आंतरिक विस्थापन का कहर: 8.2 करोड़ लोग अपने ही देश में बेघर, संघर्ष और हिंसा बनी बड़ी वजह

आईडीएमसी की 'ग्लोबल रिपोर्ट ऑन इंटरनल डिस्प्लेसमेंट 2026 के मुताबिक आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की कुल संख्या पिछले एक दशक में दोगुनी हो गई 
आंतरिक विस्थापन
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कल्पना करें कि आप अपने घर में हैं, और अचानक बम गिरने लगते हैं। या फिर बाढ़ का पानी दरवाजे तक आ जाता है। आप जान बचाने के लिए भागते हैं, लेकिन किसी दूसरे देश में नहीं, बल्कि अपने ही देश की सड़कों पर। यही है 'आंतरिक विस्थापन' यानी जब कोई इंसान अपनी ही सरजमीन पर बेघर हो जाता है। 2025 के अंत तक 104 देशों के 8 करोड़ 22 लाख लोग यानी जर्मनी की पूरी आबादी से भी ज्यादा लोगों को अपने ही देशों में विस्थापित होकर रहना पड़ा। सबसे ज्यादा चिंतानजक बात यह है कि इस पूरे साल (2025) के दौरान लोगों को प्राकृतिक आपदाओं के मुकाबले युद्ध और हिंसा के कारण ज्यादा बार आंतरिक विस्थापन करना पड़ा है। 

इंटरनल डिस्प्लेसमेंट मॉनिटरिंग सेंटर (आईडीएमसी) और नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (एनआरसी) की ताजा रिपोर्ट 'ग्रिड 2026' दुनिया के सामने एक दिल दहलाने वाली तस्वीर रखती है। आईडीएमसी की नई निदेशक ट्रेसी लुकास ने अपने संदेश में साफ कहा, "साल 2025 के अंत तक 8 करोड़ 20 लाख से अधिक लोग आंतरिक रूप से विस्थापित रहे, यह 2024 की तुलना में थोड़ी गिरावट जरूर है, लेकिन अब भी रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब है। यह ध्यान देने लायक है कि पूरे साल के अंत तक इन 8 करोड़ 22 लाख में से 6 करोड़ 86 लाख लोग संघर्ष और हिंसा के कारण विस्थापित थे, जबकि 1 करोड़ 36 लाख लोग प्राकृतिक आपदाओं की वजह से विस्थापित हुए।  

पिछले एक दशक का आंकड़ा बताता है कि आंतरिक विस्थापन में यह गिरावट इस दशक में पहली बार आई है। 2016 में 3 करोड़ 89 लाख लोग विस्थापित थे। आज वह संख्या दोगुनी से भी ज्यादा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आंतरिक विस्थापन की यह गिरावट कोई सच्ची राहत नहीं है। रिपोर्ट खुद भी स्वीकार करती है कि यह आंशिक रूप से डेटा की कमी, असुरक्षित वापसी और अस्थायी समाधानों का नतीजा है।

आईडीएमसी केवल विस्थापित लोगों की गिनती नहीं करता। वह 'विस्थापन की घटनाएं' भी गिनता है। यानी एक ही इंसान को अगर साल में पांच बार भागना पड़ा, तो वह पांच गिना जाएगा। इस तरह 2025 में 146 देशों और क्षेत्रों में आंतरिक विस्थापन की घटनाएं 6 करोड़ 22 लाख बार घटीं। हालांकि, 2024 की तुलना में यह आंकड़ा छह फीसदी कम है लेकिन इसके भीतर दो बिल्कुल विपरीत रुझान छिपे हैं।

संघर्ष और हिंसा से विस्थापन की घटनाएं 60 प्रतिशत बढ़कर 3 करोड़ 23 लाख रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंची जबकि प्राकृतिक आपदाओं से विस्थापन की घटनाएं 35 प्रतिशत घटकर 2 करोड़ 99 लाख रहा, हालांकि यह भी दशकीय औसत से 13 फीसदी अधिक है।

