

देशभर में नदियों के बेसिन और जलाशय तेजी से सूख रहे हैं।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण कुल क्षमता के सिर्फ 44.71% पर सिमट गया है।
चंदन बांध पूरी तरह सूख चुका है और कई अन्य जलाशय 50% से नीचे हैं।
जबकि कई नदी बेसिन 30-60% के बीच हैं।
दक्षिण और पश्चिम भारत में गिरावट सबसे तेज है, जिससे गर्मियों में गंभीर जल संकट की आशंका बढ़ गई है।
देश के लगभग सभी नदियों के प्रवाह क्षेत्र (रिवर बेसिन) व जलाशयों में पानी की मात्रा कम होती जा रही है। केंद्रीय जल आयोग की निगरानी वाले 166 जलाशयों में पानी की मात्रा कुल क्षमता के मुकाबले आधे से भी कम हो चुका है। बिहार का चंदन डैम में पानी ही नहीं रहा। वहीं, जल आयोग की निगरानी वाले 20 नदी बेसिनों में पानी की मात्रा आधे या उससे कम पर पहुंची चुकी है। यह आने वाले समय के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
हालांकि केंद्रीय जल आयोग के 9 अप्रैल 2026 को जारी साप्ताहिक बुलेटिन में कहा गया है कि औसत और पिछले साल के मुकाबले अभी हालात काबू में हैं। लेकिन अगर फरवरी 2026 के पहले सप्ताह से तुलना की जाए तो लगभग सभी नदी बेसिन व जलाशयों में पानी की मात्रा तेजी से कम हो रही है।
खाली हो रहे हैं जलाशय
केंद्रीय जल आयोग देश के 166 प्रमुख जलाशयों की लाइव स्टोरेज स्थिति की साप्ताहिक निगरानी करता है। इन जलाशयों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है, जो देश की कुल अनुमानित क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 71.20 प्रतिशत है। 9 अप्रैल 2026 के बुलेटिन के अनुसार, इन जलाशयों में उपलब्ध जल भंडारण 82.070 बीसीएम पहुंच गई है, जो कुल क्षमता का 44.71 प्रतिशत है।
हालांकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह मात्रा 69.752 बीसीएम पहुंच गई थी। जबकि 10 वर्षों का औसत (सामान्य) 64.618 बीसीएम है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी जलाशयों में पानी की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में 117.66 प्रतिशत और सामान्य स्तर का 127.01 प्रतिशत है। यानी अभी पानी का स्टोरेज औसत और पिछले साल से बेहतर है।
लेकिन पिछले महीनों में पानी की मात्रा तेजी से घट रही है। जानकार मानते हैं कि साल 2025 के मानूसन व उसके बाद हुई अच्छी खासी बारिश के कारण जलाशयों व नदी बेसिनों में पानी की मात्रा अच्छी खासी पहुंच गई थी, लेकिन जनवरी-फरवरी में बारिश न होने के कारण इस साल हालात बिगड़ने लगे हैं।
आंकड़ों की पड़ताल से पता चलता है कि फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल जल भंडारण 122.313 बीएसएम था, जो उनकी कुल क्षमता का 66.63% था। इसके बाद 2 अप्रैल तक यह घटकर 85.698 बीसीएम (46.69 प्रतिशत) रह गया और 9 अप्रैल 2026 को और गिरकर 82.070 बीसीएम, यानी कुल क्षमता का सिर्फ 44.71 प्रतिशत रह गया।
