

केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) ने मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में स्थित बरगी बांध की सुरक्षा को लेकर भोपाल स्थित नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) को कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
यह नोटिस एनवीडीए के सदस्य (इंजीनियरिंग) को भेजा गया है, जिसमें बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के वैधानिक प्रावधानों का पालन न करने का आरोप लगाया गया है। एनडीएसए का कहना है कि बर्गी बांध का संचालन और रखरखाव अधिनियम के अनुरूप नहीं है और इससे जनसुरक्षा तथा डाउनस्ट्रीम आबादी के लिए संभावित खतरा पैदा हो रहा है।
एनडीएसए और केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की संयुक्त टीम द्वारा हाल ही में किए गए निरीक्षण और रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद यह नोटिस जारी किया गया। निरीक्षण में यह सामने आया कि बर्गी बांध, जो एक ‘स्पेसिफाइड डैम’ की श्रेणी में आता है, लंबे समय से गंभीर तकनीकी और प्रबंधन संबंधी खामियों से जूझ रहा है, लेकिन उन्हें दूर करने के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।
निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर चिंता बांध के मैसनरी स्पिलवे की गैलरी में लगातार हो रही भारी रिसाव को लेकर जताई गई। एनडीएसए के अनुसार, यह समस्या कोई नई नहीं है। केंद्रीय जल आयोग ने पहली बार 6 अप्रैल 1988 को अपने पत्र में इस रिसाव की ओर ध्यान दिलाया था और उस समय आवश्यक सुधारात्मक उपाय भी सुझाए गए थे। इसके बावजूद, रिकॉर्ड बताते हैं कि 2018 से अब तक इस रिसाव की लगातार रिपोर्टिंग होती रही है, लेकिन आज तक कोई ठोस और प्रभावी उपचारात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
प्राधिकरण ने इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए कहा है, "लंबे समय तक इस तरह की समस्या को नजरअंदाज करना बांध की संरचनात्मक मजबूती को कमजोर कर सकता है। रिसाव यदि नियंत्रित न किया जाए तो यह नींव और संरचना पर दबाव बढ़ाकर बड़े हादसे का कारण बन सकता है, जिसका सीधा असर निचले इलाकों में रहने वाली आबादी पर पड़ेगा।"
एक अन्य अहम खामी बांध पर पर्याप्त इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम की अनुपस्थिति को लेकर है। निरीक्षण दल के अनुसार, बर्गी बांध पर ऐसा कोई मजबूत तंत्र मौजूद नहीं है, जिससे संरचनात्मक स्वास्थ्य, रिसाव के व्यवहार और तनाव संबंधी मानकों की नियमित और वैज्ञानिक निगरानी की जा सके। एनडीएसए ने स्पष्ट किया है कि आधुनिक बांध प्रबंधन में इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम बेहद जरूरी होता है और इसकी कमी जोखिम को और बढ़ा देती है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्राधिकरण ने गंभीर आपत्ति जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है "गैलरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश नियंत्रण का अभाव है और बिना किसी रोक-टोक के अनधिकृत लोगों का आना-जाना लगा रहता है। एनडीएसए ने इसे सुरक्षा और संचालन अनुशासन का गंभीर उल्लंघन बताया है, जो किसी भी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए अस्वीकार्य है।"
इन सबके बावजूद, प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून निरीक्षणों के दौरान बर्गी बांध को सुरक्षा श्रेणी-III यानी ‘मामूली खामियां’ वाली श्रेणी में रखा गया। एनडीएसए ने इस वर्गीकरण को वास्तविक स्थिति से परे बताते हुए इसे सुरक्षा स्थिति की रिपोर्टिंग में “घोर लापरवाही” करार दिया है। प्राधिकरण का कहना है कि जब इतने गंभीर मुद्दे मौजूद हों, तब बांध को मामूली खामियों वाली श्रेणी में रखना जोखिम को कम करके दिखाने जैसा है।
कारण बताओ नोटिस में एनवीडीए को नोटिस प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। एनडीएसए ने चेतावनी दी है कि यदि बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया गया और जनसुरक्षा को खतरे में डालने वाली स्थितियां बनी रहीं, तो अधिनियम की धारा 41 और 42 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है। इन धाराओं में जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक प्रावधान भी शामिल हैं।
बरगी बांध नर्मदा नदी पर बना एक प्रमुख बहुउद्देश्यीय बांध है, जिससे सिंचाई, जलापूर्ति और विद्युत उत्पादन जुड़ा हुआ है। यह बांध जबलपुर और आसपास के जिलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इसकी सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक का असर बड़े भूभाग और लाखों लोगों पर पड़ सकता है।
बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत देश के सभी निर्दिष्ट बांधों के लिए नियमित निरीक्षण, जोखिम आकलन, आपातकालीन कार्ययोजना और आधुनिक निगरानी प्रणालियों को अनिवार्य किया गया है। एनडीएसए की भूमिका इन प्रावधानों के अनुपालन को सुनिश्चित करने की है। आधिकारिक दस्तावेजों और केंद्रीय जल आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पुराने बांधों में समय-समय पर संरचनात्मक आकलन और मरम्मत कार्य बेहद जरूरी माने गए हैं, खासकर उन बांधों में जो कई दशकों पहले बनाए गए हों।
एनडीएसए का यह नोटिस न केवल बरगी बांध, बल्कि देश भर में बांधों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक वर्षा और बढ़ते दबाव के दौर में बांध सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई भारी पड़ सकती है। अब देखना यह होगा कि एनवीडीए इस नोटिस पर क्या जवाब देता है और क्या बर्गी बांध की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।