पाकिस्तान के उत्पीड़ित और उपेक्षित लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए जलीला हैदर को मिला राइट लाइवलीहुड अवॉर्ड

राइट लाइवलीहुड अवॉर्ड उन साहसी लोगों को सम्मानित और समर्थन देता आया है, जो सभी के लिए एक न्यायपूर्ण, शांतिपूर्ण और टिकाऊ दुनिया बनाने की दिशा में नेतृत्व कर रहे हैं
जलीला हैदर, फोटो साभार राइट लाइवलीहुड वेबसाइट
जलीला हैदर, फोटो साभार राइट लाइवलीहुड वेबसाइट
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पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान में अल्पसंख्यकों, शरणार्थियों और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए जोखिम उठाकर कानूनी लड़ाई लड़ने वाली हजारा समुदाय की वकील जलीला हैदर को 2026 के राइट लाइवलीहुड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

वह इस सम्मान को पाने वाली हजारा समुदाय की पहली महिला वकील हैं। उनकी कानूनी फर्म अब तक 7,000 से अधिक मामलों में निःशुल्क पैरवी कर चुकी है और 600 मानवाधिकार रक्षकों व राजनीतिक कार्यकर्ताओं को नो-फ्लाई सूची से बाहर निकलने में मदद कर चुकी है।

45 वर्षों से राइट लाइवलीहुड अवॉर्ड उन साहसी लोगों को सम्मानित और समर्थन देता आया है, जो सभी के लिए एक न्यायपूर्ण, शांतिपूर्ण और टिकाऊ दुनिया बनाने की दिशा में नेतृत्व कर रहे हैं। अब तक 82 देशों के 207 पुरस्कार विजेताओं को यह सम्मान दिया जा चुका है।

इनमें यूक्रेन की मानवाधिकार कार्यकर्ता ओलेक्सांद्रा मात्वीचुक, कांगो की स्त्री रोग विशेषज्ञ और महिला अधिकारों की पैरोकार डॉ. डेनिस मुकवेगे तथा अमेरिका के जनहित के वकील ब्रायन स्टीवेन्सन शामिल हैं।

हैदर पाकिस्तान के सबसे अशांत क्षेत्रों में से एक बलूचिस्तान में अल्पसंख्यकों, शरणार्थियों और ट्रांसजेंडर समुदाय को निःशुल्क कानूनी सहायता देती हैं। यहां तालिबान और सांप्रदायिक मिलिशिया जैसे गैर-राज्य सशस्त्र समूहों की मौजूदगी के साथ-साथ सैन्य बलों की भी भारी तैनाती है।

उनकी लॉ फर्म ने अब तक 7,000 से अधिक ऐसे मामलों को संभाला है, जिन्हें अन्य वकील बहुत जोखिम भरा या आर्थिक रूप से लाभहीन मानते थे। उनकी फर्म ने 600 मानवाधिकार रक्षकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को नो-फ्लाई सूची से बाहर निकलने में मदद की है।

2018 में उन्होंने अपने हजारा समुदाय के लोगों की हत्याओं को रोकने की मांग को लेकर सात दिनों तक भूख हड़ताल की थी। हजारा समुदाय शिया मुस्लिमों का एक अल्पसंख्यक समुदाय है, जिसे बलूचिस्तान में लंबे समय से सांप्रदायिक हिंसा और व्यवस्थित भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

उनकी भूख हड़ताल के बाद सेना प्रमुख ने उनसे सीधे मुलाकात की और उनके समुदाय की सुरक्षा का भरोसा दिया। यह पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार था जब हजारा महिलाओं के विरोध-प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया गया।

उन्होंने कहा, “मानवाधिकार सभी के लिए सार्वभौमिक अधिकार हैं, चाहे वह बच्चा हो, महिला हो, पुरुष हो, लड़की हो या ट्रांसजेंडर व्यक्ति। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह किस जातीय समुदाय से है। यहां तक कि उन समुदायों के अधिकारों को भी मैं कमतर नहीं कर सकती, जिनके कुछ लोग मेरे समुदाय के उत्पीड़न में शामिल रहे हैं, क्योंकि मानवाधिकार सार्वभौमिक हैं। मैं उन्हें सभी के लिए चुनती हूं, यहां तक कि उन लोगों के लिए भी जो मेरे साथ गलत करते हैं।”

बार-बार हिरासत में लिए जाने, साइबर उत्पीड़न और जान से मारने की धमकियों के बावजूद हैदर ने अपना काम जारी रखा है। उनका नाम दो बार एग्जिट कंट्रोल लिस्ट में डाला जा चुका है। 2016 में वह एक बम विस्फोट में भी बच गई थीं। यह घटना उस समय हुई, जब वह अपने कानून सहयोगी की मौत का शोक मना रही थीं। उनके सहयोगी को उसी दिन अदालत जाते समय गोली मार दी गई थी।

उन्होंने कहा है, “मुझे लगता है कि अगर मुझे वैश्विक स्तर पर पहचान नहीं मिली होती, तो शायद अब तक मेरी मौत हो चुकी होती।”

राइट लाइवलीहुड अवॉर्ड की जूरी ने कहा कि हैदर को यह सम्मान “बाधाओं को तोड़ने और अपने हजारा समुदाय की पहली महिला वकील के रूप में जातीय, राज्य और पितृसत्तात्मक उत्पीड़न को चुनौती देने के लिए दिया जा रहा है। उनका मार्गदर्शन इस विश्वास से होता है कि कोई भी इंसान अवैध नहीं है।”

राइट लाइवलीहुड के कार्यकारी निदेशक ओले फॉन यूएक्सकुल ने कहा, “हैदर ने अपना जीवन इस सरल लेकिन क्रांतिकारी विचार के आधार पर बनाया है कि कोई भी इंसान अवैध नहीं है। एक दशक से अधिक समय से उन्होंने पाकिस्तान के सबसे कमजोर समुदायों को जातीय, धार्मिक, राज्य और पितृसत्तात्मक दमन से बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली है। उन्होंने कानूनी सहायता और सड़क पर होने वाले आंदोलनों को कुशलता से जोड़ा है, जिससे पाकिस्तानी समाज में आने वाली पीढ़ियों के लिए ठोस बदलाव आया है।”

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