

विश्व के 82.6 करोड़ लोग प्रतिदिन तीन डॉलर से कम आय पर जीवन गुजार रहे हैं।
दुनिया में 280 करोड़ से अधिक लोग सुरक्षित, सुलभ और पर्याप्त आवास की कमी का सामना कर रहे हैं।
विश्व में लगभग 380 करोड़ लोगों को बीमारी, बेरोजगारी और वृद्धावस्था के लिए किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।
साल 2025 में दुनिया के 28.4 करोड़ कामगार अत्यंत गरीबी में जीवन जी रहे थे, जिनमें युवाओं की स्थिति चिंताजनक है।
वर्ष 2023 से 2024 के बीच गरीबी उन्मूलन के लिए आधिकारिक विकास सहायता अनुदानों में 8.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
गरीबी केवल खाली जेब का नाम नहीं, बल्कि सुरक्षित घर, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और सम्मान के साथ जीने के अवसरों की कमी भी है। ‘शांति और मानवाधिकार के लिए एकजुट’ थीम के साथ इस साल दुनिया का ध्यान उन करोड़ों लोगों की ओर है, जो आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
हर साल 17 अक्टूबर को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि गरीबी केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि मानव गरिमा, समानता, शांति और अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। साल 2026 से 2028 तक के लिए निर्धारित थीम ‘शांति और मानवाधिकार के लिए एकजुट’ इसी सच्चाई को सामने लाती है। इस साल का केंद्र ‘सभी के लिए सुरक्षित घर’ है, जो बताता है कि गरीबी मिटाने की शुरुआत हर व्यक्ति को एक सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने से भी होती है।
गरीबी का अर्थ सिर्फ भूख नहीं
आमतौर पर गरीबी को पैसों की कमी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसकी तस्वीर इससे कहीं अधिक व्यापक है। जब किसी परिवार के पास रहने के लिए सुरक्षित घर नहीं होता, बच्चों की पढ़ाई अधूरी रह जाती है, इलाज के लिए पैसे नहीं होते और रोजगार के बावजूद दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल होता है, तब गरीबी का असली चेहरा सामने आता है।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, दुनिया में लगभग 82.6 करोड़ लोग अत्यंत गरीबी में जीवन गुजार रहे हैं। ये लोग प्रतिदिन तीन डॉलर से भी कम राशि पर गुजारा करते हैं। यह आंकड़ा बताता है कि आर्थिक विकास के दावों के बावजूद दुनिया की एक बड़ी आबादी आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही है।
करोड़ों लोगों के पास सुरक्षित घर नहीं
इस साल गरीबी उन्मूलन दिवस का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है कि हर व्यक्ति को सुरक्षित, सुलभ और किफायती आवास मिलना चाहिए। दुनिया भर में 280 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में आवास की कमी या खराब परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। इनमें गरीब, बेघर, विस्थापित और समाज के हाशिये पर रहने वाले लोगों की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है।
घर केवल चार दीवारों और छत का नाम नहीं है। यह सुरक्षा, आत्मसम्मान, पारिवारिक स्थिरता और बेहतर भविष्य की उम्मीद का आधार है। असुरक्षित घरों में रहने वाले बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। महिलाओं और बुजुर्गों को भी अनेक तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए सुरक्षित आवास को केवल सुविधा नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन के अधिकार के रूप में देखना जरूरी है।
रोजगार है, फिर भी गरीबी से जूझ रहे लोग
रोजगार मिलने के बाद भी हर व्यक्ति गरीबी से बाहर नहीं निकल पाता। साल 2025 में दुनिया के लगभग 28.4 करोड़ कामगार अत्यंत गरीबी में जीवन जी रहे थे। यह संख्या कुल कामकाजी आबादी का 7.9 प्रतिशत थी। सबसे चिंताजनक बात यह है कि युवा कामगारों के कामकाजी गरीबी का शिकार होने की आशंका वयस्कों की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।
कम मजदूरी, अस्थायी रोजगार, महंगाई और सामाजिक सुरक्षा की कमी लोगों की मुश्किलें बढ़ाती हैं। ऐसे में केवल रोजगार पैदा करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि लोगों को उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त सुविधाएं भी मिलें।
सामाजिक सुरक्षा के बिना अधूरी लड़ाई
दुनिया में लगभग 380 करोड़ लोगों के पास किसी भी तरह की सामाजिक सुरक्षा नहीं है। बीमारी, बेरोजगारी, वृद्धावस्था या किसी आपदा के समय ऐसी सुरक्षा का अभाव गरीब परिवारों को और गहरे संकट में धकेल सकता है।
इसी बीच, गरीबी कम करने पर केंद्रित आधिकारिक विकास सहायता अनुदानों में 2023 से 2024 के बीच 8.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह संकेत है कि गरीबी उन्मूलन के लिए निरंतर वित्तीय सहयोग और मजबूत नीतियों की जरूरत बनी हुई है।
शांति की नींव है न्याय और समानता
शांति का अर्थ केवल युद्ध या हिंसा का न होना नहीं है। वास्तविक शांति तब स्थापित होती है, जब लोगों को भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और न्याय के समान अवसर मिलते हैं। जब किसी व्यक्ति को गरीबी के कारण अपने अधिकारों से वंचित रहना पड़ता है, तो समाज में असमानता और असंतोष बढ़ता है।
इस वर्ष का संदेश है कि गरीबी से प्रभावित लोगों की आवाज सुनी जाए। उनके लिए नीतियां बनाने के बजाय उन्हें नीतियां बनाने की प्रक्रिया में भागीदार बनाया जाए। दोहा राजनीतिक घोषणा ने भी पर्याप्त जीवन स्तर के अधिकार को रेखांकित किया है, जिसमें सुरक्षित, सुलभ और किफायती आवास शामिल हैं।
बदलाव की शुरुआत हमारी सोच से
गरीबी उन्मूलन केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। जरूरतमंदों को सम्मान देना, शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाना, सामाजिक सुरक्षा मजबूत करना तथा सबके लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
17 अक्टूबर का यह दिवस हमें एक सरल लेकिन गहरी बात समझाता है: गरीबी से लड़ना केवल लोगों की आय बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें अधिकार, अवसर और सम्मान देना है। जब हर व्यक्ति के पास सुरक्षित घर, पर्याप्त भोजन और बेहतर भविष्य की उम्मीद होगी, तभी शांति और मानवाधिकारों पर आधारित समाज का सपना साकार हो सकेगा।