

मलेरिया से 2024 में दुनिया भर में 6.10 लाख लोगों की मौत, 28.2 करोड़ मामले दर्ज किए गए।
वेक्टर जनित बीमारियां सभी संक्रामक रोगों का 17 प्रतिशत से अधिक हिस्सा, हर साल सात लाख से ज्यादा मौतें।
डेंगू के खतरे में दुनिया की 5.6 अरब आबादी, हर साल लगभग 10 से 40 करोड़ लोग संक्रमित होते हैं।
20 अगस्त 1897 को रोनाल्ड रॉस की खोज ने मलेरिया संक्रमण में मच्छरों की भूमिका को वैज्ञानिक आधार दिया।
47 देश मलेरिया मुक्त प्रमाणित, 37 देशों में 2024 के दौरान एक हजार से कम मलेरिया मामले दर्ज किए गए।
हर साल 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मच्छरों और उनसे फैलने वाली बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करना, बचाव के उपायों को बढ़ावा देना और मच्छर नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक शोध तथा सामुदायिक भागीदारी की जरूरत को समझाना है।
साल 2026 के लिए सुझाई गई थीम “मच्छर: छोटे कीट, बड़ा प्रभाव - विज्ञान, बचाव और सामुदायिक कार्रवाई को आगे बढ़ाना” इस बात को रेखांकित करता है कि मच्छर केवल परेशान करने वाले कीट नहीं हैं, बल्कि दुनिया की कई गंभीर बीमारियों के वाहक भी हैं।
20 अगस्त का ऐतिहासिक महत्व
विश्व मच्छर दिवस का संबंध ब्रिटिश चिकित्सक और वैज्ञानिक सर रोनाल्ड रॉस से है। भारत में काम करते हुए रॉस ने 20 अगस्त 1897 को मलेरिया के अध्ययन में एक अहम खोज की। उन्होंने मच्छर में मलेरिया परजीवी के विकास के प्रमाण देखे और यह समझने में मदद की कि मलेरिया के प्रसार में मच्छरों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
यह खोज चिकित्सा विज्ञान के लिए एक बड़ा मोड़ थी। इससे पहले मलेरिया को लेकर कई तरह की धारणाएं थीं। रॉस के शोध ने बीमारी और उसके वाहक के बीच वैज्ञानिक संबंध को स्पष्ट किया। उनके इस योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1902 में फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार दिया गया। विश्व मच्छर दिवस इसलिए केवल मच्छरों के बारे में जागरूकता का दिन नहीं है, बल्कि चिकित्सा विज्ञान की एक ऐतिहासिक उपलब्धि को याद करने का अवसर भी है।
क्या हर मच्छर बीमारी फैलाता है?
मच्छर क्यूलिसिडे परिवार के कीट हैं और दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में पाए जाते हैं। मच्छरों की हजारों प्रजातियां हैं, लेकिन उनमें से अपेक्षाकृत कम प्रजातियां ही मनुष्यों में बीमारियां फैलाती हैं। मच्छर स्वयं मलेरिया या डेंगू पैदा नहीं करता। जब कोई विशेष मच्छर संक्रमित व्यक्ति या पशु से रोगजनक ग्रहण करता है और बाद में दूसरे व्यक्ति को संक्रमित करता है, तब बीमारी फैल सकती है।
मलेरिया संक्रमित मादा एनोफेलीज मच्छरों से फैलता है। डेंगू, चिकनगुनिया और जीका मुख्य रूप से एडीज मच्छरों, खासकर एडीस एजिप्टी और एडीस एल्बोपिक्टस, से फैलते हैं। जापानी इंसेफेलाइटिस और लिम्फैटिक फाइलेरियासिस भी मच्छरों से जुड़ी बड़ी बीमारियां हैं।
मलेरिया का बड़ा वैश्विक बोझ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वेक्टर जनित बीमारियां दुनिया में होने वाली सभी संक्रामक बीमारियों का 17 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं। इन बीमारियों के कारण हर साल 7 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। ये रोग परजीवी, बैक्टीरिया या वायरस के कारण हो सकते हैं। मच्छर, टिक, पिस्सू और अन्य वाहक संक्रमित रोगजनकों को एक व्यक्ति या पशु से दूसरे तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, साल 2024 में दुनिया भर में मलेरिया के अनुमानित 28.2 करोड़ मामले सामने आए और लगभग 6.10 लाख लोगों की मौत हुई। ये आंकड़े बताते हैं कि वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद मलेरिया आज भी एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती है।
हालांकि कुछ क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। 2024 तक 47 देशों को मलेरिया-मुक्त प्रमाणित किया जा चुका था, जबकि 37 देशों में एक हजार से कम मलेरिया मामले दर्ज किए गए। इसका अर्थ है कि लगातार निगरानी, समय पर इलाज और प्रभावी मच्छर नियंत्रण से बीमारी के बोझ को कम किया जा सकता है।
डेंगू का बढ़ता खतरा
डेंगू भी तेजी से फैलने वाली मच्छरजनित बीमारी है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनिया की आधी से अधिक आबादी यानी लगभग 5.6 अरब लोग डेंगू के खतरे वाले इलाकों में रहते हैं। हर साल लगभग 10 से 40 करोड़ डेंगू के संक्रमण होते हैं।
डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मामलों में यह गंभीर डेंगू में बदल सकता है। चिकनगुनिया में तेज बुखार के साथ जोड़ों का दर्द प्रमुख लक्षण है, जबकि जीका संक्रमण सामान्यतः हल्का हो सकता है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान संक्रमण भ्रूण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। जापानी इंसेफेलाइटिस मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है और गंभीर मामलों में तंत्रिका संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।
बचाव में सामुदायिक भागीदारी जरूरी
मच्छरजनित बीमारियों से बचाव केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना, पानी के कंटेनरों को ढककर रखना, मच्छरदानी और उचित रिपेलेंट का इस्तेमाल करना तथा मच्छरों के प्रजनन स्थलों को कम करना महत्वपूर्ण कदम हैं।
विश्व मच्छर दिवस का संदेश स्पष्ट है कि छोटे मच्छरों का प्रभाव बहुत बड़ा हो सकता है। वैज्ञानिक शोध, बेहतर निगरानी, प्रभावी रोकथाम और समुदाय की सक्रिय भागीदारी के जरिए मच्छरजनित बीमारियों का बोझ कम किया जा सकता है। वैज्ञानिक खोज से शुरू हुई यह लड़ाई आज भी लगातार जागरूकता और सामूहिक प्रयास की मांग करती है।