दिल्ली की डंप साइटों में लगती आग को रोकने के लिए रिपोर्ट ने सुझाए उपाय

दिल्ली की डंप साइटों में लगती आग को रोकने के लिए रिपोर्ट ने सुझाए उपाय

यहां पढ़िए पर्यावरण सम्बन्धी मामलों के विषय में अदालती आदेशों का सार
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संयुक्त समिति ने अपनी 21 सितंबर, 2022 को जारी रिपोर्ट में दिल्ली की डंपसाइटों में लगती आग को रोकने के उपाय सुझाए हैं। टीम के सदस्यों में से एक डी के सिंह, जिन्होंने मुंबई में गोराई और देवनार डंपसाइटों का दौरा कर उनके बारे में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

इस रिपोर्ट की जांच के बात समिति का विचार था कि गोराई और देवनार डंपसाइट्स पर आग को रोकने के लिए जो कदम उठाए गए हैं वो बहुत उपयोगी थे और उन्हें दिल्ली की लैंडफिल साइटों पर भी दोहराया जा सकता है।  

हितधारकों को इस रिपोर्ट की जांच करने और यह कितनी उपयोगी है उसकी सम्भावना का पता लगाने के लिए निर्देशित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार आग की घटनाओं को रोकने के लिए निम्नलिखित सुझावों पर विचार किया जा सकता है:

  • डंप-साइट के कारण पैदा हो रही मीथेन को छोड़ने के लिए, छिद्रित एचडीपीई पाइप या किसी अन्य उपयुक्त सामग्री की पाइप को साइट में उचित स्थानों पर लगाया जा सकता है। इनके बीच जगह को ध्यान में रखते हुए दूरी बनाए रखना जरूरी है।
  • पूरी डंप-साइट को 'नो स्मोकिंग' और 'मैच-बॉक्स फ्री जोन' घोषित करना।
  • छायांकित क्षेत्र में नियमित वृक्षारोपण करना साथ ही अन्य लोगों और कूड़ा बिनने वालों के अनधिकृत प्रवेश को रोकना।

 नियमों को ताक पर रख रायगढ़ में सीआरजेड-III जोन में किया गया आंगनवाड़ी का निर्माण

संयुक्त समिति द्वारा 21 सितंबर, 2022 को एनजीटी के समक्ष दायर रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि रायगढ़ में आंगनवाड़ी का निर्माण सीआरजेड-III जोन में किया गया है जोकि  मैंग्रोव बफर क्षेत्र के 50 मीटर के दायरे के अंदर है। मतलब की यह सीआरजेड अधिसूचना 2011 का उल्लंघन है। मामला महाराष्ट्र में रायगढ़ की पेन तालुका के बोरी गांव का है।  

रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि शिरकी ग्रामपंचायत ने इस आंगनबाडी के निर्माण के लिए महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (एमसीजेडएमए) से अनुमति नहीं ली है। इस प्रकार तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचना 2011 के अनुसार इसके लिए अनुमति लेना जरूरी था, जबकि ऐसा नहीं किया गया है, जोकि सीआरजेड अधिसूचना 2011 का उल्लंघन है।

बीबीएमपी ने एनजीटी से किया वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट से जुड़ा मामला वापस लेने का अनुरोध

बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) ने अपनी रिपोर्ट में एनजीटी को जानकारी दी है कि उसने नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) नियम 2016 का पालन करने के लिए विशेष रूप से चिकनगमंगला वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट के संबंध में सभी प्रयास किए हैं। ऐसे में उसने कोर्ट से एक समाचार के आधार पर उसके  खिलाफ दायर स्वत: मोटो मामले को वापस लेने का अनुरोध किया है।

गौरतलब है कि इसके संबंध में समाचार पत्र बैंगलोर मिरर में 18 अगस्त, 2022 को शीर्षक "नाईटमेयर सीवेज प्लांट चोक्स नियरबाय रेसिडेंटस" से एक खबर प्रकाशित हुई थी। रिपोर्ट में एनजीटी को जानकारी दी गई है कि 500 ​​टीपीडी क्षमता का यह चिकनगमंगला वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट बेंगलुरु के शहरी जिले में बीबीएमपी की 15.3 एकड़ भूमि पर फैला हुआ है, जोकि अनेकल तालुका की शांतिपुरा पंचायत क्षेत्र में है।

रिपोर्ट के मुताबिक पेड़-पौधों से घिरे आस-पास के गांवों में बोरवेल के पानी के नमूनों की जांच की गई है और उनकी गुणवत्ता तय सीमा के भीतर पाई गई है। इस प्लांट में अलग किए गए गीले कचरे को कम्पोस्ट के रूप में प्रोसेस करते समय जो खाद बच रही है उसे किसानों द्वारा अपने खेतों में उर्वरक के रूप में उपयोग करने के लिए इस प्लांट से मुफ्त में दिया जा रहा है।

बीबीएमपी द्वारा सबमिट यह रिपोर्ट 21 सितंबर 2022 को एनजीटी की वेबसाइट पर अपलोड की गई है।

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