विश्व स्ट्रोक दिवस: हर मिनट है कीमती, समय पर पहचान से बच सकती है जान

हर चार में से एक वयस्क को अपने जीवनकाल में स्ट्रोक का सामना करना पड़ सकता है, स्ट्रोक के लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह व धूम्रपान से बढ़ता है खतरा
जीवनकाल में स्ट्रोक होने का जोखिम पिछले दो दशकों में लगभग 50 प्रतिशत बढ़ा है, अनुमानतः हर चार वयस्कों में एक प्रभावित होगा।
जीवनकाल में स्ट्रोक होने का जोखिम पिछले दो दशकों में लगभग 50 प्रतिशत बढ़ा है, अनुमानतः हर चार वयस्कों में एक प्रभावित होगा।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • विश्व स्ट्रोक दिवस हर साल 29 अक्टूबर को मनाया जाता है, ताकि लोगों को स्ट्रोक के लक्षणों, बचाव और तत्काल उपचार के प्रति जागरूक किया जा सके।

  • साल 2021 में दुनिया भर में स्ट्रोक के लगभग 1.19 करोड़ नए मामले सामने आए, जो इस बीमारी के बढ़ते वैश्विक बोझ को दर्शाते हैं।

  • वर्ष 2021 में वैश्विक स्तर पर करीब 9.38 करोड़ लोग स्ट्रोक के प्रभावों के साथ जीवन जी रहे थे, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार।

  • जीवनकाल में स्ट्रोक होने का जोखिम पिछले दो दशकों में लगभग 50 प्रतिशत बढ़ा है, अनुमानतः हर चार वयस्कों में एक प्रभावित होगा।

  • उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, मधुमेह, खराब कोलेस्ट्रॉल, अस्वस्थ खानपान और शारीरिक निष्क्रियता स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारक हैं, जिन्हें जीवनशैली सुधारकर काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

स्ट्रोक यानी ब्रेन स्ट्रोक एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें दिमाग के किसी हिस्से तक खून पहुंचना बंद हो जाता है या दिमाग की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है और मरीज को जीवनभर के लिए शारीरिक विकलांगता का सामना करना पड़ सकता है।

कई बार यह जानलेवा भी साबित होता है। सबसे चिंता की बात यह है कि स्ट्रोक अचानक किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकता है। इसी खतरे के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। साल 2026 में भी इसका संदेश साफ है -स्ट्रोक के लक्षण पहचानें और बिना देर किए मदद लें। क्योंकि स्ट्रोक के मामले में हर मिनट कीमती है।

चेहरे का टेढ़ा होना खतरे की घंटी

स्ट्रोक के लक्षण अक्सर अचानक दिखाई देते हैं। चेहरे का एक तरफ झुक जाना, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी आना, शरीर के एक हिस्से में सुन्नपन महसूस होना और बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी होना इसके प्रमुख संकेत हैं। कुछ लोगों को अचानक धुंधला दिखाई देने लगता है, चलने में संतुलन बिगड़ जाता है या बिना किसी स्पष्ट कारण के तेज सिरदर्द होने लगता है।

ऐसे लक्षण दिखने पर इंतजार करना या घरेलू उपचार के भरोसे बैठना खतरनाक हो सकता है। मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए और एंबुलेंस की मदद लेनी चाहिए। लक्षण कुछ मिनटों में अपने आप ठीक हो जाएं, तब भी उन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (टीआईए) हो सकता है, जिसे मिनी स्ट्रोक भी कहा जाता है। यह भविष्य में बड़े स्ट्रोक का संकेत हो सकता है और इसके लिए भी तत्काल चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

दो तरह का होता है स्ट्रोक

स्ट्रोक मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला है इस्केमिक स्ट्रोक, जो तब होता है जब खून का थक्का दिमाग तक रक्त पहुंचाने वाली नस को रोक देता है। यह स्ट्रोक का सबसे आम प्रकार है। दूसरा है हेमरेजिक स्ट्रोक, जिसमें दिमाग की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और आसपास के ऊतकों में खून बहने लगता है। दोनों ही स्थितियों में दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। सही इलाज के लिए डॉक्टरों को तत्काल जांच और ब्रेन स्कैन की जरूरत पड़ सकती है।

हाई ब्लड प्रेशर सबसे बड़ा खतरा

स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाने वाले कई कारण ऐसे हैं, जिन्हें समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है। इनमें उच्च रक्तचाप सबसे अहम है। लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने से रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। मधुमेह और खराब कोलेस्ट्रॉल भी नसों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। धूम्रपान और तंबाकू का सेवन रक्त वाहिकाओं पर बुरा असर डालते हैं।

इसके अलावा शारीरिक गतिविधियों की कमी, बढ़ता वजन, ज्यादा नमक और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन, फल-सब्जियां कम खाना तथा अत्यधिक शराब पीना भी खतरे को बढ़ाते हैं। दिल की कुछ बीमारियां, खासकर एट्रियल फिब्रिलेशन यानी दिल की धड़कन का अनियमित होना, खून के थक्के बनने और उनके दिमाग तक पहुंचने की आशंका बढ़ा सकता है। उम्र और पारिवारिक इतिहास जैसे कुछ जोखिमों को बदला नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ आदतों से कई दूसरे जोखिम कम किए जा सकते हैं।

आंकड़े बताते हैं खतरे की गंभीरता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और वैश्विक स्वास्थ्य अध्ययनों के अनुसार, साल 2021 में दुनिया भर में स्ट्रोक के करीब 1.19 करोड़ नए मामले सामने आए। इसी साल लगभग 9.38 करोड़ लोग स्ट्रोक के प्रभाव के साथ जी रहे थे। पिछले दो दशकों में जीवनकाल में स्ट्रोक होने का खतरा लगभग 50 प्रतिशत बढ़ा है। अनुमान है कि हर चार में से एक वयस्क को अपने जीवनकाल में स्ट्रोक का सामना करना पड़ सकता है।

छोटी आदतें, बड़ा बचाव

स्ट्रोक से बचाव के लिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना जरूरी है। संतुलित भोजन, रोजाना शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तंबाकू से दूरी दिमाग के साथ-साथ दिल को भी स्वस्थ रखने में मदद करती है। पहले से कोई बीमारी होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज जारी रखना चाहिए।

विश्व स्ट्रोक दिवस का संदेश केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है। यह हर व्यक्ति को सतर्क रहने और दूसरों की मदद के लिए तैयार रहने की सीख भी देता है। चेहरे का अचानक टेढ़ा होना, हाथ में कमजोरी या बोलने में परेशानी दिखे तो एक पल भी बर्बाद न करें। स्ट्रोक में समय पर इलाज ही जीवन बचाने और स्थायी नुकसान कम करने की सबसे अहम कुंजी है।

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