भारी वाहनों में इलेक्ट्रिक व हाइड्रोजन की ओर बदलाव से 26 प्रतिशत तक कम हो सकता है उत्सर्जन

भारी वाहनों में इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन से उत्सर्जन में भारी कमी, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन अध्ययन में डीजल की तुलना में 90 फीसदी तक फायदा दिखा।
अध्ययन में बैटरी इलेक्ट्रिक ट्रकों से डीजल की तुलना में 72 से 92 प्रतिशत कम उत्सर्जन पाया गया।
अध्ययन में बैटरी इलेक्ट्रिक ट्रकों से डीजल की तुलना में 72 से 92 प्रतिशत कम उत्सर्जन पाया गया।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • भारी वाहनों से होने वाला उत्सर्जन कुल सड़क प्रदूषण का बड़ा हिस्सा है, हालांकि ये कुल वाहनों का छोटा भाग हैं।

  • यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन अध्ययन में बैटरी इलेक्ट्रिक ट्रकों से डीजल की तुलना में 72 से 92 प्रतिशत कम उत्सर्जन पाया गया।

  • नवीकरणीय ऊर्जा से चार्ज इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रदूषण में लगभग 90 प्रतिशत तक की कमी संभव है, शोध में स्पष्ट हुआ।

  • हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहन भी उत्सर्जन घटाते हैं, पर प्रभाव हाइड्रोजन उत्पादन के तरीके पर निर्भर करता है, ग्रीन हाइड्रोजन बेहतर।

  • हाइब्रिड वाहनों से केवल सीमित एक से 26 प्रतिशत तक उत्सर्जन कमी मिलती है, इसलिए लंबे समय का समाधान इलेक्ट्रिक वाहन हैं।

डीजल से चलने वाले वैन, बस और ट्रक अभी भी सड़कों पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों की शुरुआती कीमत ज्यादा होने के बावजूद, कुल मिलाकर उनका उपयोग तेजी से आकर्षक होता जा रहा है। इसका एक बड़ा कारण डीजल ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं।

कई देशों और राज्यों में सरकारें अब स्वच्छ वाहनों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं भी शुरू कर रही हैं। उदाहरण के लिए, कुछ क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक ट्रकों की खरीद पर रिबेट या छूट दी जा रही है। इसके साथ ही कई बड़ी कंपनियां भी अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों के कारण इलेक्ट्रिक डिलीवरी वाहनों को अपना रही हैं।

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भारी वाहन और प्रदूषण का बड़ा योगदान

अध्ययन बताते हैं कि मध्यम और भारी वाहन पर्यावरण प्रदूषण में बहुत बड़ा योगदान देते हैं। हालांकि ये सड़क पर चलने वाले कुल वाहनों का केवल लगभग पांच प्रतिशत हैं, लेकिन ये करीब 30 प्रतिशत सड़क परिवहन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। इसका मतलब यह है कि अगर इन वाहनों को साफ ऊर्जा पर चलाया जाए, तो प्रदूषण में बड़ी कमी लाई जा सकती है।

क्या कहता है अध्ययन?

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर एक विस्तृत अध्ययन किया है। यह शोध “नेचर एनर्जी” नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने अलग-अलग प्रकार के ट्रकों और वैन के जीवन चक्र में होने वाले उत्सर्जन का विश्लेषण किया। इसमें छोटे भारी वाहन से लेकर 40 टन वजन तक के बड़े ट्रकों तक को शामिल किया गया।

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शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि ये वाहन कैसे चलते हैं, जैसे शहरों में बार-बार रुकने वाले डिलीवरी ट्रक या लंबी दूरी तय करने वाले ट्रक। इसके अलावा उन्होंने यह भी अध्ययन किया कि बिजली और हाइड्रोजन किस स्रोत से बनाई जा रही है।

बैटरी और हाइड्रोजन का प्रभाव

अध्ययन में पाया गया कि बैटरी-इलेक्ट्रिक वाहन और हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहन, दोनों ही डीजल की तुलना में काफी कम प्रदूषण पैदा करते हैं। लेकिन सबसे बड़ा अंतर तब दिखाई देता है जब ऊर्जा स्रोत साफ होते हैं।

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अगर बैटरी-इलेक्ट्रिक वाहन पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा से चार्ज किए जाएं, तो वे डीजल वाहनों की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत तक कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कर सकते हैं। वहीं अगर वे मौजूदा बिजली ग्रिड से चार्ज हों, तब भी वे लगभग 72 से 82 प्रतिशत तक उत्सर्जन घटा सकते हैं।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहनों में भी उत्सर्जन कम होता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि हाइड्रोजन कैसे बनाई गई है। पारंपरिक तरीके से बने हाइड्रोजन में कमी कम होती है, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा से बने “ग्रीन हाइड्रोजन” में कमी काफी अधिक हो सकती है।

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हाइब्रिड वाहनों की सीमित भूमिका

अध्ययन में यह भी पाया गया कि हाइब्रिड वाहन, जो पेट्रोल या डीजल के साथ बिजली का उपयोग करते हैं, केवल सीमित स्तर पर ही उत्सर्जन कम कर पाते हैं। इनमें औसतन केवल एक से 26 प्रतिशत तक की कमी देखी गई। इसका मतलब यह है कि हाइब्रिड तकनीक एक अस्थायी समाधान हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान नहीं।

भविष्य की दिशा

शोधकर्ताओं के अनुसार, सभी प्रकार के वाहनों में एक समान पैटर्न देखा गया। सबसे ज्यादा उत्सर्जन डीजल वाहनों में होता है, उसके बाद हाइब्रिड, फिर पारंपरिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल, फिर सामान्य बिजली से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन, और सबसे कम उत्सर्जन उन इलेक्ट्रिक वाहनों में होता है जो पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा से चलते हैं।

इस अध्ययन से यह साफ होता है कि भविष्य में परिवहन प्रणाली को स्वच्छ बनाने के लिए इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन तकनीक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि शुरुआती लागत अधिक है, लेकिन लंबे समय में यह पर्यावरण और समाज दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

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