उत्तरी अमेरिका में बर्ड फ्लू का नया रूप तेजी से फैला, प्रवासी पक्षियों के मार्गों के जरिए हो रहा प्रसार

अमेरिका की डेयरी में पल रही गायों समेत स्तनधारी जीवों में लगातार फैलाव से यह वायरस भविष्य में जानवरों से इंसानों में फैलने की क्षमता विकसित कर सकता है
अध्ययन के अनुसार, इस मिलाजुला (पुनर्संयोजित) वायरस ने जंगली पक्षियों और स्तनधारियों में बड़े पैमाने पर जान ली है।  फोटो: आईस्टॉक
अध्ययन के अनुसार, इस मिलाजुला (पुनर्संयोजित) वायरस ने जंगली पक्षियों और स्तनधारियों में बड़े पैमाने पर जान ली है। फोटो: आईस्टॉक
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एवियन इन्फ्लुएंजा (एचपीएआई ) ए(एच5एन1) यानी बर्ड फ्लू का एक नया मिलाजुला वायरस अमेरिका और कनाडा में तेजी से फैल गया है।

क्लेड 2.3.4.4बी एच5एन1 वायरस, जो 2021 के अंत में उभरा था, दुनिया भर में 485 से अधिक पक्षी प्रजातियों और 48 स्तनधारी प्रजातियों को प्रभावित कर चुका है। नेचर कम्युनिकेशन में प्रकाशित एक नए अध्ययन में बताया गया है कि जीनोटाइप डी1.1 का यह नया पुनर्संयोजित (यानी मिलाजुला वायरस) संस्करण 2024 के अंत तक उत्तरी अमेरिका में लगभग पूरी तरह से क्लेड 2.3.4.4बी की जगह ले चुका है।

यह जीनोटाइप सितंबर 2024 में पक्षियों के शरदकालीन प्रवास के दौरान सामने आया और इसे अमेरिका व कनाडा में सक्रिय और निष्क्रिय निगरानी के माध्यम से ट्रैक किया गया। सक्रिय निगरानी में स्वस्थ दिखने वाले पक्षियों के नमूने लिए जाते हैं, जबकि निष्क्रिय निगरानी में बीमार या मृत पक्षियों का परीक्षण किया जाता है।

अध्ययन के अनुसार, इन पुनर्संयोजित वायरसों ने जंगली पक्षियों और स्तनधारियों में व्यापक मृत्यु का कारण बना, जिसमें केवल अमेरिका में लगभग 14,500 जंगली पक्षियों और 650 स्तनधारियों में संक्रमण पाया गया।

कनाडा में भी पहले ही वर्ष में 12 टैक्सोनोमिक समूहों और 80 जंगली पक्षी प्रजातियों में संक्रमण दर्ज हुआ, जबकि वास्तविक प्रभाव इससे अधिक हो सकता है।

फरवरी 2022 से एचपीएआई के प्रकोप ने पोल्ट्री उद्योग को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया था। अमेरिका में 2,000 से अधिक झुंडों के 18.6 करोड़ पक्षी और कनाडा में 534 झुंडों के 1.45 करोड़ से अधिक पक्षी प्रभावित हुए थे।

इस जीनोटाइप डी1.1 से मनुष्यों में 17 संक्रमण दर्ज किए गए, जिनमें 4 गंभीर और 2 घातक रहे।

यह वायरस उत्तर अमेरिकी जलपक्षियों के दक्षिण की ओर प्रवास के साथ फैला, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि मानव संक्रमणों में पाए गए स्तनधारी-अनुकूल उत्परिवर्तन पक्षियों से आए या मानव शरीर में ही विकसित हुए।

शोधकर्ताओं ने पाया कि मानव मामलों में पाए गए कुछ उत्परिवर्तन (जैसे एचए ई190डी और क्यू226एच) जंगली पक्षियों में नहीं मिले, जिससे संकेत मिलता है कि ये मानव शरीर में ही विकसित हुए। वर्तमान में इस जीनोटाइप का मानव-से-मानव संक्रमण का जोखिम कम माना जा रहा है।

अध्ययन में 926 नमूनों के विश्लेषण से पता चला कि संक्रमण उत्तरी अमेरिका के चारों प्रमुख पक्षी प्रवास मार्गों में फैला था, जिसमें सबसे अधिक मामले गीज़ और बत्तखों में पाए गए।

दिसंबर 2024 तक डी1.1 प्रमुख जीनोटाइप बन गया और अन्य जीनोटाइप लगभग समाप्त हो गए। जीनोमिक विश्लेषण से पता चला कि इस वायरस में उत्तरी अमेरिका से उत्पन्न न्यूरामिनिडेस (एनए) खंड है, जिससे इसे प्रतिरक्षा से बचने में बढ़त मिल सकती है।

हालांकि जंगली पक्षियों में प्रमुख स्तनधारी-अनुकूल उत्परिवर्तन नहीं पाए गए, फिर भी यह वायरस स्तनधारियों यहां तक कि अमेरिका की डेयरी में पल रही गायों में भी फैल रहा है, जिससे इसके आगे और विकसित होने की आशंका बनी हुई है।

ब्रिटिश कोलंबिया में पोल्ट्री में पाए गए कुछ वायरसों में एनए-एच275वाई उत्परिवर्तन मिला, जो एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर के प्रति प्रतिरोध से जुड़ा है। अध्ययन के अनुसार, वर्तमान वैक्सीन इस जीनोटाइप के खिलाफ प्रभावी हैं, जो महामारी की तैयारी के लिए सकारात्मक संकेत है।

शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि प्रवास के दौरान युवा पक्षियों की अधिक संख्या और पर्यावरणीय परिस्थितियां जैसे सूखा भी वायरस के तेजी से फैलने में सहायक हो सकती हैं। इन परिस्थितियों ने पक्षियों के बीच अधिक संपर्क और प्रजातियों के बीच संक्रमण को बढ़ावा दिया।

अंत में अध्ययन ने कहा कि इस नए जीनोटाइप का प्रसार “वन हेल्थ” दृष्टिकोण की आवश्यकता को दर्शाता है, जिसमें वन्यजीव निगरानी, कृषि जैव-सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों का समन्वय जरूरी है।

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