

दुनिया में 5.7 करोड़ से अधिक लोग डिमेंशिया से प्रभावित, हर साल करीब एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं।
अल्जाइमर रोग डिमेंशिया के 60 से 70 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार, यह सबसे आम प्रकार की बीमारी मानी जाती है।
डिमेंशिया के लगभग 45 प्रतिशत जोखिम तंबाकू, शराब, निष्क्रिय जीवनशैली और अन्य बदलने योग्य कारणों से जुड़े हैं।
डिमेंशिया के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हर साल 1.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का भारी आर्थिक बोझ पड़ता है।
डब्ल्यूएचओ ने बताया, डिमेंशिया के खतरे को घटाने के लिए उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों का नियंत्रण जरूरी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने डिमेंशिया और मानसिक क्षमता में गिरावट के खतरे को कम करने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इन दिशा-निर्देशों में बताया गया है कि जीवनभर स्वस्थ आदतों को अपनाकर और कुछ बीमारियों को नियंत्रित करके डिमेंशिया के खतरे को कम किया जा सकता है।
डिमेंशिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। दुनिया भर में 5.7 करोड़ से ज्यादा लोग डिमेंशिया से प्रभावित हैं और हर साल करीब एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं। अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम रूप है, जो इसके लगभग 60 से 70 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
जीवनशैली से जुड़े कारणों को नियंत्रित करने की जरूरत
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, डिमेंशिया का कोई निश्चित इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसके खतरे को कम करने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिमेंशिया के लगभग 45 प्रतिशत जोखिम ऐसे कारणों से जुड़े हैं, जिनमें बदलाव किया जा सकता है।
तंबाकू का सेवन, ज्यादा शराब पीना, शारीरिक गतिविधि की कमी, सामाजिक रूप से अलग-थलग रहना, वायु प्रदूषण और उच्च रक्तचाप व मधुमेह जैसी बीमारियां डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकती हैं। इसलिए इन कारणों पर ध्यान देना जरूरी है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा कि आज दुनिया को पहले से ज्यादा जानकारी है कि डिमेंशिया का खतरा किन कारणों से बढ़ता है। नई गाइडलाइन इस जानकारी को लोगों और देशों के लिए व्यावहारिक कदमों में बदलने में मदद करेगी।
स्वस्थ आदतें अपनाने पर जोर
नई गाइडलाइन में स्वस्थ जीवनशैली को डिमेंशिया से बचाव का महत्वपूर्ण तरीका बताया गया है। डब्ल्यूएचओ ने नियमित शारीरिक गतिविधि करने, धूम्रपान छोड़ने, शराब का सेवन कम करने और संतुलित आहार लेने की सलाह दी है।
इसके अलावा दिमाग को सक्रिय रखने के लिए मानसिक अभ्यास, नई चीजें सीखना और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना भी फायदेमंद बताया गया है। यह सलाह उन लोगों के लिए भी है जिनकी याददाश्त सामान्य है और उन लोगों के लिए भी जिन्हें हल्की मानसिक कमजोरी की समस्या महसूस हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, परिवार और समाज से जुड़े रहना बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। अकेलापन और सामाजिक दूरी भी दिमाग की कार्यक्षमता पर असर डाल सकते हैं।
बीमारियों को नियंत्रित करना जरूरी
डब्ल्यूएचओ ने बताया कि हृदय और शरीर से जुड़ी बीमारियों को नियंत्रित करके भी डिमेंशिया के खतरे को कम किया जा सकता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का सही इलाज जरूरी है।
नई गाइडलाइन में वायु प्रदूषण से बचाव को भी डिमेंशिया जोखिम कम करने की रणनीति में शामिल किया गया है। इसके अलावा, सुनने की क्षमता कम होने पर हियरिंग एड का इस्तेमाल भी कुछ लोगों के लिए मददगार हो सकता है।
डब्ल्यूएचओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना किसी कमी के विटामिन बी, विटामिन ई, ओमेगा-3 फैटी एसिड और मल्टीविटामिन सप्लीमेंट लेने से डिमेंशिया का खतरा कम होने का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला है। इसलिए इनका उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह और जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए।
डिमेंशिया का बढ़ता सामाजिक और आर्थिक असर
डिमेंशिया केवल मरीज को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और देखभाल करने वालों को भी प्रभावित करता है। यह बीमारी व्यक्ति की स्वतंत्रता, सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता पर असर डाल सकती है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, डिमेंशिया के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था पर हर साल लगभग 1.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का बोझ पड़ता है। इसमें परिवारों और दोस्तों द्वारा दी जाने वाली बिना भुगतान वाली देखभाल का बड़ा हिस्सा शामिल है।
नई गाइडलाइन के माध्यम से डब्ल्यूएचओ ने देशों से अपील की है कि वे गैर-संचारी रोगों, मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं को मजबूत करें। समय रहते सही जानकारी, स्वस्थ जीवनशैली और उचित इलाज के जरिए आने वाले वर्षों में डिमेंशिया के बढ़ते बोझ को कम किया जा सकता है।