

वैश्विक ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस पर दुनिया ने स्वच्छ ऊर्जा अपनाने, जीवाश्म ईंधन घटाने और टिकाऊ भविष्य बनाने का संकल्प दोहराया।
2026 की थीम समुदायों की भागीदारी पर केंद्रित, नवीकरणीय ऊर्जा से पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने का संदेश।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 279.26 गीगावाट पहुंची, जिसमें सौर ऊर्जा ने सबसे बड़ा योगदान दर्ज किया।
गुजरात 50.386 गीगावाट क्षमता के साथ देश का सबसे बड़ा स्वच्छ ऊर्जा योगदानकर्ता बना, नए लक्ष्य तय किए।
रूफटॉप सोलर, पवन और जल ऊर्जा के विस्तार से भारत हरित विकास और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा।
वैश्विक ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस या ग्लोबल एनर्जी इंडिपेंडेंस डे के अवसर पर दुनिया भर में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने का संदेश दिया जा रहा है। यह दिवस हर साल 10 जुलाई को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम कर सौर, पवन, जल विद्युत जैसी हरित ऊर्जा को अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित करना है।
बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच स्वच्छ ऊर्जा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इस दिन सरकारों, उद्योगों और आम नागरिकों को ऊर्जा के बेहतर उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के लिए प्रयास करने का आह्वान किया जाता है।
2026 की थीम: समुदायों की भागीदारी से बदलेगी दुनिया
ग्लोबल एनर्जी इंडिपेंडेंस डे 2026 की थीम “समुदायों को सशक्त बनाना, दुनिया को बदलना” रखी गई है। यह थीम इस बात पर जोर देती है कि स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बदलाव लाने में हर व्यक्ति, समुदाय, संस्था और व्यवसाय की भूमिका महत्वपूर्ण है।
थीम के माध्यम से लोगों को सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जल विद्युत जैसे विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण तैयार करने का संदेश दिया जा रहा है।
ऊर्जा के विकास की लंबी यात्रा
मानव सभ्यता के विकास में ऊर्जा का विशेष महत्व रहा है। पुराने समय में लोग आग, लकड़ी और प्राकृतिक संसाधनों से अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करते थे। धीरे-धीरे मनुष्य ने हवा और पानी की शक्ति का उपयोग करना सीखा। औद्योगिक विकास के साथ कोयले और पेट्रोलियम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा।
हालांकि, जीवाश्म ईंधनों के अधिक उपयोग से प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं सामने आईं। इसके बाद दुनिया ने स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर ध्यान देना शुरू किया। आज सौर, पवन और जल ऊर्जा को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।
भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा में बनाई मजबूत पहचान
भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 30 अप्रैल 2026 तक देश की कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 279.26 गीगावाट तक पहुंच गई है। इसमें सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा योगदान है।
देश में सौर ऊर्जा क्षमता 154.24 गीगावाट है, जबकि पवन ऊर्जा क्षमता 56.44 गीगावाट और बड़ी जल विद्युत क्षमता 51.66 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़े भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा की मजबूती को दर्शाते हैं।
भारत सरकार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नई परियोजनाओं, आधुनिक तकनीक और निवेश को प्रोत्साहित कर रही है। इसका उद्देश्य ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत करना है।
गुजरात बना देश का सबसे बड़ा स्वच्छ ऊर्जा केंद्र
नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में गुजरात ने देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। राज्य 50.386 गीगावाट की कुल स्थापित क्षमता के साथ भारत का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा योगदानकर्ता बन गया है।
गुजरात देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 17.82 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। राज्य पवन ऊर्जा उत्पादन में पहले स्थान पर है, जहां इसकी क्षमता 15,850.56 मेगावाट है। वहीं सौर ऊर्जा के क्षेत्र में गुजरात दूसरे स्थान पर है और यहां सौर ऊर्जा क्षमता 32,302.7 मेगावाट तक पहुंच गई है।
रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में भी गुजरात ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य में 13 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 7,408.10 मेगावाट है। गुजरात ने वर्ष 2030 तक 105 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
क्या कहते हैं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़े
हरित ऊर्जा से सुरक्षित होगा भविष्य
ग्लोबल एनर्जी इंडिपेंडेंस डे केवल एक जागरूकता दिवस नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाना जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ाकर प्रदूषण को कम किया जा सकता है और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है। सरकार, उद्योग और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से एक ऐसा भविष्य बनाया जा सकता है जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ें।