सर्वाइकल कैंसर से 2022 में हुई 3.5 लाख मौतें, जागरूकता बढ़ाने की जरूरत

सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह: कम व मध्यम आय वाले देशों में सर्वाइकल कैंसर का बोझ अधिक, मृत्यु का खतरा अधिक आय वाले देशों से कई गुना ज्यादा
डब्ल्यूएचओ की 90-70-90 रणनीति टीकाकरण, जांच और उपचार के माध्यम से 2100 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन का लक्ष्य रखा है।
डब्ल्यूएचओ की 90-70-90 रणनीति टीकाकरण, जांच और उपचार के माध्यम से 2100 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन का लक्ष्य रखा है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • साल 2022 में विश्वभर में 6.6 लाख महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का निदान हुआ और लगभग 3.5 लाख महिलाओं की मृत्यु हुई।

  • कम और मध्यम आय वाले देशों में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की दर और मृत्यु जोखिम अधिक आय वाले देशों की तुलना में कहीं अधिक है।

  • सर्वाइकल कैंसर से 2022 में वैश्विक स्तर पर लगभग 26 अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक और उत्पादकता नुकसान हुआ।

  • आईएआरसी के अनुसार, थर्मल एब्लेशन तकनीक सर्वाइकल प्रीकैंसर के इलाज के लिए सबसे किफायती और प्रभावी विकल्प है।

  • डब्ल्यूएचओ की 90-70-90 रणनीति टीकाकरण, जांच और उपचार के माध्यम से 2100 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन का लक्ष्य रखा है।

हर साल जनवरी महीने को ग्रीवा या सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (आईएआरसी) दुनिया भर में महिलाओं को प्रभावित करने वाली इस गंभीर बीमारी पर ध्यान आकर्षित कर रही है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक प्रमुख कैंसर है, लेकिन सही समय पर रोकथाम, जांच और इलाज से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।

साल 2022 में, दुनिया भर में लगभग छह लाख 60 हजार से अधिक महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का निदान हुआ और लगभग तीन लाख 50 हजार महिलाओं की मृत्यु इस बीमारी के कारण हुई। यह आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामले और मौतें कम और मध्यम आय वाले देशों में दर्ज की गईं।

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आंकड़ों के अनुसार, मध्यम आय वाले देशों में रहने वाली महिलाएं अधिक आय वाले देशों की महिलाओं की तुलना में लगभग दो गुना अधिक सर्वाइकल कैंसर से ग्रसित होती हैं और उनकी मृत्यु का जोखिम दो से चार गुना अधिक होता है। वहीं, कम आय वाले देशों में यह स्थिति और भी गंभीर है। इन देशों की महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से तीन गुना से अधिक प्रभावित होती हैं और मृत्यु का खतरा लगभग नौ गुना तक बढ़ जाता है।

इस असमानता का एक बड़ा कारण है सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं की कमी। कई देशों में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण, समय पर जांच और इलाज की सुविधाएं सीमित हैं। सर्वाइकल कैंसर से होने वाली समयपूर्व मौतों के कारण साल 2022 में वैश्विक स्तर पर लगभग 26 अरब अमेरिकी डॉलर का सामाजिक और आर्थिक नुकसान हुआ। कम मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) वाले देशों में यह कैंसर समयपूर्व मृत्यु से होने वाले उत्पादकता नुकसान का सबसे बड़ा कारण बना।

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आईएआरसी के शोध में पाया गया है कि थर्मल एब्लेशन नामक तकनीक सर्वाइकल कैंसर के प्रारंभिक चरण (प्रीकैंसर) के इलाज के लिए सबसे लागत-प्रभावी विकल्प है। यह तकनीक सरल, सुरक्षित और कम संसाधनों वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। इसी विषय पर आईएआरसी ने हाल ही में एक एविडेंस समरी ब्रीफ भी प्रकाशित किया है, ताकि देशों को सही नीतियां अपनाने में मदद मिल सके।

सर्वाइकल कैंसर से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने नवंबर 2020 में सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन पहल शुरू की। इसका लक्ष्य है कि साल 2100 तक सर्वाइकल कैंसर को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त कर दिया जाए। इसके लिए यह आवश्यक है कि सभी देशों में सर्वाइकल कैंसर की दर प्रति एक लाख महिलाओं पर चार से कम नए मामलों तक लाई जाए।

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डब्ल्यूएचओ की 90-70-90 रणनीति टीकाकरण, जांच और उपचार के माध्यम से 2100 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन का लक्ष्य रखा है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए डब्ल्यूएचओ ने 90-70-90 नामक तीन प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए हैं। पहला, टीकाकरण: 15 वर्ष की आयु तक 90 फीसदी लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन दी जाए। दूसरा, स्क्रीनिंग: 35 और 45 वर्ष की आयु तक 70 फीसदी महिलाओं की उच्च गुणवत्ता वाली जांच की जाए। तीसरा, इलाज: सर्वाइकल कैंसर के प्रारंभिक चरण वाली 90 फीसदी महिलाओं का उपचार और उन्नत कैंसर वाली 90 फीसदी महिलाओं का समुचित प्रबंधन किया जाए।

इन लक्ष्यों को 2030 तक हासिल करना बेहद जरूरी है, ताकि आने वाले सालों में सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने की दिशा में ठोस प्रगति हो सके। इसके लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की अहम भूमिका है। महिलाओं की जांच, सही निदान और इलाज के लिए कुशल डॉक्टरों और नर्सों की आवश्यकता है।

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आईएआरसी इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। संस्था दुनिया भर में स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दे रही है और हाल ही में डब्ल्यूएचओ अकादमी तथा अन्य साझेदारों के साथ मिलकर सर्वाइकल कैंसर की जांच, निदान और इलाज पर एक व्यापक शिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।

अंततः सर्वाइकल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसे रोका और नियंत्रित किया जा सकता है। जागरूकता, टीकाकरण, समय पर जांच और सुलभ इलाज के माध्यम से लाखों महिलाओं की जान बचाई जा सकती है। इसके लिए सरकारों, स्वास्थ्य संस्थानों और समाज को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।

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