

विश्व आयोडीन अल्पता दिवस: 21 अक्टूबर को मनाए जाने वाले इस दिवस का उद्देश्य आयोडीन के महत्व और कमी से होने वाले नुकसान बताना है।
दिमागी विकास के लिए जरूरी: आयोडीन थायरॉइड हार्मोन बनाने में मदद करता है, जो बच्चों के मस्तिष्क, शारीरिक विकास और चयापचय के लिए आवश्यक हैं।
कमी से गंभीर बीमारियां: आयोडीन की कमी से घेंघा, थायरॉइड संबंधी समस्याएं और बच्चों में सीखने तथा बौद्धिक विकास से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।
भारत की राष्ट्रीय पहल: सरकार ने 1962 में घेंघा नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया, जिसे 1992 में राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम बनाया गया।
आयोडीन युक्त नमक अपनाएं: नमक के पैकेट पर आयोडीन की जानकारी जांचें, इसे सही तरीके से रखें और संतुलित मात्रा में इस्तेमाल करें।
हमारी रसोई में रखा नमक भले ही देखने में मामूली हो, लेकिन सेहत की दुनिया में इसकी भूमिका बेहद खास है। नमक की एक छोटी-सी चुटकी शरीर को जरूरी आयोडीन देने में मदद कर सकती है। यही आयोडीन हमारे शरीर की बढ़त, दिमाग के विकास और थायरॉइड ग्रंथि को सही तरीके से काम करने में अहम भूमिका निभाता है। आयोडीन की इसी अहमियत को समझाने के लिए हर साल 21 अक्टूबर को विश्व आयोडीन अल्पता दिवस मनाया जाता है। इसे वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार निवारण दिवस भी कहा जाता है।
शरीर के लिए क्यों जरूरी है आयोडीन?
आयोडीन एक ऐसा पोषक तत्व है, जिसकी जरूरत शरीर को बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन इसकी कमी का असर बड़ा हो सकता है। यह थायरॉइड ग्रंथि द्वारा बनने वाले हार्मोन थायरॉक्सिन (टी4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (टी3) के निर्माण में मदद करता है। ये हार्मोन शरीर के चयापचय, ऊर्जा के इस्तेमाल और शारीरिक विकास को नियंत्रित करते हैं।
खासकर गर्भावस्था और बचपन में आयोडीन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए इसकी पर्याप्त मात्रा जरूरी है। यही कारण है कि आयोडीन की कमी को केवल खानपान की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कमी हुई तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
शरीर में लंबे समय तक आयोडीन की कमी रहने से थायरॉइड ग्रंथि बढ़ सकती है। गर्दन के सामने दिखाई देने वाली इस सूजन को घेंघा या गोइटर कहा जाता है। यह आयोडीन की कमी का एक प्रमुख संकेत हो सकता है, हालांकि गर्दन में सूजन होने के दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
गंभीर कमी से थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे थकान, सुस्ती और मानसिक क्षमता पर असर पड़ सकता है। बच्चों में सीखने और समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान गंभीर आयोडीन की कमी गर्भस्थ शिशु के विकास को नुकसान पहुंचा सकती है और गर्भपात या मृत जन्म का खतरा भी बढ़ा सकती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
भारत ने समय रहते उठाए कदम
आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1962 में राष्ट्रीय घेंघा नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया था। बाद में, 1992 में इसका विस्तार कर इसे राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम (एनआईडीडीसीपी) नाम दिया गया। इसका उद्देश्य देश में आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों को कम करना और लोगों तक आयोडीन युक्त नमक पहुंचाना है।
खाने वाले नमक में आयोडीन मिलाने की नीति को भी देश में बढ़ावा दिया गया। साल 1986 से आयोडीन युक्त नमक के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नमक के जरिए लोगों को रोजाना पर्याप्त आयोडीन मिल सके।
जागरूकता ही बचाव की पहली सीढ़ी
कार्यक्रम के तहत विभिन्न क्षेत्रों में आयोडीन की कमी का आकलन, नमक में आयोडीन की मात्रा की जांच, लोगों को जागरूक करना और समय-समय पर सर्वेक्षण करना शामिल है। आयोडीन युक्त नमक की गुणवत्ता की निगरानी भी जरूरी है, ताकि लोगों तक सही मात्रा में आयोडीन पहुंच सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूनिसेफ ने भी आयोडीन की कमी से निपटने के लिए आयोडीन युक्त नमक के व्यापक इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है। दुनिया के कई देशों में इस दिशा में किए गए प्रयासों से आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों को रोकने में मदद मिली है। हालांकि, जागरूकता और नियमित निगरानी की जरूरत आज भी बनी हुई है।
रसोई में छोटी सावधानी, सेहत को बड़ा सहारा
आयोडीन की कमी से बचने का एक आसान तरीका है नियमित रूप से उचित मात्रा में आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना। नमक खरीदते समय पैकेट पर आयोडीन युक्त होने की जानकारी जरूर देखें। नमक को नमी से बचाकर बंद डिब्बे में रखें और भोजन में नमक का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करें, क्योंकि ज्यादा नमक खाना भी सेहत के लिए नुकसानदायक है।
विश्व आयोडीन अल्पता दिवस हमें याद दिलाता है कि अच्छी सेहत की शुरुआत अक्सर छोटी-छोटी आदतों से होती है। रसोई में सही नमक चुनना, संतुलित आहार लेना और पोषण के प्रति जागरूक रहना आयोडीन की कमी से बचाव में मदद कर सकता है। आखिरकार, स्वस्थ शरीर और तेज दिमाग की नींव सही पोषण से ही मजबूत होती है।