दक्षिण एशिया: भारत-पाक और अफगान-पाक तनाव से नया तूफान

दक्षिण एशिया में 2025 संघर्ष विस्थापन का एक असाधारण साल रहा। 2024 की तुलना में 49 गुना वृद्धि दर्ज की गई । इसकी वजहसीमा पार लड़ाइयां थीं। अप्रैल के अंत में भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर में हुए सशस्त्र हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंचा। नियंत्रण रेखा  के पास लड़ाई ने भारत में 1 लाख 25 हजार और पाकिस्तान में करीब 8 हजार लोगों को विस्थापित किया। रिपोर्ट इसे 2019 के बाद की सबसे बड़ी सीमा पार घटना बताती है।

रिपोर्ट में अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच सशस्त्र हमले को लेकर कहा गया, तोरखम सीमा पर मार्च में झड़प से पाकिस्तान में 15 हजार विस्थापन हुए। अक्टूबर में अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में हवाई हमलों से 1 लाख 61 हजार लोग विस्थापित हुए।

वहीं, भारत में मणिपुर के भीतर हुए आंतरिक विस्थापन का जिक्र भी किया गया।  मई 2023 में शुरू हुई मेइती-कुकी जो सांप्रदायिक हिंसा के ढाई साल बाद भी 78 हजार लोग मणिपुर में विस्थापित हैं। आईडीएमसी की एक टीम ने अक्टूबर 2025 में वहां का दौरा किया और पाया कि 52 हजार राहत शिविरों में और 26 हजार मेजबान परिवारों के साथ रह रहे हैं।

ईरान: इतिहास का सबसे बड़ा एकल विस्थापन

अगर कोई एक घटना 2025 की रिपोर्ट को परिभाषित करती है, तो वह है ईरान की राजधानी तेहरान की घेराबंदी। इजराइल ने 13 से 24 जून 2025 के बीच ईरान में सैन्य अभियान चलाया। इजराइली सेना के निकासी आदेशों और अमेरिका की चेतावनियों ने तेहरान की अधिकांश आबादी को कैस्पियन सागर तटीय प्रांतों की ओर भागने पर मजबूर कर दिया।

पूरे एक करोड़ विस्थापन एक ही देश में दर्ज हुए। रिपोर्ट कहती है, "यह वार्षिक वैश्विक जोड़ का लगभग एक-तिहाई था और यह अब तक की सबसे बड़ी एकल संघर्ष विस्थापन घटना है जो आईडीएमसी ने इतने कम समय में दर्ज की है। लगभग 60 लाख लोग मजंदरान और 40 लाख गीलान प्रांत में शरण लेने पहुंचे। मस्जिदें और मेट्रो स्टेशन उन लोगों के लिए आश्रय बन गए जो राजधानी में ही रुक गए। 12-दिन के युद्ध के बाद माना गया कि सभी लोग वापस लौट आए।

फिलिस्तीन: जहां हर दिन विस्थापन है 

स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक, फिलिस्तीन में साल 2025 के दौरान कुल 27 लाख 56 हजार बार लोगों को विस्थापित होना पड़ा। हालांकि, साल के अंत तक भी 20 लाख लोग विस्थापित जीवन जी रहे थे, जिनमें से 13 लाख को आपातकालीन आश्रय की जरूरत थी।

गाजा में 19 जनवरी को युद्धविराम लागू हुआ, जिससे 6 लाख 42 हजार लोग उत्तरी हिस्सों की ओर लौटे, लेकिन घर बर्बाद हो चुके थे और सेवाएं नदारद थीं। मार्च में फिर शत्रुता शुरू हुई। अगस्त में गाजा में अकाल घोषित हुआ। अक्टूबर में एक और युद्धविराम हुआ, जिस दिन रोजाना के विस्थापन 1 लाख 82 हजार के चरम पर थे।

पश्चिमी तट की स्थिति भी बिगड़ी। वहां विस्थापन 1967 के बाद सबसे अधिक रहे। जनिन, तुलकर्म और नूर शम्स के शरणार्थी शिविरों पर इजराइली सैन्य अभियान में 33 हजार फिलिस्तीनी, पूरी की पूरी आबादी, भागने पर मजबूर हुई।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में एम23 विद्रोही समूह के सैन्य कब्जे ने तबाही मचाई। 97 लाख 48 हजार बार विस्थापन हुआ। यह देश का अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है और वैश्विक संघर्ष विस्थापन का एक-तिहाई है।

