

कांगो में इबोला के 5,945 मामले सामने आए, अब तक 2,862 लोगों की मौत, संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है।
डब्ल्यूएचओ ने इबोला प्रकोप पर गंभीर चिंता जताई, मामलों की बढ़ती संख्या और भौगोलिक विस्तार को बताया चिंताजनक।
बुंडिबुग्यो इबोलावायरस तेजी से फैल रहा है, इस खतरनाक स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई लाइसेंस प्राप्त टीका उपलब्ध नहीं।
कांगो सरकार ने संक्रमण रोकने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन कर्मचारियों के बीच टीकाकरण अभियान शुरू किया।
डॉक्टरों ने लोगों से बचाव के नियमों का पालन करने, मरीजों की जानकारी देने और स्वास्थ्य टीमों का सहयोग करने अपील की।
अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस दौर के प्रकोप में अब तक इबोला के 5,945 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 2,862 लोगों की मौत हो चुकी है। बड़ी संख्या में लोगों के संक्रमित होने और मौतों के कारण स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।
यह प्रकोप मई में सामने आया था। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमण को रोकने के लिए लगातार काम कर रही हैं। हालांकि, बीमारी के तेजी से फैलने के कारण अधिकारियों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
खतरनाक वायरस की नई किस्म
कांगो में इस बार इबोला का प्रकोप बुंडिबुग्यो इबोलावायरस के कारण हुआ है। यह इबोला वायरस की एक अलग किस्म है। इस वायरस को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस किस्म के खिलाफ अभी कोई लाइसेंस प्राप्त टीका या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है।
इबोला एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है। इसमें संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से वायरस फैल सकता है। बीमारी के मरीजों के साथ काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों और परिवार के सदस्यों के लिए भी संक्रमण का खतरा रहता है। इसी कारण मरीजों की जल्द पहचान और उन्हें अलग रखना बेहद जरूरी माना जाता है।
डब्ल्यूएचओ ने जताई गंभीर चिंता
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी कांगो की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। डब्ल्यूएचओने कहा है कि इबोला का प्रकोप अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का कारण बना हुआ है। संगठन की आपात समिति की 18 अगस्त को हुई बैठक के बाद यह स्थिति जारी रखने की सलाह दी गई थी।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, बीमारी के मामलों की पहचान में देरी होने से वायरस के आगे फैलने का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमण परिवारों, समुदायों और स्वास्थ्य केंद्रों में तेजी से फैल सकता है। इसलिए किसी भी संदिग्ध मामले की जल्द पहचान करना और समय पर इलाज तथा निगरानी शुरू करना जरूरी है।
डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा है कि कांगो में बुंडिबुग्यो वायरस तेजी से बदल रहा है और लगातार संक्रमण फैल रहा है। पिछले तीन महीनों में मामलों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ बीमारी का भौगोलिक क्षेत्र भी बढ़ा है। संगठन ने इसे प्रकोप के स्तर में एक बड़ी वृद्धि बताया है।
स्वास्थ्यकर्मियों के लिए शुरू हुआ टीकाकरण
संक्रमण को रोकने के लिए कांगो की सरकार ने पिछले सप्ताह इबोला के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू किया। इस अभियान में मुख्य रूप से स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य फ्रंटलाइन कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जा रही है। ये लोग संक्रमित मरीजों के सीधे संपर्क में आते हैं और इसलिए उनके संक्रमित होने का खतरा अधिक रहता है।
सरकार की कोशिश है कि स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े लोगों को सुरक्षित रखा जाए ताकि वे मरीजों की देखभाल और संक्रमण रोकने के काम में लगातार जुटे रह सकें। इसके साथ ही संदिग्ध मरीजों की पहचान, संपर्क में आए लोगों की निगरानी और संक्रमण से बचाव के उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है।
समुदाय की भूमिका सबसे अहम
इबोला को रोकने में केवल सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कोशिश काफी नहीं है। इसके लिए स्थानीय लोगों का सहयोग भी बहुत जरूरी है। इटुरी में इबोला की रोकथाम के अभियान से जुड़े डॉक्टर रिचर्ड किटेंगे ने कहा कि इस बीमारी को रोकने के लिए समुदाय की भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इबोला को खत्म करने के लिए कोई चमत्कार नहीं होगा। लोगों के सहयोग और भागीदारी से ही इस बीमारी को हराया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बचाव के नियमों का पालन करें, स्वास्थ्य टीमों के साथ सहयोग करें और बीमार लोगों को छिपाने के बजाय समय पर इसकी जानकारी दें।
समय पर सूचना मिलने से स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित व्यक्ति तक जल्दी पहुंच सकते हैं। इससे मरीज को आवश्यक सहायता देने के साथ-साथ उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान भी की जा सकती है।
आगे बड़ी चुनौती
कांगो में इबोला का बढ़ता प्रकोप स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। बढ़ते मामलों और नए इलाकों तक संक्रमण पहुंचने के कारण आने वाले दिनों में निगरानी और रोकथाम के प्रयासों को और मजबूत करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द पहचान, स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, टीकाकरण और आम लोगों का सहयोग संक्रमण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।