

पिछले साल घोषित कपास उत्पादकता मिशन का अभी तक कोई ठोस कार्यान्वयन नहीं हुआ है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणा के बावजूद, इस योजना का वर्तमान बजट में कोई उल्लेख नहीं है।
यह योजना कागजों में ही अटकी हुई है, जिससे किसानों की उम्मीदें धूमिल हो रही हैं।
कई दफा बजट में की गई बड़ी-बड़ी घोषणाएं साल बीतने के बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाती। पिछले साल के बजट में घोषित एक ऐसी ही योजना के हश्र से समझा जा सकता है।
साल 2025-26 के बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था, "सरकार कपास उगाने वाले लाखों किसानों के हित में कपास उत्पादकता मिशन शुरू कर रही है। यह मिशन पांच साल तक चलेगा। इसका उद्देश्य कपास की खेती की उत्पादकता बढ़ाना, खेती को टिकाऊ बनाना और एक्स्ट्रा-लॉन्ग स्टेपल कपास की किस्मों को बढ़ावा देना है। किसानों को विज्ञान और तकनीक से जुड़ी बेहतर मदद दी जाएगी।"
सीतारमण ने कहा था कि यह मिशन वस्त्र क्षेत्र के 5एफ विजन यानी खेत से फैशन तक की सोच के अनुरूप है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और देश के पारंपरिक वस्त्र उद्योग के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली कपास की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
उनकी इस घोषणा को उस समय काफी तवज्जो भी दी गई थी, क्योंकि पिछले कई सालों से कपास किसान लगातार बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
लेकिन पूरे एक साल बाद यानी 1 फरवरी 2026 को जब निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण दिया था तो इस योजना का जिक्र नहीं किया। बल्कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के बजट में पिछले साल घोषित कॉटन टेक्नोलॉजी मिशन के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, वर्तमान बजट में इस मिशन में कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है। कॉटन टेक्नोलॉजी मिशन का उद्देश्य देश में कपास के उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में सुधार करना था। इस मिशन के तहत कपास की उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने, विपणन और प्रसंस्करण को मजबूत करने तथा किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
कपास उत्पादकता मिशन का क्या हुआ
सवाल यह है कि कपास उत्पादकता मिशन का क्या हुआ। वित्त मंत्रालय के बजट घोषणाओं का कार्यान्वयन (2025–2026) डॉक्यूमेंट में इस मिशन का जिक्र है, जो बताता है कि कपास उत्पादकता मिशन से जुड़ा व्यय वित्त समिति (ईएफसी) का प्रस्ताव 27 मई 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कपास पर टेक्सटाइल एडवाइजरी ग्रुप की 10वीं इंटरैक्टिव बैठक में प्रस्तुत किया गया था। इस अवसर पर कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग एवं वस्त्र मंत्रालय ने संयुक्त रूप से तैयार किया गया कपास उत्पादकता मिशन का कॉन्सेप्ट नोट साझा किया।
इसके बाद 6 नवंबर 2025 को कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, वस्त्र, पर्यावरण, जैव प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग के सचिवों की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें कपास उत्पादकता मिशन से जुड़े ईएफसी प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
इन बैठकों और चर्चाओं से मिले सुझावों और फीडबैक के आधार पर मिशन का कॉन्सेप्ट नोट तैयार किया गया है और ईएफसी का प्रारूप अंतर-मंत्रालयी परामर्श के लिए अंतिम रूप दिया जा रहा है। संशोधित ईएफसी प्रस्ताव को समीक्षा और सुझाव के लिए कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के साथ साझा किया गया है।
बजट घोषणाओं का कार्यान्वयन (2025–2026) का यह डॉक्यूमेंट बताता है कि अभी तक यह योजना मंत्रालयों व विभागों के बीच कागजों में झूल रही है। वर्तमान बजट में इसका जिक्र न आने से यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इस साल यह योजना धरातल पर उतरने वाली है या नहीं?