प्रयागराज में यमुना नदी के किनारे अवैध रेत खनन से जल स्तर में गिरावट: एनजीटी में सीपीसीबी की रिपोर्ट

गंगा न केवल भौतिक, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है; अग्निमिरह बासु/ सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)
गंगा न केवल भौतिक, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है; अग्निमिरह बासु/ सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक तरफ महाकुंभ की तैयारी चल रही है दूसरी तरफ जिले में यमुना नदी के किनारे अवैध रेत खनन जारी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने एक मामले में जारी अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया है कि खनन के कारण यमुना नदी के जलस्तर में गिरावट हो रही है।

एनजीटी में जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने रेत खनन मामले को स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है। मामले की सुनवाई 23 दिसंबर को गई।

एनजीटी ने पाया कि प्रयागराज में यमुना नदी के जल स्तर में गिरावट के कारण इन्टेक वेल और जल शोधन संयंत्रों में पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। वहीं, एनजीटी में जिला मजिस्ट्रेट प्रयागराज की रिपोर्ट के मुताबिक जल स्तर को स्थिर करने और समस्या के समाधान के लिए समिति की ओर से कई सुझाव दिए गए हैं।

इस मामले में गठित समिति ने कहा है कि गर्मियों के दौरान इन्टेक चिन्हित कुओं (इनटेक वेल) में पानी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए फ्लोटिंग पम्पिंग सिस्टम स्थापित किया जाए। साथ ही अतिरिक्त सक्शन पाइप लगाकर न्यूनतम जल स्तर पर भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

इसके अलावा रेन वाटर हार्वेस्टिंग और तालाबों के माध्यम से भू-जल स्तर सुधारने की कोशिश की जाए। समिति ने जोर देकर कहा है कि रेत खनन क्षेत्रों में सख्त निगरानी की जाए और अनुमित के मुताबिक ही काम हो।

वहीं, सीपीसीबी ने भी जल संरक्षण और अवैध खनन रोकने के लिए सुझाव दिए हैं। अब इस मामले में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के वकील ने सीपीसीबी की रिपोर्ट की प्रति प्राप्त करने और उस पर प्रतिक्रिया देने के लिए समय मांगा है।

एनजीटी इस मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी, 2025 को करेगी और इसे अन्य मामलों के साथ सूचीबद्ध किया है।

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