

जंगली धान कई सालों तक जीवित रहते हैं, जबकि आधुनिक धान वार्षिक होते हैं और हर साल बोने पड़ते हैं।
शोधकर्ताओं ने 446 जंगली चावल की प्रजातियों का अध्ययन कर उन्हें लंबे समय तक जीवित रखने वाले गुणों की पहचान की।
ईबीटी1 जीन, जिसमें एमआईआर156बी और एमआईआर156 सी शामिल हैं, धान में नए अंकुर बनाने व बहुवर्षीय बनने में अहम भूमिका।
आधुनिक धान में यह जीन फूल आने के बाद बंद हो जाता है, जबकि जंगली धान में पुनः सक्रिय हो जाता है।
बहुवर्षीय धान विकसित होने से खेती की लागत कम होगी, मिट्टी पर दबाव घटेगा और कृषि अधिक टिकाऊ बनेगी।
धान की फसल दुनिया भर में सबसे अहम फसलों में से एक है और यह आधे से अधिक लोगों का मुख्य भोजन है। जंगली धान की कई प्रजातियां बहुवर्षीय (पेरिनियल) होती हैं, यानी ये कई सालों तक जीवित रहती हैं और हर साल नए अंकुर निकलते हैं। लेकिन आज हम जो चावल खाते हैं, वह अधिकतर सालाना होती है।
इसका मतलब है कि हर साल किसान को नए बीज बोने पड़ते हैं और खेत तैयार करना पड़ता है। यह प्रक्रिया महंगी और मेहनत वाली है। हालांकि अब वैज्ञानिकों ने ऐसा तरीका खोज लिया है जिससे धान लंबे समय तक उग सकता है और बार-बार कटाई के बाद भी बढ़ सकता है।
लंबी उम्र वाला जीन खोजने की प्रक्रिया
चीनी विज्ञान अकादमी का आणविक पौध विज्ञान उत्कृष्टता केंद्र के शोधकर्ताओं ने 446 जंगली धान की प्रजातियों का अध्ययन किया। उन्होंने उन पौधों में उन लक्षणों को देखा जो उन्हें लंबे समय तक जीवित रखते हैं, जैसे कि पौधे की तनों से नई अंकुरों का उगना और फूलों के बाद फिर से हरे भागों का बनना।
इसके बाद उन्होंने आधुनिक वार्षिक धान और जंगली बहुवर्षीय धान को आपस में मिलाकर हाइब्रिड तैयार किए। इस प्रक्रिया में उन्होंने यह देखा कि कौन से डीएनए हिस्से पौधे की लंबी उम्र के लिए जिम्मेदार हैं। कई बार वापस वार्षिक धान के साथ इन्हें क्रॉस करके उन्होंने यह पता लगाया कि कौन सा जीन नई अंकुर पैदा करने की क्षमता देता है।
ईबीटी1 जीन की खोज
साइंस पत्रिका में प्रकाशित शोध पत्र के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ हाइब्रिड पौधे दिखने में आधुनिक धान जैसे हैं, लेकिन फूल आने के बाद भी नई अंकुर बनाते रहते हैं। इसके डीएनए का विश्लेषण करने पर उन्हें एक विशेष जीन क्षेत्र मिला जिसे उन्होंने अनंत शाखाएं वाले (ईबीटी1) नाम दिया। इसमें दो माइक्रोआरएनए जीन, एमआईआर156बी और एमआईआर156सी, मौजूद हैं।
शोधकर्ताओं ने जब इस जीन को जंगली धान में निष्क्रिय किया, तो वह फूल आने के बाद नए अंकुर नहीं बना पाया। वहीं, अगर इसे आधुनिक धान में डाला गया तो यह बार-बार फूल आने के बाद भी बढ़ता रहा। इसका मतलब है कि ईबीटी1 जीन चावल को बहुवर्षीय बनने में मुख्य भूमिका निभाता है।
एपिजेनेटिक बदलाव और जीन की सक्रियता
आधुनिक सालाना उगाए जाने वाले धान में यह जीन फूल आने के बाद बंद हो जाता है। इसका कारण है कि डीएनए मजबूती से बंद हो जाता है और जीन सक्रिय नहीं रह पाता। लेकिन जंगली धान में यह जीन फिर से सक्रिय हो जाता है, जिससे पौधा बार-बार नए अंकुर उगा सकता है। यह दिखाता है कि सिर्फ डीएनए ही नहीं बल्कि उसके बंद होने और नियंत्रण भी पौधे की जीवनशैली तय करता है।
भविष्य में खेती पर असर
इस खोज से भविष्य में बहुवर्षीय धान विकसित किया जा सकता है। ऐसे धान को हर साल बोने की जरूरत नहीं होगी। इससे किसान की लागत कम होगी, मिट्टी पर दबाव कम होगा और खेती अधिक स्थायी बन सकती है। साथ ही यह तकनीक अन्य अनाजों जैसे गेहूं और मक्का पर भी लागू की जा सकती है।
शोध पत्र में शोधकर्ताओं के हवाले से कहना है कि हमारे निष्कर्ष न केवल अनाजों में बहुवर्षीय के जीनिक आधार को समझने में मदद करते हैं, बल्कि भविष्य में टिकाऊ और बहुवर्षीय धान विकसित करने की राह भी खोलते हैं।