आसमान में आज सजेगी उल्काओं की बारात, चमकती लकीरों से रोशन होगी रात

अक्टूबर की रातों में आसमान पर दिखेगा ओरायनिड्स का अद्भुत नजारा, 66 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चमकेंगी उल्काएं, हैली धूमकेतु से जुड़ा है खास नाता
ओरायनिड्स उल्कापात अक्टूबर में आसमान को चमकीली लकीरों से सजाता है, जिसे साल के सबसे खूबसूरत उल्कापातों में गिना जाता है।
ओरायनिड्स उल्कापात अक्टूबर में आसमान को चमकीली लकीरों से सजाता है, जिसे साल के सबसे खूबसूरत उल्कापातों में गिना जाता है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • ओरायनिड्स उल्कापात अक्टूबर में आसमान को चमकीली लकीरों से सजाता है, जिसे साल के सबसे खूबसूरत उल्कापातों में गिना जाता है।

  • ये उल्काएं पृथ्वी के वायुमंडल में 66 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से प्रवेश करती हैं और शानदार रोशनी बिखेरती हैं।

  • ओरायनिड्स का संबंध प्रसिद्ध हैली धूमकेतु से है, जिसके धूल और चट्टानी कण हर साल पृथ्वी के वायुमंडल में चमकते हैं।

  • हैली धूमकेतु सूर्य का चक्कर लगभग 76 वर्षों में पूरा करता है और वर्ष 2061 में दोबारा दिखाई देने की उम्मीद है।

  • उल्कापात देखने के लिए शहर की रोशनी से दूर खुले स्थान पर जाएं और आधी रात के बाद आसमान को ध्यानपूर्वक निहारें।

रात का शांत आसमान, टिमटिमाते तारे और अचानक अंधेरे को चीरती हुई रोशनी की चमकीली लकीर! कुछ ऐसा ही खूबसूरत नजारा ओरायनिड्स उल्कापात (ओरियोनिड्स मेटोर शावर) के दौरान देखने को मिलता है। अक्टूबर के महीने में आसमान को रोशन करने वाली यह खगोलीय घटना अपनी तेज रफ्तार और चमकदार उल्काओं के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इस दौरान आसमान में दिखाई देने वाली रोशनी की लकीरें प्रकृति के किसी शानदार आतिशबाजी के प्रदर्शन से कम नहीं लगतीं।

नासा के अनुसार, ओरायनिड्स को साल के सबसे खूबसूरत उल्कापातों में गिना जाता है। अक्टूबर के मध्य से लेकर महीने के अंतिम दिनों तक इसकी गतिविधियां देखने को मिलती हैं। इसका प्रमुख समय आधी रात के बाद होता है, जब आसमान में उल्काओं की चमक देखने की अच्छी संभावना रहती है। नासा के मुताबिक यह नजारा दो अक्टूबर से सात नवंबर, 2026 तक सक्रिय रहेगा और 21-22 अक्टूबर की रात चरम पर पहुंचेगा।

66 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार

ओरायनिड्स की सबसे खास बात इनकी तेज रफ्तार है। ये उल्काएं पृथ्वी के वायुमंडल में करीब 66 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से प्रवेश करती हैं। इतनी तेज गति के कारण इनके पीछे चमकती हुई रोशनी की लकीर बन सकती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘ट्रेन’ कहा जाता है।

ये चमकीली लकीरें कुछ सेकंड से लेकर कई मिनट तक दिखाई दे सकती हैं। कभी-कभी कोई उल्का अचानक बहुत तेज रोशनी के साथ चमक उठती है। ऐसी घटना को ‘फायरबॉल’ यानी अग्निगोला कहा जाता है। यही अनोखा नजारा ओरायनिड्स को और भी रोमांचक बना देता है।

