अल्जाइमर डिमेंशिया का सबसे आम रूप, हर साल एक करोड़ से अधिक नए मामले आते हैं सामने

विश्व अल्जाइमर दिवस: दुनिया में 5.7 करोड़ से अधिक लोग डिमेंशिया से प्रभावित, हर साल करीब एक करोड़ नए मामले; 60 से 70 फीसदी मामलों में अल्जाइमर प्रमुख कारण
डिमेंशिया के खतरे से जुड़े कई कारण बदले जा सकते हैं, जिनमें शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान, उच्च रक्तचाप और मधुमेह शामिल हैं।
डिमेंशिया के खतरे से जुड़े कई कारण बदले जा सकते हैं, जिनमें शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान, उच्च रक्तचाप और मधुमेह शामिल हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनिया में 5.7 करोड़ से अधिक लोग डिमेंशिया से प्रभावित, हर साल करीब एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं।

  • डिमेंशिया के कुल मामलों में लगभग 60 से 70 प्रतिशत मामले अल्जाइमर बीमारी से जुड़े हैं, जो इसका सबसे आम रूप है।

  • 2026 अभियान में शुरुआती निदान पर जोर, समय पर पहचान से इलाज, देखभाल, भविष्य की योजना और सहायता के विकल्प समझने में मदद।

  • लगातार बढ़ती भूलने की समस्या, परिचित कामों में कठिनाई और व्यवहार में बदलाव दिखे तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी माना जाता है।

  • डिमेंशिया के खतरे से जुड़े कई कारण बदले जा सकते हैं, जिनमें शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान, उच्च रक्तचाप और मधुमेह शामिल हैं।

हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के बारे में लोगों को जागरूक करना और इनके साथ जुड़े भ्रम और डर को कम करना है। साल 2026 में अभियान का संदेश है “जितनी जल्दी पता चलेगा, उतना अधिक किया जा सकेगा: डिमेंशिया का निदान मायने रखता है।” इस साल का जोर बीमारी की जल्द पहचान और समय पर चिकित्सकीय जांच पर है।

हर भूलने की समस्या अल्जाइमर नहीं

उम्र बढ़ने के साथ कभी-कभी चीजें भूल जाना सामान्य हो सकता है। तनाव, नींद की कमी, कुछ दवाएं और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी याददाश्त और सोचने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए हर भूलने को अल्जाइमर बीमारी मानना सही नहीं है।

लेकिन अगर याददाश्त या व्यवहार में बदलाव लगातार बढ़ रहा हो और उसका असर रोजमर्रा के जीवन पर पड़ने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

किन बदलावों पर ध्यान देना चाहिए

हाल में सीखी हुई बातें बार-बार भूलना, जरूरी तारीख या अपॉइंटमेंट याद न रहना और बातचीत की बातें दोहराना चेतावनी का संकेत हो सकता है। इसी तरह ऐसे काम करने में परेशानी होना, जिन्हें व्यक्ति लंबे समय से आसानी से करता आया है, भी ध्यान देने योग्य है।

बैंक के काम या बिल संभालने में कठिनाई, किसी परिचित रास्ते पर जाने में परेशानी, तारीख या जगह को लेकर भ्रम, सही शब्द खोजने में बार-बार दिक्कत और सामान को असामान्य जगह रखकर भूल जाना भी संज्ञानात्मक बदलाव के संकेत हो सकते हैं।

कुछ लोगों में व्यवहार और व्यक्तित्व में बदलाव भी दिखाई दे सकता है। वे पहले पसंद की जाने वाली गतिविधियों से दूर हो सकते हैं या उनमें चिंता, चिड़चिड़ापन और संदेह बढ़ सकता है।

समय पर जांच क्यों जरूरी है

2026 के अभियान में शुरुआती निदान को खास महत्व दिया गया है। सही समय पर जांच होने से व्यक्ति और उसके परिवार को यह समझने में मदद मिल सकती है कि बदलाव का कारण क्या है। इसके बाद डॉक्टर उपलब्ध इलाज, देखभाल और सहायता के विकल्पों पर चर्चा कर सकते हैं।

समय पर जानकारी मिलने से भविष्य की योजना बनाने में भी मदद मिल सकती है। व्यक्ति अपनी पसंद और जरूरतों के बारे में परिवार के साथ बातचीत कर सकता है और जरूरी फैसलों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले सकता है।

अल्जाइमर की पहचान के क्षेत्र में भी तेजी से बदलाव हो रहे हैं। रक्त आधारित बायोमार्कर, नई जांच तकनीक और क्लिनिकल ट्रायल पर शोध आगे बढ़ रहा है। ऐसे में सही समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन का महत्व और बढ़ जाता है।

हालांकि शुरुआती पहचान का मतलब खुद से बीमारी का पता लगाना नहीं है। ऑनलाइन टेस्ट या व्यावसायिक स्क्रीनिंग के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

डिमेंशिया एक ही बीमारी नहीं

डिमेंशिया किसी एक बीमारी का नाम नहीं है। यह ऐसी कई स्थितियों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है, जिनमें मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने के कारण याददाश्त, सोचने, व्यवहार और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित होती है।

अल्जाइमर की बीमारी डिमेंशिया का सबसे आम रूप है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में 5.7 करोड़ से अधिक लोग डिमेंशिया के साथ रह रहे हैं और हर साल करीब एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं। डिमेंशिया के लगभग 60 से 70 प्रतिशत मामले अल्जाइमर से जुड़े माने जाते हैं।

रोकथाम पर भी बढ़ रहा जोर

अल्जाइमर या डिमेंशिया से बचने का कोई निश्चित तरीका अभी उपलब्ध नहीं है। उम्र और कुछ अन्य कारणों को बदला नहीं जा सकता। हालांकि, कई ऐसे कारक हैं जिन पर ध्यान देकर डिमेंशिया के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

नियमित शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान से बचना, अत्यधिक शराब के सेवन से दूर रहना, सामाजिक रूप से सक्रिय रहना और उच्च रक्तचाप तथा मधुमेह जैसी समस्याओं को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण हो सकता है। वायु प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय कारकों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

विश्व अल्जाइमर दिवस का संदेश यही है कि याददाश्त या सोच में लगातार हो रहे बदलाव को केवल उम्र का हिस्सा मानकर छोड़ना जरूरी नहीं है। समय पर डॉक्टर से बात करने से बीमारी की सही वजह जानने, उपलब्ध विकल्पों को समझने और भविष्य के लिए बेहतर तैयारी करने के अवसर मिल सकते हैं। जानकारी और समय पर कदम, इस बीमारी से प्रभावित व्यक्ति और उसके परिवार दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

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