

केंद्र सरकार द्वारा 20 साल पुराने मनरेगा कानून की जगह लाए गए विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-ग्रामजी) विधेयक, 2025 के लिए केंद्रीय बजट 2026 में 95,692.31 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
सरकार इस नई योजना को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से बेहतर बताते हुए 125 दिन के रोजगार का वादा कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बजट के आंकड़े इस दावे का समर्थन नहीं करते।
लिबटेक से जुड़े विशेषज्ञ चक्रधर बुद्धा के अनुसार, मौजूदा मानकों के हिसाब से सभी सक्रिय ग्रामीण परिवारों को रोजगार देने के लिए केंद्र सरकार को कम से कम 2.3 लाख करोड़ रुपए का आवंटन करना होगा।
उन्होंने कहा, “इसके बजाय बजट में केवल 95,692 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वह भी तब, जब राज्य सरकारें अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी (करीब 64,000 करोड़ रुपए) देंगी। राज्यों के योगदान के बिना यह योजना पूरी तरह लागू ही नहीं हो सकती।”
चक्रधर बुद्धा ने कहा कि एक ओर जहां सरकार रोजगार बढ़ाने का वादा कर रही है, वहीं सरकार के पास संसाधनों की कमी साफ दिख रही है। मौजूदा आवंटन के आधार पर यह योजना साल में केवल 52 दिन का रोजगार ही सुनिश्चित कर पाएगी, जबकि दावा 125 दिनों का किया जा रहा है।
अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्य और लिबटेक इंडिया से जुड़े शोधकर्ता राजेंद्रन नारायणन ने भी बजट प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा बजट में राज्यों के अनुमानित खर्च को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है, जिससे योजना के क्रियान्वयन को लेकर भ्रम और बढ़ता है, जबकि नई योजना से स्पष्टता की उम्मीद थी।
इस बीच, केंद्रीय बजट 2026-27 में ग्रामीण रोजगार मंत्रालय को मनरेगा के मद में 30,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन भी किया गया है। यह राशि वर्ष 2025-26 में दिए गए 88,000 करोड़ रुपए के अलावा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस अतिरिक्त रकम का उपयोग मौजूदा बकाया भुगतान चुकाने और फरवरी-मार्च के खर्च को कवर करने के लिए किया जा सकता था।
यह भी माना जा रहा है कि यदि वीबी-ग्रामजी को अप्रैल से लागू नहीं किया जाता है, तो यह अतिरिक्त राशि संक्रमण काल (ट्रांजिशन पीरियड) के खर्चों को पूरा करने के लिए रखी गई हो सकती है।
गौरतलब है कि वीबी-ग्रामजी विधेयक को दिसंबर 2025 में भारी हंगामे और अव्यवस्था के बीच मात्र तीन दिनों में संसद से पारित कर दिया गया था।