जनवरी-फरवरी में एम23 ने गोमा और बुकावु जैसे प्रांतीय शहर कब्जा कर लिया। 7 लाख 14 हजार विस्थापित लोगों की शरणस्थली रहे गोमा में आंतरिक विस्थापित लोगों की संख्या 97 फीसदी गिर गई, लेकिन यह राहत नहीं, बल्कि जबरदस्ती वापसी थी।

रिपोर्ट में कहा गया, "डीआरसी में संघर्ष और हिंसा के कारण विस्थापित लोगों की संख्या में 62 लाख से 43 लाख की गिरावट को प्रगति नहीं समझना चाहिए।"

हजारों लौटने वाले अपने घर नहीं जा पा रहे, वह या तो नष्ट हो चुके थे या किसी और ने कब्जा कर लिया था। जमीन विवाद, अनफटे बम और हथियारों का प्रसार नई मुसीबत बन गया। यूएस फंडिंग में भारी कटौती ने हालात और बिगाड़ दिए।

सूडान में तीन साल से दुनिया का सबसे बड़ा आईडीपी संकट

सूडान लगातार तीसरे साल दुनिया में सबसे अधिक आंतरिक विस्थापितों का देश बना रहा। 91 लाख 17 हजार लोग आंतरिक विस्थापित हुए।  अप्रैल में रैपिड सपोर्ट फोर्सेज ने जमजम विस्थापन शिविर को तबाह कर दिया। एक साल की घेराबंदी के बाद, जिससे 5 लाख आगे के विस्थापन हुए। अक्टूबर में दारफुर का आखिरी स्वतंत्र शहर एल फाशर भी गिर गया।

2025 में प्राकृतिक आपदाओं से 2 करोड़ 99 लाख विस्थापन दर्ज हुए। इसका 36 प्रतिशत यानी 1 करोड़ 7 लाख 43 हजार अकेले फिलीपींस से था। नवंबर में मानसून के साथ एक के बाद एक तूफान आए और देश के इतिहास का सर्वाधिक वार्षिक आपदा विस्थापन आंकड़ा दर्ज हुआ।

29 जुलाई 2025 को रूस के कमचटका प्रायद्वीप में 8.8 तीव्रता का भूकंप आया।  दुनिया के अब तक के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक। इसने प्रशांत महासागर में सुनामी की चेतावनी दी। चिली हजारों किलोमीटर दूर था। फिर भी वहां की सरकार ने तटीय क्षेत्रों को तुरंत खाली करवाया। 15 लाख लोगों ने पूर्व-चेतावनी निकासी की। सुनामी की लहरें उतनी ऊंची नहीं आईं जितनी आशंका थी। 31 जुलाई की सुबह तक सब सतर्कता हट गई और लोग घर लौट गए। रिपोर्ट में कहा गया, "चिली का अनुभव दिखाता है कि जब पूर्व-चेतावनी प्रणालियां, प्रशासनिक ढांचा और सामुदायिक तैयारी मजबूत होती है तो अस्थायी निवारक विस्थापन जीवन बचाने का प्रभावी उपाय बन सकता है।"

चिली में 2015 से अब तक 1 करोड़ 40 लाख लोग भूकंप-सुनामी अभ्यास में भाग ले चुके हैं।

स्विट्जरलैंड: ग्लेशियर का संदेश

28 मई 2025 को स्विट्जरलैंड के वालेस कैंटन में 'बर्च ग्लेशियर' अचानक ढह गया। अल्पाइन गांव 'ब्लाटेन' तबाह हो गया।  लगभग सारे घर, खेत, होटल बर्बाद हो गए। लेकिन एक भी जान नहीं गई, क्योंकि ग्लेशियर की अस्थिरता के संकेत 10 दिन पहले ही पकड़ लिए गए थे और 300 निवासियों को पहले ही निकाल लिया गया था। यह घटना एक बड़े सत्य की ओर इशारा करती है।  जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ गरीब देशों की समस्या नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों में 'स्लो-ऑनसेट' (धीमी गति से आने वाली) आपदाएं अचानक विनाशकारी रूप ले सकती हैं।

दावानल: साल भर जलती आग

जंगल की आग अब सिर्फ गर्मियों की समस्या नहीं रही। 2025 में वैश्विक स्तर पर दावानल से 6 लाख 94 हजार विस्थापन हुए , यह एक दशक में दूसरा सर्वाधिक आंकड़ा है।

