भूटान ने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज पर पाई बड़ी जीत, दक्षिण-पूर्व एशिया में बना पहला देश

भूटान ने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज पर काबू पाया, डब्ल्यूएचओ ने उपलब्धि को दी मान्यता; दक्षिण-पूर्व एशिया में बना पहला देश, 2030 लक्ष्य की ओर बढ़ा कदम।
भूटान दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का पहला देश बना, जिसने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज पर सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर पर सफलता पाई।
भूटान दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का पहला देश बना, जिसने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज पर सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर पर सफलता पाई।फोटो साभार: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • डब्ल्यूएचओ ने भूटान में कुत्तों से फैलने वाली रेबीज को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में खत्म करने की आधिकारिक पुष्टि की।

  • भूटान दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का पहला देश बना, जिसने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज पर सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर पर सफलता पाई।

  • जून 2023 से भूटान में कुत्तों से फैलने वाली रेबीज के कारण कोई मानव मौत दर्ज नहीं हुई है।

  • कुत्तों का टीकाकरण, आबादी नियंत्रण, जागरूकता अभियान और मुफ्त पीईपी सुविधा ने भूटान की रेबीज नियंत्रण रणनीति को सफल बनाया।

  • डब्ल्यूएचओ की 2030 तक रेबीज से मानव मौतें खत्म करने की मुहिम में भूटान की उपलब्धि दूसरे देशों के लिए मिसाल बनी।

भूटान ने रेबीज की रोकथाम के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भूटान में कुत्तों से फैलने वाली रेबीज को सार्वजनिक स्वास्थ्य की समस्या के रूप में खत्म किए जाने की पुष्टि की है। इसके साथ ही भूटान डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने यह उपलब्धि हासिल की है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भूटान में जून 2023 के बाद से कुत्तों से फैलने वाली रेबीज के कारण किसी इंसान की मौत नहीं हुई है। लंबे समय तक चलाए गए टीकाकरण, कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने, लोगों में जागरूकता बढ़ाने और समय पर इलाज उपलब्ध कराने के प्रयासों ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह भी पढ़ें
रेबीज के खिलाफ कुत्तों के ओरल वैक्सीन के लिए डब्ल्यूएचओ ने की नई सिफारिशें
भूटान दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का पहला देश बना, जिसने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज पर सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर पर सफलता पाई।

रेबीज बेहद खतरनाक बीमारी

रेबीज एक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित जानवर के काटने या उसके संपर्क में आने से इंसानों तक पहुंच सकती है। बीमारी के लक्षण दिखाई देने के बाद रेबीज लगभग हमेशा जानलेवा होती है। हालांकि, समय पर सही इलाज मिलने से इससे होने वाली मौत को पूरी तरह रोका जा सकता है।

कुत्तों को रेबीज से बचाने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण किया जाता है। इससे बीमारी को उसके मुख्य स्रोत पर ही रोकने में मदद मिलती है। अगर किसी व्यक्ति को संक्रमित या संदिग्ध जानवर काट ले, तो तुरंत घाव को अच्छी तरह धोना जरूरी है। इसके बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेबीज का टीका लगाया जाता है। कुछ मामलों में रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन यानी आईआईजी भी दिया जाता है।

यह भी पढ़ें
वैज्ञानिकों ने बनाई अधिक कारगर रेबीज वैक्सीन
भूटान दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का पहला देश बना, जिसने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज पर सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर पर सफलता पाई।

‘वन हेल्थ’ बना सफलता का आधार

भूटान की सफलता के पीछे ‘वन हेल्थ’ यानी एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण की बड़ी भूमिका रही है। इस सोच के अनुसार इंसानों, जानवरों और पर्यावरण का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। इसलिए किसी बीमारी से निपटने के लिए अलग-अलग विभागों के बजाय सभी संबंधित क्षेत्रों को मिलकर काम करना जरूरी है।

भूटान ने इसी सोच के तहत स्वास्थ्य विभाग और पशु स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल बनाया। जब रेबीज का कोई संदिग्ध मामला सामने आता है, तो इंसानी और पशु स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारी मिलकर जांच करते हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि बीमारी के संपर्क में कौन-कौन लोग आए हैं और उन्हें किस तरह की चिकित्सा की जरूरत है।

