

सिक्किम के दक्षिणी नामची जिले में नेशनल हाइड्रो पावर कॉरपारेशेन (एनएचपीसी) की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे सभी 25 श्रमिकों के शव 96 घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद बरामद कर लिए गए हैं।
इसके साथ ही प्रशासन ने पुष्टि की है कि सुरंग में अब कोई भी व्यक्ति फंसा नहीं है और राहत एवं बचाव अभियान समाप्त कर दिया गया है।
यह हादसा 20 जुलाई को दोपहर करीब एक बजे समरदुंग स्थित 500 मेगावाट की तीस्ता स्टेज-6 परियोजना की एडीआईटी-3 सुरंग में हुआ था।
भूस्खलन के बाद मीथेन गैस के रिसाव से सुरंग के भीतर विस्फोट हुआ। इसके बाद चट्टानें ढह गईं और जहरीली गैस से भरने पर सुरंग का एक हिस्सा पूरी तरह बंद हो गया।
जिसके कारण बचाव अभियान के दौरान एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की संयुक्त टीमों को भी मीथेन गैस की अधिक मात्रा, ऑक्सीजन की कमी, सुरंग में भरे पानी और अस्थिर संरचना जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जिससे उनमें से कई बचावकर्मी बेहोश भी हो गए।
अधिकारियों के अनुसार, बुधवार रात तक 22 शव निकाले जा चुके थे, जबकि गुरुवार को तीन और शव बरामद किए गए। जिसके बाद सभी लापता श्रमिकों का पता चलने के साथ ही बचाव अभियान समाप्त कर दिया गया।
हादसे की जांच के लिए सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने पुलिस महानिरीक्षक ताशी वांग्याल की अध्यक्षता में चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति विस्फोट के कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन, वेंटिलेशन और गैस पहचान प्रणाली की स्थिति की जांच करेगी। साथ ही समिति यह पता लगाएगी कि कौन-सी गैस और किस स्रोत से रिसाव हुआ तथा भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
500 मेगावाट की तीस्ता स्टेज-VI जलविद्युत परियोजना सिक्किम के दक्षिण सिक्किम जिले के सिरवानी गांव के पास तीस्ता नदी पर प्रस्तावित रन-ऑफ-द-रिवर (नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर आधारित) जलविद्युत परियोजना है। यह परियोजना शुरू में लैंको तीस्ता हाइड्रो पावर लिमिटेड को सौंपी गई थी, लेकिन कंपनी के दिवाला (इन्सॉल्वेंसी) प्रक्रिया में जाने के कारण इसका निर्माण कार्य ठप पड़ गया। वर्ष 2019 में एनएचपीसी ने कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत इस परियोजना का अधिग्रहण किया और तब से शेष निर्माण कार्य को आगे बढ़ा रहा है।
यह हादसा एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के दौरान भू-वैज्ञानिक आकलन, पर्यावरणीय निगरानी, आपदा तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करता है।