

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल से कथित 17वीं मौत की खबरें आज प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट किया गया है कि मृतक ने भागीरथपुरा की एक होटल में चाय-नाश्ता भर किया, उसके बाद बीमार पड़े, किडनी फेल हुई और मौत।
एक गिलास साफ पानी नहीं मिलने से किसी की जिंदगी चली गई, वहीं दूसरी तरफ इंदौर में पेयजल सप्लाई का 65 फीसदी हिस्सा वर्ष 2018 में जलहानि के रूप में दर्ज हुआ।
भोपाल भी इसमें पीछे नहीं है, भोपाल में इसी साल यह आंकड़ा पचास फीसदी था। बीते पांच सालों में हालात बहुत सुधर गए हों जमीनी हकीकत देखकर ऐसा समझ नहीं आता।
भारत के महानिरीक्षक लेखा परीक्षक (कैग) ने 2019 में भोपाल और इंदौर के जल प्रदाय व्यवस्था पर एक लेखा परीक्षा रिपोर्ट जारी की है।
रिपोर्ट में 2013—14 से 2017—18 तक की स्थिति सामने आती है। रिपोर्ट के अनुसार भोपाल में इस अवधि में गैर राजस्व जल की मात्रा 30 प्रतिशत से 49 प्रतिशत और इंदौर में इसी 65 से 70 प्रतिशत के बीच थी। जितना कच्चा पानी लिया जा रहा है उसके विरुद्ध सप्लाई किए गए पानी में बहुत ज्यादा अंतर नजर आ रहा है।
हालांकि नगर पालिक निगम इंदौर ने जो राजपत्र अधिसूचना गैर राजस्व जल की मात्र 15 से 26 प्रतिशत के बीच दिखाई है, पर कैग इस आंकड़े से संतुष्ट नहीं है।
डाउन टू अर्थ के पाठकों को बता दें कि जल हानि को दो तरह से देखा जाता है। भौतिक हानि में मुख्य रूप से पाइप लाइन जोड़ों, संयोजन जलाशयों में रिसाव तथा सम्प से ज्यादा पानी बहने के कारण हैं, जबकि अभौतिक हानि की श्रेणी में पानी की चोरी, असंबद्ध कनेक्शन, गलत मीटर रीडिंग, पानी की खुली टोंटियां आदि से होने वाली हानि को जोड़ा जाता है।
2013-14 में भोपाल में पानी की बर्बादी 30 प्रतिशत थी, जबकि इंदौर के लिए उस वर्ष कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। 2014-15 में भोपाल में जल हानि 30 प्रतिशत रही, वहीं इंदौर में यह 65 प्रतिशत दर्ज की गई।
2015-16 में भोपाल में पानी की बर्बादी बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई, जबकि इंदौर में यह 70 प्रतिशत तक पहुंच गई। 2016-17 में भोपाल में जल हानि 38 प्रतिशत बनी रही और इंदौर में यह 69 प्रतिशत रही। 2017-18 में भोपाल में भी जल हानि 38 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि इंदौर में यह 65 प्रतिशत रही।
प्रति व्यक्ति जल की मात्रा लक्ष्य से कम:
पानी लोगों का संवैधानिक अधिकार है। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है। नगर पालिक निगम द्वारा लोगों को उपलब्ध कराई गई पानी की मात्रा भी कम है।
भोपाल में 2017—18 में 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति व्यक्ति दिन का लक्ष्य तय किया था, बीएमसी ने अपने आंकड़ों में तो इतनी ही आपूर्ति करने का दावा किया, पर कैग ने इसे 122 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन ही माना है।
इंदौर ने 2017—18 में 150 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन के लक्ष्य के विरूद 105 लीटर प्रदाय किए जाने का क्लेम किया, जबकि कैग की रिपोर्ट में इसे 58 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति लीटर माना। यह तय लक्ष्य से बहुत कम है। 2018 में भोपाल में 1.43 लाख घरों में, और इंदौर में 2.68 लाख घरों में पानी का कनेक्शन नहीं होने की स्थिति रिपोर्ट में दर्शाई गई है।
22 से 182 दिनों का विलम्ब:
आखिर क्या वजह है कि लोगों को इतना कम और गुणवत्ताहीन पानी मिल रहा है। कैग की पड़ताल में सामने आया है कि जल रिसाव को रोकने के लिए लंबा समय लग रहा है। इन शहरों में 3530 रिसाव के मामले सामने आए।
भोपाल में 657 और इंदौर में 2873 रिसाव हुए। इन मामलों में से 105 मामलों के जांच की गई इसमें 22 से 182 दिनों की देरी से होना पाया गया। मरम्मत के कार्य आदेश जारी करने में भी भोपाल में 38 से 178 दिन जबकि इंदौर में 20 से 151 दिन का समय लग रहा है।
कार्य आदेश जारी होने के बाद भी भोपाल में 1 से 6 दिन और इंदौर में 1 से 12 दिन का समय लग रहा है। कैग ने इसका कारण लीकेज ठीक नहीं करने के लिए वार्षिक अनुबंध को नहीं होना माना।
रिसाव मरम्मत पर भोपाल में जहां पांच साल में 1.55 करोड़ रुपए खर्च किए गए वहीं इंदौर में 14.83 करोड़ रुपए व्यय करना बताए गए हैं। एक तथ्य यह भी बताया गया है कि भोपाल में 2018 की स्थिति में 29 प्रतिशत जल प्रदाय करने वाला तकनीकी, मैदानी और कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों की कमी थी, वहीं इंदौर में स्वीकृत पदों के विरूद्ध 18 प्रतिशत पद खाली थी।
पानी मौलिक अधिकार, इससे कोई समझौता नहीं: हाईकोर्ट
इंदौर में प्रदूषित जल मामले को लेकर हाईकोर्ट बैंच इंदौर में पांच जनहित याचिकाओं की सुनवाई एक साथ की गई। कोर्ट ने छह जनवरी को सरकार से इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा था। हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि पानी लोगों का एक मौलिक अधिकार है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि इंदौर में दूषित पेयजल मामले से पूरे देश में सबसे साफ शहर की छवि को नुकसान पहुंचा है। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी। इधर बीमार होने का मामला थम नहीं रहा है। मंगलवार को 38 नए बीमार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रदेश कांग्रेस ने मंगलवार को इस इलाके में प्रदर्शन किया।