक प्रभावित राज्य पंजाब है जहां 24.2% कुओं में यूरेनियम की मात्रा डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित 30 पीपीबी की सीमा से अधिक पाई गई, हरियाणा में 19.6 फीसदी, तेलंगाना में 10.1 फीसदी कुएं और दिल्ली में 11.7 फीसदी कुएं व राजस्थान में 7.2 फीसदी कुएं, आंध्र प्रदेश में 4.9 फीसदी कुएं और उत्तर प्रदेश में 4.4 फीसदी कुओं में यूरेनियम की सांद्रता डब्ल्यूएचओ की निर्धारित सांद्रता 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से अधिक पाई गई। इन राज्यों के अलावा कुछ अन्य राज्यों में भी जैसे कर्नाटक (1.9%), मध्य प्रदेश (1.3%), तमिलनाडु (1.6%), झारखंड (1.5%), छत्तीसगढ़ (1.3%), गुजरात (0.9%), हिमाचल प्रदेश (0.8%), महाराष्ट्र (0.3%), ओडिशा (0.4%), पश्चिम बंगाल (0.1%) तथा बिहार (1.7%) में कुछ स्थानीय क्षेत्रों (पॉकेट्स) में कुओं में यूरेनियम की सांद्रता 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर की सीमा से अधिक पाई गई है।
वहीं, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) ने पेयजल में यूरेनियम के लिए विकिरण-आधारित सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति लीटर या पार्टस प्रति बिलियन (पीपीबी) निर्धारित की है। इस सीमा के आधार पर सबसे अधिक प्रभावित राज्य पंजाब है, जहां 6 फीसदी कुओं में यूरेनियम की मात्रा 60 पीपीबी से अधिक पाई गई। वहीं, हरियाणा (4.4 फीसदी), तेलंगाना (2.6%), दिल्ली (5.0%), राजस्थान (1.2%), आंध्र प्रदेश (2.0%), छत्तीसगढ़ (1.1%), तमिलनाडु (0.9%), कर्नाटक (0.7%), मध्य प्रदेश (0.6%), उत्तर प्रदेश (0.4%) व झारखंड में 0.25% फीसदी कुओं में यूरेनियम की सांद्रता मानकों से अधिक मिली।