संसद में आज: राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर में छह बायोएनर्जी परियोजनाएं पंजीकृत

आज, 11 फरवरी, 2026 को संसद के दोनों सदनों में विकास, स्वास्थ्य, तकनीक, कृषि, पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्रों को लेकर उठाए गए मुद्दों के बारे में विभिन्न मंत्रियों ने जानकारी दी
बायोगैस परियोजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।
बायोगैस परियोजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। फोटो साभार : सीएसई
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सारांश
  • एमिशन पोषण 2.0 मातृ और शिशु पोषण सुधारकर कुपोषण, एनीमिया, बौनापन और कम वजन की समस्या घटाने पर केंद्रित है।

  • सहकारिता मंत्रालय ने बालाघाट में 500 एमटी गोदाम बनाकर विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना शुरू की।

  • भारत एआई मिशन को 10,372 करोड़ रुपए देकर सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता में वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत की।

  • राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत 1,500 करोड़ की ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग प्रोत्साहन योजना शुरू की गई।

  • भारत ने स्वदेशी एंटीबायोटिक नाफिथ्रोमाइसिन विकसित कर निमोनिया उपचार और दवा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की।

पोषण 2.0

संसद का बजट सत्र जारी है, इसी बीच सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए आज, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में बताया कि भारत सरकार ने देश में कुपोषण की समस्या को कम करने के लिए मिशन पोषण 2.0 शुरू किया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाना है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योजना में शिशु और छोटे बच्चों के सही आहार के बारे में जागरूकता फैलाई जा रही है। साथ ही गंभीर कुपोषण और मध्यम कुपोषण से पीड़ित बच्चों का उपचार भी किया जा रहा है।

इस योजना में आयुष पद्धतियों के माध्यम से स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर भी जोर है। इस योजना में सामुदायिक भागीदारी, जन जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका लक्ष्य देश में एनीमिया, बौनापन, दुबलापन और कम वजन की समस्या को कम करना है।

विश्व का सबसे बड़ा अनाज भंडारण योजना

सदन में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में आज, सहकारिता मंत्रालय में मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि किसानों को मजबूत बनाने और अनाज को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने सहकारिता क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा अनाज भंडारण योजना शुरू की है। इस योजना के तहत मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले को पायलट परियोजना के रूप में चुना गया। यहां 500 मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम बनाया गया है।

यह गोदाम बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति, परसवाड़ा में बनाया गया है। इस परियोजना का उद्घाटन 24 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा किया गया। इस योजना से किसानों को अपने अनाज को सुरक्षित रखने की सुविधा मिलेगी और उन्हें उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद होगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निवेश

कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि भारत आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी 2025 रिपोर्ट में भारत को दुनिया में तीसरा स्थान मिला है। भारत गिटहब पर एआई परियोजनाओं में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता भी है।

मार्च 2024 में भारत सरकार ने इंडियाएआई मिशन शुरू किया। इस मिशन के लिए 10,372 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य देश में एआई का मजबूत तंत्र तैयार करना है, ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में नई तकनीकों का उपयोग किया जा सके। इस मिशन ने कम समय में एआई विकास की मजबूत नींव रखी है। इससे देश में नवाचार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

तटीय कटाव पर अध्ययन

सदन में उठे एक प्रश्न के उत्तर में आज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में कहा कि समुद्र के किनारे बसे क्षेत्रों में तटीय कटाव एक गंभीर समस्या है। इस समस्या को समझने के लिए राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (एनसीसीआर), जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है, ने गुजरात के वलसाड और नवसारी जिलों में अध्ययन किया।

अध्ययन में पाया गया कि वलसाड जिले के लगभग 58 प्रतिशत तट पर कटाव हुआ है। वहीं नवसारी जिले के लगभग 60 प्रतिशत तट पर भी कटाव देखा गया है। यह अध्ययन 1990 से 2022 के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। सिंह ने कहा कि इस अध्ययन से सरकार को तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।

राजस्थान में बायोगैस परियोजनाएं

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने आज, सवाल का जवाब देते हुए लोकसभा में बताया कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार बायोगैस परियोजनाओं पर काम कर रही है। बायोगैस से जैविक कचरे का सही उपयोग होता है और पर्यावरण की रक्षा होती है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है।

राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र में छह बायोएनर्जी परियोजनाएं पंजीकृत की गई हैं। बताया कि इन परियोजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। यह कदम स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण है।

ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग प्रोत्साहन योजना

ई-वेस्ट को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, कोयला एवं खान मंत्रालय में मंत्री जी. किशन रेड्डी ने लोकसभा में कहा कि आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक कचरा यानी ई-वेस्ट तेजी से बढ़ रहा है। इसे सही तरीके से पुनर्चक्रित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार ने राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीएमएम) के तहत 1,500 करोड़ रुपये की ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग प्रोत्साहन योजना शुरू की है।

यह योजना दो अक्टूबर, 2025 को शुरू की गई। इसके तहत ई-कचरा, पुरानी लिथियम-आयन बैटरियों और अन्य धातु कबाड़ की रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाई जाएगी। इस योजना से पर्यावरण संरक्षण होगा और देश में महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता बढ़ेगी।

विकिरण आधारित कृषि तकनीक

सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन तथा प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों का उपयोग किसानों के लिए लाभदायक है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी), जो परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्य करता है, ने विकिरण तकनीक और क्रॉस ब्रीडिंग की मदद से 72 नई फसल किस्में विकसित की हैं।

इनमें तिलहन, दलहन, धान, जूट और केला शामिल हैं। इन किस्मों की विशेषता है अधिक उत्पादन, जल्दी पकना और रोगों से लड़ने की क्षमता। इनमें से 32 ट्रॉम्बे किस्में ओडिशा, हरियाणा और महाराष्ट्र में जारी की गई हैं। मंत्री ने कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी।

स्वदेशी एंटीबायोटिक ‘नाफिथ्रोमाइसिन’ का विकास

एंटीबायोटिक के संबंध में सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक नाफिथ्रोमाइसिन विकसित किया गया है। इसे वॉकहार्ट समूह ने तैयार किया है। यह दवा कम्युनिटी एक्वायर्ड बैक्टीरियल निमोनिया (सीएबीपी) के इलाज के लिए बनाई गई है।

इस दवा के क्लीनिकल परीक्षण में जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी), जो जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आता है, ने सहयोग दिया। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने इस दवा की बिक्री की अनुमति दे दी है। यह उपलब्धि भारत को दवा निर्माण में आत्मनिर्भर बनाती है।

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