यह भी पढ़ें
समुद्री कछुओं को अपना शिकार बना रहे हैं कुत्ते, अध्ययन में खुलासा
भूटान दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का पहला देश बना, जिसने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज पर सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर पर सफलता पाई।

कुत्तों का टीकाकरण और जागरूकता

भूटान ने पिछले एक दशक से ज्यादा समय में कुत्तों के बड़े पैमाने पर टीकाकरण पर लगातार काम किया। इसके साथ ही कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने और लोगों को रेबीज से बचाव के बारे में जानकारी देने के अभियान चलाए गए।

इस काम में स्थानीय समुदायों और देश की स्वयंसेवी सेवा ‘दे-सुंग’ के सदस्यों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन स्वयंसेवकों को ‘गार्डियंस ऑफ पीस’ यानी शांति के रक्षक कहा जाता है। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर टीकाकरण, कुत्तों की आबादी के प्रबंधन और लोगों को जागरूक करने में मदद की।

यह भी पढ़ें
विश्व रेबीज दिवस : हर साल 59 हजार से अधिक लोगों की जान ले रही है यह बीमारी
भूटान दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का पहला देश बना, जिसने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज पर सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर पर सफलता पाई।

डब्ल्यूएचओ ने की विस्तृत जांच

भूटान को यह मान्यता केवल सरकारी दावों के आधार पर नहीं मिली है। डब्ल्यूएचओ की ओर से इसके लिए विस्तृत जांच की गई। डब्ल्यूएचओ के सहयोग से बने क्षेत्रीय विशेषज्ञ दल ने पहले भूटान की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों की समीक्षा की। इसके बाद 17 से 22 अगस्त 2026 तक विशेषज्ञों की टीम ने भूटान का दौरा किया।

इस दौरान टीम ने स्वास्थ्य केंद्रों, प्रयोगशालाओं और अन्य संस्थानों का निरीक्षण किया। अधिकारियों से जानकारी ली गई और कार्यक्रम से जुड़े रिकॉर्ड तथा निगरानी व्यवस्था की जांच की गई। भारत से लगी सीमा के इलाके का भी दौरा किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के बाद डब्ल्यूएचओ ने भूटान की उपलब्धि को मान्यता दी।

यह भी पढ़ें
विदेशी आक्रामक प्रजातियों की आमद बढ़ा रहा है जलवायु परिवर्तन, खतरे में पड़ी देशी प्रजातियां
भूटान दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का पहला देश बना, जिसने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज पर सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर पर सफलता पाई।

आगे भी जारी रहेगा अभियान

भूटान अब इस सफलता को लंबे समय तक बनाए रखने की तैयारी कर रहा है। देश के सभी 20 जिलों में लोगों को रेबीज से बचाव के लिए मुफ्त पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीईपी) उपलब्ध कराया जाता रहेगा। कुत्तों का टीकाकरण, उनकी आबादी का प्रबंधन और इंसानों तथा जानवरों में बीमारी की निगरानी भी जारी रहेगी।

भारत से लगी सीमा के कारण पड़ोसी भारतीय राज्यों के साथ सहयोग को भी और मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य सीमा के दोनों ओर रेबीज के खतरे को कम करना है।

यह भी पढ़ें
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर किस तरह लग सकती है लगाम, कौन से जानवर होते हैं सबसे सक्रिय: अध्ययन
भूटान दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का पहला देश बना, जिसने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज पर सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर पर सफलता पाई।

दुनिया के लिए मिसाल

प्रेस विज्ञप्ति में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने भूटान को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि भूटान की सफलता दिखाती है कि इंसानों, जानवरों और पर्यावरण के स्वास्थ्य को साथ लेकर काम करने से बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य वर्ष 2030 तक कुत्तों से फैलने वाली रेबीज के कारण होने वाली इंसानी मौतों पर लगाम लगाना है। भूटान की सफलता इस लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और दूसरे देशों के लिए भी एक उपयोगी उदाहरण प्रस्तुत करती है।

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in