हैली धूमकेतु से आता है रोशनी का यह कारवां

ओरायनिड्स की कहानी का रिश्ता अंतरिक्ष के एक बेहद मशहूर यात्री से है - हैली धूमकेतु। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस उल्कापात का निर्माण धूमकेतु 1पी/हैली से निकले धूल और चट्टानी कणों के कारण होता है।

जब हैली धूमकेतु सूर्य के पास से गुजरता है, तो उससे बर्फ और धूल के छोटे-छोटे कण अंतरिक्ष में बिखरते हैं। समय के साथ ये कण धूमकेतु की कक्षा के आसपास एक लंबी धूलभरी पट्टी बना लेते हैं। हर साल जब पृथ्वी इस पट्टी से गुजरती है, तो ये कण हमारे वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और घर्षण के कारण गर्म होकर चमकने लगते हैं। इसी से आसमान में उल्काओं की खूबसूरत लकीरें दिखाई देती हैं। दिलचस्प बात यह है कि यही हैली धूमकेतु मई में दिखाई देने वाले एटा एक्वेरिड्स उल्कापात का भी स्रोत है।

2061 में फिर लौटेगा हैली धूमकेतु

हैली धूमकेतु सूर्य का एक चक्कर लगभग 76 साल में पूरा करता है। इसे आखिरी बार 1986 में देखा गया था और इसकी अगली वापसी 2061 में होने की उम्मीद है। यानी इसके दोबारा सूर्य के करीब आने के लिए अभी कई साल इंतजार करना होगा।

इस धूमकेतु का नाम खगोलशास्त्री एडमंड हैली के नाम पर पड़ा। वर्ष 1705 में उन्होंने अनुमान लगाया था कि पहले देखे गए तीन धूमकेतु दरअसल एक ही धूमकेतु के अलग-अलग दर्शन थे, जो लगभग 76 साल के अंतराल पर लौटता है। बाद में उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई। हैली धूमकेतु का जिक्र इतिहास में भी मिलता है। वर्ष 1066 की घटनाओं को दर्शाने वाली प्रसिद्ध बेय्यू टेपेस्ट्री में भी इसका चित्रण किया गया है।

ओरायन तारामंडल से जुड़ा है नाम

ओरायनिड्स का नाम ओरायन तारामंडल से लिया गया है। आसमान में यह वह दिशा है, जहां से ये उल्काएं आती हुई प्रतीत होती हैं। खगोल विज्ञान में इसे ‘रेडिएंट’ कहा जाता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं कि उल्काएं वास्तव में ओरायन तारामंडल से निकलती हैं। वे पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाले अंतरिक्षीय कणों के कारण दिखाई देती हैं।

कैसे देखें यह शानदार नजारा?

ओरायनिड्स देखने के लिए शहर की तेज रोशनी से दूर किसी खुले और अंधेरे स्थान का चुनाव करें। अपने साथ चादर, कंबल या आरामदायक कुर्सी रखें और पीठ के बल लेटकर आसमान को निहारें। आंखों को अंधेरे के अनुसार ढलने में करीब 30 मिनट लग सकते हैं, इसलिए धैर्य रखना जरूरी है।

उत्तरी गोलार्ध में दर्शक दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर पैर करके लेट सकते हैं, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में उत्तर-पूर्व दिशा की ओर पैर रखना उपयोगी हो सकता है। उल्काओं को देखने के लिए केवल ओरायन तारामंडल पर नजर टिकाना जरूरी नहीं है। बल्कि उससे लगभग 45 से 90 डिग्री दूर आसमान के हिस्से को देखना बेहतर रहता है। इससे उल्काओं की लंबी और सुंदर चमकीली लकीरें नजर आ सकती हैं।

तो इस अक्टूबर, मोबाइल की स्क्रीन से कुछ समय दूर होकर खुले आसमान के नीचे बैठिए। हो सकता है कि अचानक चमकती एक उल्का आपकी नजरों के सामने से गुजरे और रात को एक यादगार अनुभव में बदल दे।

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