देश के 8 प्रमुख जलाशय ऐसे हैं जहां पानी सामान्य का 50 प्रतिशत या उससे भी कम रह गया है। सबसे गंभीर स्थिति बिहार के चंदन बांध की है, जहां जल भंडारण शून्य (0 प्रतिशत) पर पहुंच चुका है। यानी जलाशय पूरी तरह सूख चुका है। इसके अलावा असम का खंडोंग (28 प्रतिशत), कर्नाटक का तत्तिहल्ला (16 प्रतिशत), केरल का पेरियार (33 प्रतिशत), तमिलनाडु के शोलयार (13 प्रतिशत) और वैगई (26 प्रतिशत), तेलंगाना का प्रियदर्शिनी जूराला (42 प्रतिशत) और पश्चिम बंगाल का कंगसाबाती (34 प्रतिशत) भी बेहद कम स्तर पर हैं।
दक्षिण में हालात सबसे ज्यादा खराब
अगर क्षेत्रवार तुलना करें तो फरवरी में उत्तरी क्षेत्र के जलाशय 61.96 प्रतिशत भरे थे, जो 9 अप्रैल तक घटकर 43.87 प्रतिशत रह गए। पूर्वी क्षेत्र में यह गिरावट 64.32 प्रतिशत से 42.20 प्रतिशत तक पहुंच गई। पश्चिमी क्षेत्र, जो सबसे बेहतर स्थिति में था, वहां भी भंडारण 78.06 प्रतिशत से घटकर 53.65 प्रतिशत रह गया। मध्य भारत में जल स्तर अपेक्षाकृत स्थिर दिखता है, लेकिन यहां भी यह 69.11 प्रतिशत से गिरकर 51.77 प्रतिशत पर आ गया है।
सबसे ज्यादा गिरावट दक्षिण भारत में दर्ज हुई, जहां फरवरी में जलाशयों का भंडारण 59.16 प्रतशित से घटकर सिर्फ 33.63 प्रतिशत रह गया है। यह तुलना बताती है कि गिरावट पूरे देश में समान रूप से हो रही है, लेकिन दक्षिण और पश्चिम भारत में इसका असर ज्यादा तेज है। कुल मिलाकर, सभी क्षेत्रों में जल स्तर घटने से गर्मियों में जल संकट की आशंका बढ़ गई है।
सूख रहे हैं नदी बेसिन
केंद्रीय जल आयोग के 9 अप्रैल 2026 के ताजा आंकड़े यह साफ बताते हैं कि देश का कोई भी नदी बेसिन अब भरापूरा नहीं है। लगभग सभी बेसिन 30 से 60 प्रतिशत के बीच सिमट चुके हैं और कुछ पहले से ही संकट की स्थिति में हैं।
बुलेटिन के मुताबिक गंगा बेसिन 53.8 प्रतिशत पर है, गोदावरी 47.58 प्रतिशत, नर्मदा 46.09 प्रतिशत और तापी 60.71 प्रतिशत के साथ अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं, लेकिन ये भी आधे या उससे थोड़ा अधिक ही भरे हैं। कृष्णा बेसिन सिर्फ 31.31 प्रतिशत पर आ चुका है, जबकि कावेरी 42.75 प्रतिशत और महानदी 52.17 प्रतिशत पर हैं।
उत्तर-पश्चिम के सिंधु बेसिन में 41.52 प्रतिशत और माही में 48.70 प्रतिशत पानी बचा है। ब्रह्मपुत्र 35.20 प्रतिशत पर है।
छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बेसिनों की स्थिति और ज्यादा असमान है। पेनार 73.43 प्रतिशत और साबरमती 57.19 प्रतिशत पर हैं, जबकि सुबर्णरेखा 80.48 प्रतिशत के साथ सबसे बेहतर स्थिति में है। इसके उलट ब्राह्मणी–बैतरणी 41.42 प्रतिशत पर आकर सामान्य से नीचे पहुंच गया है, और बराक बेसिन 43 प्रतिशत के साथ सबसे कमजोर बना हुआ है।
पूर्वी तटीय नदियों (महानदी–पेनार के बीच) में सिर्फ 25.39 प्रतिशत और पश्चिमी तटीय नदियों (तदरी–कन्याकुमारी) में 35.32 प्रतिशत पानी बचा है।