केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना: भरी बरसात में दर-बदर

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना का कार्य प्रगति पर है। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के तहत छतरपुर-पन्ना सीमा पर बसे ढोढ़न गांव में बांध निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। और इसी के साथ ही इससे प्रभावित होने वाले आदिवासी-किसानों का विस्थापन और जबरन बेदखली की प्रक्रिया भी जोरों पर है। जानकार इस परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों को विनाशकारी बता रहे हैं, लेकिन इसका सामाजिक प्रभाव भी कम चिंताजनक नहीं है। इस परियोजना की जद में आ रहे पन्ना के आठ और छतरपुर के 14 गांवों के लोग अपनी जड़ों से कट रहे हैं। अधिकांश गांवों में प्रशासन गांवों को खाली कराने और घरों को तोड़ने की जल्दबाजी में है, भले ही ग्रामीणों का पुनर्वास और पूर्ण मुआवजा न मिला हो। मॉनसून के मौसम में जबरन विस्थापन से लोग भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों ने उचित पुनर्वास और पुनर्स्थापना पैकेज की मांग करते हुए चिता आंदोलन को दोबारा शुरूकिया है। वे खास तौर पर मुआवजे में लैंगिक समानता और गैर-निवासियों को दिए जाने वाले अवैध भुगतान को बंद करने की मांग कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर ढोढन गांव के पास केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का बिलबोर्ड। फोटो: ध्रुवल पारेख
मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर ढोढन गांव के पास केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का बिलबोर्ड। फोटो: ध्रुवल पारेख
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मध्य प्रदेश के मडला में केन नदी का डाउनस्ट्रीम। फोटो: ध्रुवल पारेख
मध्य प्रदेश के मडला में केन नदी का डाउनस्ट्रीम। फोटो: ध्रुवल पारेख
मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर केन नदी पर बन रहा ढोढन बांध।
फोटो: ध्रुवल पारेख
मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर केन नदी पर बन रहा ढोढन बांध। फोटो: ध्रुवल पारेख
ढोढन बांध स्थल के पास प्रभावित गांवों के विस्थापन के कारण छतरपुर जिले के पलकोहा गांव में तोड़-फोड़ का काम चल रहा है।

फोटो: ध्रुवल पारेख
ढोढन बांध स्थल के पास प्रभावित गांवों के विस्थापन के कारण छतरपुर जिले के पलकोहा गांव में तोड़-फोड़ का काम चल रहा है। फोटो: ध्रुवल पारेख
छतरपुर जिले के कुपी गांव के पास बरानी नदी पर स्थानीय आदिवासियों-ग्रामीणों का विरोध-प्रदर्शन, जिसमें वे अपने पुनर्वास और पुनर्स्थापना पैकेज के लिए उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

फोटो: ध्रुवल पारेख
छतरपुर जिले के कुपी गांव के पास बरानी नदी पर स्थानीय आदिवासियों-ग्रामीणों का विरोध-प्रदर्शन, जिसमें वे अपने पुनर्वास और पुनर्स्थापना पैकेज के लिए उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। फोटो: ध्रुवल पारेख
स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों द्वारा प्रतीकात्मक चिता विरोध-प्रदर्शन, जिसमें उनका नारा है- "न्याय दो या मार दो"।

फोटो: ध्रुवल पारेख
स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों द्वारा प्रतीकात्मक चिता विरोध-प्रदर्शन, जिसमें उनका नारा है- "न्याय दो या मार दो"। फोटो: ध्रुवल पारेख
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