संसद में आज: भारत में टीबी के मामलों में आई 21 फीसदी की कमी

आज, तीन फरवरी, 2026 को लोकसभा व राज्यसभा में किसानों, मछुआरों, श्रमिकों, स्वास्थ्य क्षेत्र और पर्यावरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर पूछे गए प्रश्नों का अलग-अलग मंत्रालयों के द्वारा उत्तर दिया गया।
संसद में आज: भारत में टीबी के मामलों में आई 21 फीसदी की कमी
Published on
सारांश
  • टीबी उन्मूलन, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, निपाह निगरानी और वेस्ट पिकर ऐप से स्वास्थ्य और पर्यावरण सुधार लगातार हो रहा है।

  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 2021 से 2025 तक 18397 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई।

  • उत्तर प्रदेश में सूखा या आपदा की स्थिति में कृषि विभाग द्वारा सर्वे कर किसानों को सीधे राहत मिलती है।

  • तेलंगाना और पंजाब में बाढ़ तथा मौसम आपदाओं से प्रभावित किसानों को एसडीआरएफ और केंद्र योजनाओं से आर्थिक सहायता मिली।

  • सरकार केंद्रीय वित्तपोषण से 100 जलवायु अनुकूल तटीय मछुआरा गांव प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत विकसित कर रही है।

वर्तमान में संसद का बजट सत्र जारी है, जहां सरकार देश के किसानों, मछुआरों, श्रमिकों, स्वास्थ्य क्षेत्र और पर्यावरण से जुड़े सवालों का लिखित जवाब देती है। आज, तीन फरवरी, 2026 को लोकसभा और राज्यसभा में अलग-अलग मंत्रालयों द्वारा इन्हीं मुद्दों को लेकर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दिया गया।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसयाई) के अंतर्गत धनराशि का आवंटन

सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में बताया कि मंत्रालय देश में मछली पालन और जलीय कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसयाई) चला रहा है।

उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2024-25 के दौरान राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य कार्यान्वयन एजेंसियों की परियोजनाओं को कुल 18,397.37 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसमें से 8,124.84 करोड़ रुपये केंद्र सरकार का हिस्सा है।

अब तक कुल स्वीकृत राशि में से 4,977.28 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इसमें अनुसूचित जाति (एससी) के लाभार्थियों के लिए 553.40 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लाभार्थियों के लिए 519.21 करोड़ रुपये शामिल हैं। यह योजना मछुआरों की आय बढ़ाने और मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने मंए मदद कर रही है।

उत्तर प्रदेश में सूखा प्रभावित किसानों का सर्वेक्षण

एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने आज, लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में सूखा, भारी बारिश या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राज्य सरकार द्वारा सर्वेक्षण कराया जाता है। यह सर्वे राज्य कृषि विभाग और राजस्व विभाग द्वारा किया जाता है।

सर्वे के बाद सरकार के आदेशों और तय प्रक्रिया के अनुसार किसानों को राहत दी जाती है। जो किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के अंतर्गत आते हैं, उन्हें उसी योजना के अनुसार सहायता प्रदान की जाती है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि बांदा और चित्रकूट जिलों में फिलहाल सूखे की कोई स्थिति नहीं है।

तेलंगाना में कीट और चरम मौसम से फसलों का नुकसान

सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में बताया कि तेलंगाना राज्य को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के तहत 582.40 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें 436.80 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और 145.60 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा है।

केंद्र सरकार की ओर से पहली किस्त के रूप में 218.40 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। हालांकि फसल के नुकसान का केंद्रीय स्तर पर अलग से आंकड़े नहीं रखे जाते हैं। राज्य सरकार के अनुसार 2024-25 और 2025-26 में भारी बारिश, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि और असमय बारिश के कारण कृषि और बागवानी फसलों को नुकसान हुआ

नगरकुरनूल संसदीय क्षेत्र में 15,756 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुईं, जिससे 36,550 किसान प्रभावित हुए। राज्य सरकार द्वारा सभी प्रकार की क्षतिग्रस्त फसलों के लिए 10,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता दी जाती है।

पंजाब में रावी नदी की बाढ़ से प्रभावित किसान

पंजाब में बाढ़ को लेकर सदन में उठाए गए एक और प्रश्न का उत्तर देते हुए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि राज्य को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एसडीआरएफ के अंतर्गत 642.40 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें 481.60 करोड़ रुपये केंद्र और 160.80 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा है। केंद्र सरकार की ओर से दो किस्तों में 240.80 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

इसके अलावा एक अप्रैल, 2025 तक पंजाब के एसडीआरएफ के खाते में 11,947.20 करोड़ रुपये की शेष राशि उपलब्ध थी। गृह मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार साल 2025 में पंजाब में 1.93 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुआ।

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीयाई) के अंतर्गत बाढ़ प्रभावित किसानों को गेहूं के बीज वितरण के लिए 74 करोड़ रुपये की अतिरिक्त परियोजना लागत भी स्वीकृत की, जिसमें 44.40 करोड़ रुपये केंद्र का हिस्सा है।

जलवायु अनुकूल तटीय मछुआरा गांव

सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में बताया कि मत्स्य पालन विभाग ने तटीय समुदायों के विकास के लिए एक नई पहल की है। ललन सिंह ने कहा कि पीएमएमएसये के तहत 100 तटीय मछुआरा गांवों को विकसित किया जाएगा।

इस योजना को जलवायु अनुकूल तटीय मछुआरा गांव (सीआरसीएफवी) कहा जाता है। इसका उद्देश्य मछुआरा गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। यह योजना 100 फीसदी केंद्रीय वित्त पोषण पर आधारित है और प्रत्येक गांव के लिए दो करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है। इसके दिशा-निर्देश 12 फरवरी 2024 को जारी किए गए।

कचरा बीनने वालों की गणना के लिए ऐप

सदन में उठे एक प्रश्न के उत्तर में आज, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री रामदास आठवले ने लोकसभा में बताया कि नमस्ते वेस्ट पिकर ऐप के माध्यम से देशभर में कचरा बीनने वालों की प्रोफाइलिंग शुरू की गई है। अब तक शहरी क्षेत्रों में 1,52,813 कचरा बीनने वालों का सत्यापन और पंजीकरण किया जा चुका है।

देश में निपाह वायरस की स्थिति

निपाह वायरस को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा को जानकारी देते हुए कहा कि भारत में निपाह वायरस का प्रकोप पहले पश्चिम बंगाल और केरल में देखा गया है। पश्चिम बंगाल में साल 2001 और 2007, जबकि केरल में 2018, 2019, 2021, 2023, 2024 और 2025 में निपाह के मामले सामने आए।

हाल ही में जनवरी 2026 में पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में निपाह वायरस का नया मामला रिपोर्ट किया गया है।

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने एक प्रश्न के उत्तर में आज, राज्यसभा में कहा कि भारत सरकार राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) लागू कर रही है। इसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।

सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल की जाए।

टीबी उन्मूलन की दिशा में प्रगति

टीबी उन्मूलन को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में आज, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत पूरे देश में लागू किया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार भारत में टीबी की वार्षिक दर 2015 में प्रति लाख 237 मामलों से घटकर 2024 में 187 मामले रह गई है, जो 21 फीसदी की कमी दर्शाती है।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in