अमेरिका के लॉस एंजेलेस काउंटी में जनवरी में आग लगी, सर्दियों में, जो पहले असामान्य था। 3 लाख 74 हजार विस्थापन हुए, 33 हजार लोग साल के अंत तक बेघर हुए। दक्षिण कोरिया ने अपने इतिहास की सबसे घातक जंगल आग देखी। मार्च 2025 में 40 हजार विस्थापन, 1 लाख 4 हजार हेक्टेयर जंगल जल गया और 31 मौतें दर्ज की गईं।

जो दिखता नहीं, वह बिगड़ता रहता है

रिपोर्ट का एक पूरा अध्याय उस खतरे पर है जो अदृश्य है। डेटा प्रणालियों की कमजोरी इसका केंद्र बिंदु है।  2025 में आईडीएमसी  ने पाया कि जिन देशों की वे निगरानी करते हैं, उनमें से 15 प्रतिशत में विस्थापन डेटा की उपलब्धता घट गई, जो 2024 की तुलना में तीन गुना ज्यादा है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन का डेटा ट्रैकिंग मैट्रिक्स जिन 26 देशों में 2024 में सर्वेक्षण करता था, उनमें से 19 में 2025 में कम दौरे हुए और 11 में तो कोई सर्वेक्षण हुआ ही नहीं। 

रिपोर्ट के मुताबिक, "मजबूत और अद्यतन डेटा के बिना, विस्थापित लोग अदृश्य हो जाने का जोखिम उठाते हैं, देखे गए रुझान वास्तविकता नहीं दर्शाते और नीति-निर्माण अधूरी जानकारी पर निर्भर हो जाता है।"

यूएन एजेंसियां जो 2020-24 के बीच 27 प्रतिशत डेटा स्रोत प्रदान करती थीं, 2025 में यह घटकर 18 प्रतिशत रह गया। इथियोपिया में आखिरी आकलन अगस्त 2024 में था, अफगानिस्तान में जुलाई 2023 में किया गया था, जबकि दोनों देशों में हालात तेजी से बदलते रहे।

क्षेत्रवार तस्वीर

उप-सहारा अफ्रीका सबसे बुरी तरह प्रभावित रहा।  1 करोड़ 73 लाख विस्थापन, वैश्विक संघर्ष विस्थापन का 42 प्रतिशत। 3 करोड़ 17 लाख लोग वहां विस्थापित जीवन जी रहे हैं। वहीं, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में 1 करोड़ 37 लाख विस्थापन, अब तक का क्षेत्रीय रिकॉर्ड है। ईरान की घटना के कारण यह क्षेत्र वैश्विक संघर्ष विस्थापन के 40 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार रहा है। पूर्व एशिया और प्रशांत में 1 करोड़ 96 लाख विस्थापन हुए, जिसमें आपदाओं का हिस्सा 89 प्रतिशत था। थाईलैंड-कंबोडिया सीमा संघर्ष से दोनों देशों के अब तक के सर्वाधिक संघर्ष विस्थापन दर्ज हुए। यूरोप और मध्य एशिया में 4 लाख 61 हजार विस्थापन हुए, जिसमें यूक्रेन-रूस युद्ध प्रमुख रहा। 37 लाख 12 हजार यूक्रेनवासी अपने देश में ही विस्थापित हैं। अमेरिका महाद्वीप में हैती, कोलंबिया और इक्वाडोर तीनों ने अपने-अपने सर्वाधिक संघर्ष विस्थापन के रिकॉर्ड बनाए।

रिपोर्ट में आंतरिक विस्थापन पर यूएन की विशेष दूत पाउला गवीरिया बेटेनकूर  ने चेताया है, "मैंने युद्ध के हथियार के रूप में जानबूझकर विस्थापन का इस्तेमाल बढ़ते देखा है। घेराबंदी की रणनीति, बिना सुरक्षा उपायों के निकासी आदेश, आबादी वाले क्षेत्रों में ड्रोन और विस्फोटक हथियारों का उपयोग...यह संघर्ष के दुर्भाग्यपूर्ण बाईप्रोडक्ट नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं।"

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