एनजीटी ने कहा घातक हीटवेव बिगाड़ रही सेहत, कृषि और अर्थव्यवस्था, सरकार से मांगी कार्ययोजना

ट्रिब्यूनल ने माना कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण बढ़ता तापमान पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा है
दिल्ली-एनसीआर में अगले तीन दिन भीषण गर्मी, तापमान 41 से 44 डिग्री तक, येलो अलर्ट जारी, हीटवेव के आसार
दिल्ली-एनसीआर में अगले तीन दिन भीषण गर्मी, तापमान 41 से 44 डिग्री तक, येलो अलर्ट जारी, हीटवेव के आसार
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देश में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव संकट की समस्या पर गौर करते हुए नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने स्वतः संज्ञान लिया है। एनजीटी ने कहा कि बढ़ता तापमान लोगों के स्वास्थ्य, कृषि, जल उपलब्धता, उत्पादकता, वन्यजीवों और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि दिल्ली सहित कई राज्यों में भीषण लू की स्थिति बनी हुई है।

एनजीटी की प्रधानपीठ ने अखबारों में छप रही खबरों के आधार पर मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। इस मामले की सुनवाई करने वाले एनजीटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने टिप्पणी में कहा कि, "हीटवेव भारत की सबसे कम पहचानी गई पर्यावरणीय आपदाओं में से एक बनती जा रही है, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर रही है।"

ट्रिब्यूनल ने कहा कि शहरों में कंक्रीट संरचनाएं, कम हरित क्षेत्र, वाहन प्रदूषण, औद्योगिक गतिविधियां और अत्यधिक ऊर्जा उपयोग तापमान बढ़ाने के प्रमुख कारण हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक खुले में काम, सीमित शीतलन सुविधाएं और संस्थागत सहायता की कमी लोगों को अधिक प्रभावित कर रही है।

एनजीटी ने सरकार से क्षेत्रवार जलवायु अनुकूलन रणनीति, उच्च स्तरीय तापमान मैपिंग और रिमोट सेंसिंग, बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, ओपन-एक्सेस जलवायु डेटा, स्कूल और समुदाय आधारित मौसम निगरानी, हीट रिस्क और पर्यावरणीय प्रभावों पर शोध जैसे कदमों के उठाने के लिए कहा है।

ट्रिब्यूनल ने माना कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण बढ़ता तापमान पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा है।

इस मामले में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) तथा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों को पक्षकार बनाया गया है।

एनजीटी ने सभी संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई से पूर्व अपना जवाब और कार्ययोजना शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी।

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