संसद में आज: 23,981 उद्योग पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करते पाए गए, सरकार ने दी जानकारी

आज, नौ फरवरी, 2026 को भारत में पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों का प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन को लेकर संसद के दोनों सदनों में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के द्वारा दिया गया।
देश में 23,981 उद्योग पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करते पाए गए, जिनके विरुद्ध विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की गई।
देश में 23,981 उद्योग पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करते पाए गए, जिनके विरुद्ध विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की गई।प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • असम में ब्रह्मपुत्र नदी के कारण 33 जिलों में बाढ़ और भारी नदी कटाव से बहुत बड़ा क्षेत्र प्रभावित हुआ।

  • पंजाब में 2025 में 5,114 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुई, रोकथाम हेतु राज्यों ने कार्ययोजनाएं लागू की गई।

  • देश में 23,981 उद्योग पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करते पाए गए, जिनके विरुद्ध विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की गई।

  • तमिलनाडु की जलवायु कार्य योजना के तहत नवीकरणीय ऊर्जा, हरित मिशन और जलवायु-सहनीय कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है।

  • जल जीवन मिशन से आंध्र प्रदेश में 74.87 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल से जल आपूर्ति सुनिश्चित की गई।

देश में औद्योगिक प्रदूषण की स्थिति

संसद का बजट सत्र जारी है, वहीं सदन में उठाए गए एक साल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत में कुल 6,09,886 उद्योग हैं। इनमें से 5,44,364 उद्योग काम कर रहे हैं। इन कार्यरत उद्योगों में से 23,981 उद्योग पर्यावरण मानकों का पालन नहीं कर रहे थे।

इन अनुपालन ने करने वाले उद्योगों के खिलाफ राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) और प्रदूषण नियंत्रण समितियों (पीसीसी) द्वारा कार्रवाई की गई। इनमें 3,600 उद्योगों को बंद करने के निर्देश, 13,718 को कारण बताओ नोटिस, 229 मामलों में कानूनी केस और 6,434 निर्देश जारी किए गए। सिंह ने कहा यह कदम पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए उठाया गया है।

असम में ब्रह्मपुत्र नदी की बाढ़ और कटाव

असम में ब्रह्मपुत्र नदी हर साल बाढ़ और कटाव के कारण भारी नुकसान पहुंचाती है। इस मुद्दे को लेकर सदन में पूछे गए एक और पश्न के उत्तर में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा आईआईटी गुवाहाटी के सहयोग से किए गए अध्ययन का हवाला दिया। जिसमें कहा गया है कि साल 2003-05 से 2008-11 के बीच ब्रह्मपुत्र नदी में 252.6 वर्ग किलोमीटर भूमि का कटाव हुआ, जबकि 118.6 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मिट्टी का जमाव हुआ।

इसके अलावा सीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट “भारत में 2024 में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र का आकलन” नामक रिपोर्ट के अनुसार, 1986 से 2022 के बीच असम में 2.477 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुआ। यह राज्य के 35 में से 33 जिलों को प्रभावित करता है।

पंजाब में पराली जलाने की समस्या

देश में वायु प्रदूषण बड़ी समस्या बनी हुए है। सदन में उठाए गए एक अन्य सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में बताया कि पंजाब में पराली जलाना वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के अनुसार, सितंबर से नवंबर 2025 के बीच पंजाब में 5,114 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई।

इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पराली प्रबंधन के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार किया है। इसके आधार पर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश ने अपने-अपने राज्य-विशेष कार्ययोजनाएं बनाई हैं।

तमिलनाडु में जलवायु परिवर्तन कार्य योजना

सदन में सवालों का सिलसिला जारी रहा, एक और प्रश्न के उत्तर में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में कहा कि तमिलनाडु सरकार ने तमिलनाडु राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (2022-2030) तैयार की है। इसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, ऊर्जा दक्षता में सुधार करना और कम कार्बन विकास को प्रोत्साहित करना है।

इसके अंतर्गत ग्रीन तमिलनाडु मिशन शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर कार्बन सिंक को मजबूत करना और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा, मैंग्रोव और आर्द्रभूमि संरक्षण तथा जलवायु-सहनीय कृषि पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कोष (एनएएफसीसी) के अंतर्गत तमिलनाडु को 48 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी गई है।

सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक

प्लास्टिक को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। एसपीसीबी और पीसीसी द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, जुलाई 2022 से जनवरी 2026 तक 8,62,356 निरीक्षण किए गए।

इस दौरान 1,990 टन प्रतिबंधित प्लास्टिक जब्त किया गया और 19.85 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। यह कदम प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए अहम है।

दमन में विशेष पर्यावरण कार्य बल

सदन में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह के लिए प्रश्नों का सिलसिला जारी रहा, एक और प्रश्न के उत्तर में आज, उन्होंने लोकसभा में बताया कि दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेश में पर्यावरण नियमों के पालन के लिए दमन प्रदूषण नियंत्रण समिति ने 11 तकनीकी अधिकारियों की टीम तैनात की गई है।

पिछले सटल दमन जिले में दवा उद्योगों के लिए 20 निरीक्षण किए गए। वित्त वर्ष 2024-25 में विभिन्न उद्योगों पर 27.54 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया।

आंध्र प्रदेश में जल जीवन मिशन

सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री वी.सोमन्ना ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि कि जल जीवन मिशन की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी। उस समय आंध्र प्रदेश में केवल 32.18 फीसदी ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन था।

मिशन के अंतर्गत 62.94 फीसदी अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन दिया गया। छह फरवरी, 2026 तक कुल 74.87 फीसदी ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया जा चुका है। यह योजना ग्रामीण जीवन स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

तमिलनाडु में भूजल भंडार

भूजल को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में बताया कि केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) और राज्य एजेंसियों द्वारा हर साल भूजल संसाधनों का आकलन किया जाता है।

2025 के आकलन के अनुसार, तमिलनाडु में वार्षिक भूजल पुनर्भरण 22.61 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है। वहीं उपयोग योग्य भूजल संसाधन 20.46 बीसीएम और वार्षिक भूजल दोहन 15.04 बीसीएम आंका गया है। यह आंकड़े जल संरक्षण की जरूरत को दर्शाते हैं।

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