पर्यावरणीय नियमों का पालन होने तक हॉट मिक्स प्लांट दोबारा नहीं चलेगा: एनजीटी

सीएक्यूएम की फ्लाइंग स्क्वाड टीम ने 9 मई को प्लांट का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर कई कमियां सामने आई थीं
एनजीटी का आदेश
एनजीटी का आदेश
Published on

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन वाली औद्योगिक इकाई को केवल तकनीकी आधार पर दोबारा संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती। जब तक निरीक्षण में सामने आई पर्यावरणीय खामियां दूर नहीं हो जातीं और लागू मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं होता, तब तक बंद किए गए प्लांट का संचालन शुरू नहीं किया जा सकता।

यह टिप्पणी हरियाणा के झज्जर जिले की बहादुरगढ तहसील के डेखोरा गांव में स्थित बैच टाइप हॉट मिक्स प्लांट से जुडे मामले में आई है। एमएस रुहिल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट इन एनसीआर एंड अदर्स मामले में एनजीटी की प्रधान पीठ ने 7 सितंबर 2026 को अपील संख्या 72/2026 का निपटारा किया। मामले की सुनवाई अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की।

सीएक्यूएम के निरीक्षण में मिली थीं कई खामियां

मामला वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ओर से 22 मई 2026 को जारी बंदी आदेश से जुडा था। इससे पहले सीएक्यूएम की फ्लाइंग स्क्वाड टीम ने 9 मई को प्लांट का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर कई कमियां सामने आई थीं।

इनमें प्लांट से मोटा और दिखाई देने वाला धुआं निकलना, मानकों के अनुरूप ईंधन का इस्तेमाल नहीं होना, स्टैक उत्सर्जन की निगरानी की व्यवस्था में कमी, जरूरी सैंपलिंग प्लेटफार्म का अभाव और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों में खामियां

शामिल थीं।

इन आधारों पर सीएक्यूएम ने प्लांट को बंद करने का निर्देश दिया था। कंपनी ने इस आदेश को एनजीटी में चुनौती दी और प्लांट बंद करने की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

सीएक्यूएम के निर्देशों को प्राथमिकता

मामले में एनजीटी के सामने एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल यह भी था कि एनसीआर में वायु प्रदूषण से जुडे मामलों में सीएक्यूएम के निर्देशों और अन्य प्राधिकरणों, जिसमें राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी शामिल है, के निर्देशों में टकराव होने पर किसका निर्देश प्रभावी होगा।

अधिकरण ने कहा कि सीएक्यूएम अधिनियम, 2021 के प्रावधानों का उन मामलों में प्रभाव रहेगा जो आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। ऐसे मामलों में अगर सीएक्यूएम के निर्देश किसी दूसरे प्राधिकरण के निर्देशों से टकराते हैं तो सीएक्यूएम के निर्देश प्रभावी होंगे।

एनजीटी का यह निष्कर्ष इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाए गए विशेष तंत्र की भूमिका स्पष्ट होती है। आयोग को एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता से जुडे मामलों में समन्वय और निर्देश जारी करने का व्यापक अधिकार दिया गया है।

पहले अनुपालन, फिर संचालन

अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी इकाई को केवल इस आधार पर दोबारा संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती कि कुछ तकनीकी या प्रक्रियागत पहलुओं को पूरा कर लिया गया है। यदि पर्यावरणीय कमियां बनी हुई हैं तो संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती।

हालांकि, एनजीटी ने प्लांट संचालक को सुधार का अवसर दिया है। कंपनी अब सीएक्यूएम के समक्ष नया प्रतिवेदन दाखिल कर सकती है। इसके साथ उसे यह दिखाने वाले दस्तावेज भी देने होंगे कि निरीक्षण में सामने आई कमियों और उल्लंघनों को दूर करने के लिए जरूरी सुधार किए जा चुके हैं।

इसके बाद सीएक्यूएम को बिना देरी के प्लांट का दोबारा निरीक्षण करना होगा। यदि निरीक्षण में सभी कमियां दूर पाई जाती हैं और लागू पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित होता है, तभी आयोग बंदी का आदेश वापस लेकर प्लांट को फिर से चलाने की अनुमति दे सकता है।

इस तरह एनजीटी ने प्लांट को तत्काल संचालन की अनुमति देने के बजाय पर्यावरणीय अनुपालन को संचालन की पूर्व शर्त माना और इसी आधार पर अपील का निपटारा कर दिया।

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in